कानपुर में कोरोना संक्रमित तीन गंभीर मरीजों को अस्पतालों में बेड न मिलने से जान चली गई। परिवारीजन इसके लिए कोविड कमांड सेंटर और सीएमओ दफ्तर के चक्कर लगाते रहे। घंटों इधर से उधर भटकते एक को अस्पताल में बेड मिला तब तक देर हो चुकी थीं। दूसरे ने घर पहुंचकर दम तोड़ दिया। तीसरे को भर्ती होने का लेटर मिल चुका था लेकिन अस्पताल वाले इंतजार कराते रहे और जान चली गई। कोरोना मरीजों को इलाज न मिल पाने के कारण लगातार मौतें हो रही हैं।
विज्ञापन
2 of 8
नहीं है अंतिम संस्कार करने के लिए जगह
- फोटो : amar ujala
नौबस्ता गोपाल नगर में भी ऐसा ही मामला सामने आया। चार दिन पहले पिता की कोरोना से मौत के बाद सोमवार की रात को बेटे की भी इलाज के अभाव में मौत हो गई। बहू प्राइवेट कोविड अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रही है। मंत्री सतीश महाना से फोन करवाने के बाद 12 घंटे बाद एंबुलेंस शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जा सकी। इसके बाद पहुंची पुलिस ने घर को सील कर दिया। संक्रमण की लहर ने कुछ ही दिनों में हंसते खेलते पूरे घर को तहस नहस कर दिया। नौबस्ता गोपाल नगर निवासी गोपाल कृष्ण दीक्षित 80 रेलवे से रिटायर्ड थे।
विज्ञापन
3 of 8
विद्युत शव दाह ग्रह के पार्क में हुआ अंतिम संस्कार
- फोटो : amar ujala
घर पर बेटा उतम दीक्षित 45, बहू पिंकी 40, दो पोते राघवेंद्र 24 व रत्नेश 21 के साथ हंसी खुशी जीवन यापन कर रहे थे। चार दिनों पूर्व कृष्ण दीक्षित को बुखार और सांस लेने में दिक्कत हुई। उन्हें भर्ती कराने का प्रयास किया गया लेकिन बेड नहीं मिला। घर आकर उनकी मौत हो गई। इसके बाद उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद उत्तम दीक्षित और पिंकी की भी तबीयत बिगड़ने लगी। उनकी भी रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद पिंकी को तो बेटों ने किसी तरह जुगाड़ कर प्राइवेट कोविड अस्पताल में भर्ती करा दिया, लेकिन उत्तम को किसी अस्पताल में बेड नहीं मिल सका।
4 of 8
घाट पर अंतिम संस्कार के लिए लंबी लाइनें
- फोटो : amar ujala
बेटों ने उनके लिए घर पर ही ऑक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था की। इसके बाद सोमवार की रात उनकी मौत हो गई। आसपास रहने वाले लोगों ने बताया कि दुखी परिवार रात भर हेल्पलाइन नंबर पर फोन कर मदद मांगता रहा, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। मंत्री सतीश महाना के हस्तक्षेप के बाद हैलट से एक एंबुलेंस 12 घंटे बाद उनके घर पहुंची और शव को लेकर गई। अस्पताल में भर्ती पिंकी की भी हालत गंभीर है। वहीं, छोटे बेटे रत्नेश का भी स्वास्थ्य ठीक नहीं है। बड़े बेटे राघवेंद्र के अनुसार कोरोना से घर में दो मौतों के बाद भी प्रशासन ने अभी तक उनकी जांच नहीं कराई है।
विज्ञापन
5 of 8
कोरोना से मचा कोहराम
- फोटो : amar ujala
वहीं कल्याणपुर निवासी बीपी त्रिपाठी को कोविड अस्पताल में बेड नहीं मिला। बीपी त्रिपाठी (51) को चार दिन से बुखार आ रहा था। कोरोना जैसे लक्षण थे, पर आरटीपीसीआर रिपोर्ट निगेटिव आई थी। हालांकि सीटी स्कैन में फेफड़ों में संक्रमण की पुष्टि हुई थी। परिजन उन्हें किसी भी कोविड हॉस्पिटल में भर्ती कराने के लिए कोविड कमांड सेंटर और सीएमओ दफ्तर के चक्कर लगाते रहे, लेकिन दोनों जगह से उन्हें टरकाया जाता रहा। इस बीच मजबूरन उन्हें न्यू शिवली रोड कल्याणपुर स्थित कान्हा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां रात 11:30 बजे बीपी त्रिपाठी की मौत हो गई।
विज्ञापन
6 of 8
अस्पतालों में नहीं मिल रहे बेड
- फोटो : amar ujala
तेजाब मिल कैंपस निवासी प्रवीण कुमार चौरसिया 43 की मंगलवार शाम कृष्णा अस्पताल में की चौखट पर सांसें उखड़ गईं। अस्पताल प्रशासन उन्हें भर्ती कर इलाज करने के बजाए इंतजार कराता रहा। जबकि केंद्रीय कंट्रोल रूम से उन्हें इस अस्पताल में भर्ती कराने के लिए भेजा गया गया था। प्रवीण को 4 दिन से बुखार आ रहा था। उन्हें रामादेवी स्थित मंगला हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। मंगलवार को कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर वहां से डॉक्टरों ने उन्हें कोविड अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी। परिजन उन्हें भर्ती कराने के लिए केंद्रीय कंट्रोल रूम और सीएमओ दफ्तर के घंटों चक्कर लगाते रहे।
विज्ञापन
7 of 8
कोरोना से मचा कोहराम
- फोटो : amar ujala
शाम करीब 4 बजे उन्हें कृष्णा हॉस्पिटल में ले जाकर भर्ती कराने के लिए कहां गया। परिजन मरीज को ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस से उन्हें कृष्णा हॉस्पिटल ले गए। अस्पताल के रिसेप्शन में केंद्रीय कंट्रोल रूम से इस अस्पताल में भेजे जाने का हवाला देकर भर्ती करने की गुहार लगाई, पर रिसेप्शन में बैठे कर्मचारियों ने उन्हें इंतजार करने के लिए कहा। मरीज की हालत बिगड़ने का हवाला देकर बार-बार गुहार भी लगाई गई, पर रिसेप्शन में हर बार थोड़ी देर में भर्ती करने की बात कही गई। इस तरह अस्पताल के असंवेदनशील रवैया के चलते दो घंटे में ही प्रवीण की जीवन लीला समाप्त हो गई।
मोहल्ले वाले भूल गए मानवता
दीक्षित परिवार के बचे हुए लोगों को कोई पानी देने वाला नहीं है। मोहल्ले वाले मानवता भूल गए। शाम को अपने ताऊ और ताई के साथ घर लौटे राघवेंद्र को पता चला कि पुलिस ने उनके घर को सील कर दिया है। सभी भूखे प्यासे दरवाजे के पास ही बैठ गए, लेकिन आसपास रहने वाले किसी शख्स ने मानवता दिखाते हुए उन्हें पानी तक पीने को नहीं दिया। उन्होंने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है, लेकिन वहां से भी मदद नहीं मिली।