मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को फर्रुखाबाद लोकसभा क्षेत्र में अपने 17 मिनट के भाषण में सभी के दिलों तक पहुंचने का काम किया। उन्होंने किसानों के आलू की बात की तो युवाओं के रोजगार के बारे में भी बात करना भी नहीं भूले। अपने भाषण में उन्होंने नक्सलवाद, आतंकवाद पर भी चर्चा की। कांग्रेस के दस वर्ष के कार्यकाल को भी वह कोसना नहीं भूले।
आगे की स्लाइड में पढ़िए- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 17 मिनट का सियासी खेल
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फर्रुखाबाद में चुनावी जनसभा को संबोधित करते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री ने कहा कि मनमोहन सरकार में आए दिन भ्रष्टाचार के मामले सामने आते रहते थे। देश के संसाधनों पर पहला अधिकार मुस्लिमों का है, कांग्रेस के इस तुष्टीकरण की राजनीति को याद दिलाकर ध्रुवीकरण करने का भी प्रयास किया। अपराधियों को जेल भेजने या रामनाम सत्य की बात कह कर योगी आदित्यनाथ ने बेहतर कानून व्यवस्था का भी जनसभा में आए लोगों को भरोसा दिया।
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फर्रुखाबाद में चुनावी जनसभा को संबोधित करते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सभा में विधायक मेजर सुनील दत्त, अमर सिंह खटिक, नागेंद्र सिंह व विधायक सुशील शाक्य ने भी खूब सपा-बसपा व कांग्रेस पर तीर चलाए। सभी ने एकजुटता दिखाते हुए जनता से मुकेश राजपूत के लिए समर्थन मांगा।
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फर्रुखाबाद में चुनावी जनसभा को संबोधित करते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
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योगी आदित्यनाथ अपने निर्धारित समय 1.05 बजे से 25 मिनट देरी से 1.30 बजे हेलीकॉप्टर से सभा स्थल पर तकीपुर गांव पहुंचे। इससे पहले ही अलीगंज के पूर्व विधायक अवधपाल सिंह यादव ने सभा को संबोधित किया। उन्होंने अपने समाज के लोगों से भाजपा को समर्थन देने को कहा। मुख्यमंत्री के आने के बाद सांसद मुकेश राजपूत ने सभा को संबोधित किया। उन्होंने अपने द्वारा कराए गए कार्य, प्रदेश व केंद्र सरकार की उपलब्धियों को गिनाया।
फर्रुखाबाद में चुनावी जनसभा को संबोधित करते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
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मुख्यमंत्री के आने से पहले कई नेता भाजपा में शामिल हुए। इसमें बसपा के राजन राय, जौली राजपूत, बाबू अग्निहोत्री, सभासद अतुल शंकर दुबे, अनुुभव कनौजिया, श्यामसुंदर लल्ला, लव कनौजिया, सोनू बाजपेई, पुरुषोत्तम वर्मा, अनिल श्रीवास्व, अनुज मिश्रा व एके राठौर आदि शामिल हुए। भाजापा में शामिल हुए कई दलों के नेताओं एक ओर जहां पार्टी को मजबूती दिलाने का काम किया तो विपक्षी दलों में हलचल मचा दी।