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‘भगवान का अवतार’ बनकर फैलाया मायाजाल और फिर ड्राइवर को बना दिया सोहंगदेव उर्फ श्यामबाबा

Fri, 18 Aug 2017 12:03 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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आरोपी सुंदरलाल कुशवाहा (फाइल फोटो) 
हमीरपुर के बांक गांव का रहने वाला सुंदरलाल पुत्र रामप्रसाद खुद को कृष्ण का अवतार बताकर लोगों के बीच मायाजाल फैलाने लगा था। 15 सालों से वह खुद को सद्गुरू कहते हुए लोगों से पूजा अर्चना कराने लगा। इसी बीच उसका संपर्क लोडर चालक पतारा कुरारा हाल मुकाम कपरिया निवासी घनश्याम से हो गया। किराए में लोडर ले जाने वाला घनश्याम उर्फ श्यामबाबा भी सुंदरलाल कुशवाहा के मायाजाल के  गिरफ्त में आ गया। जिस पर सुंदरलाल ने घनश्याम को पुजारी बताते हुए उसका नाम सोहंगदेव उर्फ श्यामबाबा दे दिया। मगर पिछलेे जून माह में गांव में यज्ञ भंडारे के बाद गुरू व शिष्य के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया। जिस पर शिष्य ने गुरू से नाता तोड़ लिया।  
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रोती बिलखती मृतक की पत्नी रजोला।
शिष्य को मनाने के लिए गुरू उसके घर बराबर आता जाता रहा। मगर शिष्य व उसका परिवार पूरी तरह से नाता तोड़ लिया। इस बीच जब गुरू का मायाजाल समाप्त होने लगा तो उसने एक माह पूर्व समाधि लेने की घोषणा की और जन्माष्टमी के दिन कुछ नया करने की बात कहकर अपने घर के अंदर बनी गद्दी में अंर्तध्यान हो गया। एक माह बाद जन्माष्टमी के दिन उसने अपने अन्य शिष्यों के माध्यम से शिष्य सोहंगदेव को बुलवा लिया। शिष्य के आने पर उसने गांव में धूमधाम के साथ शोभायात्रा निकाली।  
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बांक में घटना स्थल पर मौजूद ग्रामीणों की भीड़।
गांव के बाहर बने यज्ञस्थल पर जमकर रासलीला की और उसके बाद रात में जन्माष्टमी का पूजन अर्चन के बाद शिष्य की आंगन में ही बलि चढ़ा दी। मृतक सोहंगदेव के पुत्र जीतू व सचिन प्रजापति ने बताया कि उनके पिता की हत्या की गई है। बताया कि दैवीय शक्तियां प्राप्त करने के लिए गुरुदेव महाराज ने उनके पिता की बलि चढ़ा दी है।  

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बांक में ग्रामीणों से जानकारी लेते एएसपी।
फॉरेसिंक टीम ने लिए नमूने
घटनास्थल पर पहुंचे फॉरेसिंक टीम ने मृतक के खून के नमूने लिए। साथ ही घटनास्थल के अलग-अलग दिशाओं से फोटो व वीडियो बनाए। फॉरेसिंक एक्सपर्ट मोहम्मद अजहर ने बताया कि घटना में 50 घंटे से अधिक का समय हो गया है। जिससे शव में कीड़े पड़ गए हैं और बदबू दे रहा है।  
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मृतक घनश्याम का फाइल फोटो।
ये था पूरा मामला दैवीय शक्तियां हासिल करने के लिए खुद को कृष्णावतार बताने वाले गुरू ने अष्टमी की रात अपने ही शिष्य/पुजारी की ही बलि चढ़ा दी। घटना के बाद शव को घर से दूर एक खंडहर में छिपा दिया।  
खुद को कृष्णावतार बताकर धड़ से अलग कर दिया शिष्य का गला, हत्या के बाद गायब हो गया गुरू
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