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जंगल में हाे रही थी डाकुअाें की तलाश अचानक गाेलियाें की तड़तड़ाहट से सहमी गई पुलिस

Fri, 23 Feb 2018 09:28 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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एक महीने में बाबुली काेल गैंग से तीसरी मुठभेड़
चित्रकूट के जंगलाें में पुलिस कुख्यात डाकू बबुली कोल के गैंग काे पकड़ने के लिए छानबीन कर रही थी। अचानक गाेलियाें की तड़तड़ाहट से पुलिस की टीम सहम गई। यह बाबुली काेल के गैंग का पुलिस टीम पर हमला था। जानिए क्या है पूरा मामला।  
 
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पुलिस टीम पर अचानक चलने लगी गाेलियां
कुख्यात डाकू बबुली कोल गैंग आधुनिक असलहों से लैस है। खासकर आटो सेमी रायफल उसकी ताकत है। इस मुठभेड़ में ताबड़तोड़ फायरिंग में जैसे ही गैंग की ओर से आटोसेमी की फायरिंग शुुरू हुई तो पुलिस टीम के सदस्य बचाव की पोजीशन में आ गई। इसी बीच मौका देख डकैत भागने में सफल रहे। मुठभेड़ स्थल से मिले स्प्रिंग व थर्टी कार्बाइन इसका सबूत है। 

 
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साेलर पैनल के साथ ढेराें कारतूस मिले
यूपी-एमपी पुलिस अधिकारियों ने बैठक कर सयुंक्त रूप से डकैतों के खिलाफ अभियान चलाया है। इस माह में यह तीसरी बार साढ़ेे पांच लाख के इनामी डाकू गैंग से पुलिस का आमना-सामना हुआ। इस दौरान हर बाद देानों ओर गोलियां भी दागी गईं। एक माह मेें तीन बार गैंग से मुठभेड़ के बाद भी एक सदस्य तक नहीं पकड़ा गया और लाखों रुपये के कारतूस आदि बेकार चले गए।

 

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पुलिस काे बाबुली काेल की तलाश
इसे लेकर कई बार सवाल भी खड़े होते हैं कि आखिर आमने-सामने से मुठभेड़ के बाद भी डाकू भागने में सफल हो जाते हैं और पुलिस टीम खाली हाथ लौटती है। जब किसी डाकू को गोली मारकर पकड़ती है तो उसके दूसरे दिन कई सवाल भी खड़े हो जाते हैं। मुठभेड़ के बाद कुछ लेटरपैड मिले हैं। जिसमें लिखा है कि दस्यु सम्राट बबुली।

 
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जंगल में बाबुली काेल की तलाश करती पुलिस
इन लेटरपैड का प्रयोग गैंग फिरौती व रंगदारी वसूलने में करता है। मोबाइल व डायरी से कई राज खुल सकते हैं। पुुलिस अधीक्षक प्रताप गोपेंद्र सिंह ने बताया कि इसकी जांच कराई जा रही है। जरूरत पड़ने पर रिकार्ड के आधार पर कार्रवाई भी होगी।  
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