कानपुर हैलट में मानवता शर्मसार हो रही है। ऐसे मुश्किल वक्त में कोरोना रोगियों के शव विद्युत शवदाह गृह भेजने के नाम पर वसूली की जा रही है। सिंधी कालोनी के रहने वाले तरुण चावला के 80 साल के पिता की रविवार को और 65 साल की मां की सोमवार को मौत हो गई।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
दोनों कोरोना संक्रमित थे। तरुण का आरोप है कि शव भेजने के लिए सरकारी एंबुलेंस नहीं मिली। स्टाफ की बताई प्राइवेट एंबुलेंस नहीं की तो उनके और मौसा के साथ हाथापाई की। हैलट में तरुण के पिता को पहले वार्ड चार और मां को वार्ड तीन में रखा गया।
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हालत बिगड़ी तो न्यूरो साइंसेज कोविड अस्पताल में भर्ती कर लिया। तरुण ने बताया कि माता-पिता की स्थिति का भी फीडबैक नहीं दिया गया। वे माता-पिता को दूसरे अस्पताल शिफ्ट कराना चाहते थे, सीएमओ से लिखवाकर भी लाए लेकिन कोई तवज्जो नहीं मिली।
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तरुण का आरोप है कि स्टाफ ने शव देने के नाम पर पांच हजार रुपये ले लिए और वाहन लाने को कहा। उन्होंने ढाई हजार रुपये में बाहर से वैन बुलाई तो वहां खड़े दूसरे वाहनों के ड्राइवरों ने उसे भगा दिया। वे लोग पांच हजार मांग रहे थे।
बता दें कि सोमवार को कानपुर में कोरोना से रिकार्ड मौतें हुई हैं। कोरोना संक्रमित कुल 36 रोगियों की जान चली गई। इनमें 24 घंटे के अंदर की 21 मौतें है। 15 मौतें 24 घंटे के कुछ पहले की हैं जिन्हें पोर्टल पर सोमवार को अपडेट किया गया।