यूपी में हमीरपुर जिले के चर्चित सामूहिक हत्याकांड में भाजपा विधायक अशोक सिंह चंदेल समेत सभी 10 आरोपियों को हमीरपुर की निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) द्वारा इस आधार पर बरी कर दिया गया था कि एफआईआर देर से की गई। इसके साथ ही घटना का कोई उद्देश्य नहीं था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में ट्रायल कोर्ट की इस दलील को ही खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट में बहस के दौरान विधायक अशोक सिंह चंदेल की तरफ से कोई बहस नहीं की गई।
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विधायक अशोक चंदेल
- फोटो : अमर उजाला
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि जहां घटना करने वाले बड़ी संख्या में हों, वहां दो या तीन गवाहों की गवाही सजा करने के लिए पर्याप्त है। इस चर्चित हत्याकांड की इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई की शुरुआत 8 नवंबर 2017 से हुई थी। अभियुक्तों की ओर से लगभग एक दर्जन अधिवक्ताओं ने पैरवी की। उधर, प्रदेश सरकार द्वारा ट्रायल कोर्ट के फैसले के विरुद्ध दायर की गई अपील में अधिवक्ता लक्ष्मण सिंह और मुरलीधर मिश्रा ने पैरवी की।
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रघुवीर सिंह
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19 अप्रैल (शुक्रवार) को न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह की दो सदस्यीय बेंच ने इसका फैसला सुनाया। अपने 131 पृष्ठ के आदेश/फैसले में न्यायाधीशों ने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से दायर की गई अपील का आधार यह है कि ट्रायल कोर्ट ने एफआईआर विलंब से किया जाना और घटना का कोई उद्देश्य न होना बताया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की तमाम नजीरों का हवाला देकर प्रदेश सरकार ने अपनी अपील में ट्रायल कोर्ट का आदेश निरस्त करने की मांग की थी।
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आशुतोष सिंह
- फोटो : अमर उजाला
हाईकोर्ट ने फैसले में मेनोका मलिक बनाम पश्चिम बंगाल में दी गई व्यवस्था का हवाला देकर कहा कि जहां पर बड़ी संख्या में घटना करने वाले हों, वहां घटना के दो या तीन गवाहों की गवाही भी सजा करने के लिए पर्याप्त मानी जाएगी। उनकी गवाही को विश्वसनीय माना जाएगा। जब तक गवाही पूर्ण रूप से झूठी साबित न हो। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अभियुक्तों ने नाजायज मजमा (भीड़) कायम करते हुए प्राणघातक हथियारों से लैस पूरी तैयारी के साथ आए थे और एकराय होकर परिवार (वादी) और उसके दोस्तों को जान से मारने की घटना अंजाम दी।
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रुक्कू
- फोटो : अमर उजाला
हाईकोर्ट ने अभियुक्त रघुवीर सिंह, आशुतोष सिंह उर्फ डब्बू सिंह, उत्तम सिंह, प्रदीप सिंह, अशोक सिंह चंदेल, नसीम, श्याम सिंह, साहब सिंह, झंडू और पान सिंह को धारा 148, 302/149, 307/149 में दोषी ठहराया। अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग जेल और जुर्माने की सजाएं दीं। हाईकोर्ट ने अभियुक्त अशोक सिंह चंदेल के विरुद्ध धारा 379 और 404 का अपराध सिद्ध होना नहीं पाया। अदालत में बहस के दौरान अशोक सिंह चंदेल की तरफ से कोई बहस नहीं की गई।
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उत्तम सिंह
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चर्चित सामूहिक हत्याकांड के दोषी भाजपा के सदर विधायक अशोक सिंह चंदेल समेत दस लोगों को इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा शुक्रवार को सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा की ऑर्डर कॉपी शनिवार को भी सीजेएम न्यायालय नहीं आ सकी। हाईकोर्ट के फैसले की कॉपी पाने को लेकर अधिवक्ता समेत अन्य लोग कचहरी में जानकारी करते भी दिखे।
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श्याम सिंह
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हाईकोर्ट के फैसले के बाद पीड़ित पक्ष के घर पर खुशी का माहौल है। शुक्रवार रात राजीव शुक्ला का घर दीपक की रोशनी से जगमगाता रहा। शनिवार को सारा दिन बधाई देने के साथ मिठाई खिलाने का दौर भी चलता रहा। करीब 22 वर्ष पूर्व 26 जनवरी 1997 को मुख्यालय के सुभाष बाजार के पास हुए पांच लोगाें की हत्या के मामले में निचली अदालत ने वर्ष 2002 में सभी दस आरोपियों को बरी कर दिया था।
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नसीम
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जिस पर मुकदमे के वादी राजीव शुक्ला ने हाईकोर्ट इलाहाबाद में अपील दायर की थी। इस अपील की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने दोषी सदर विधायक अशोक सिंह चंदेल, रघुवीर सिंह, उनके पुत्र आशुतोष सिंह उर्फ डब्बू, भान सिंह, उत्तम सिंह, प्रदीप सिंह, श्याम सिंह, साहब सिंह, झंडू सिंह और नसीम को उम्रकैद की सजा सुनाई।
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भान सिंह
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इसके साथ ही मामले के एक आरोपी रुक्कू जिसने फरारी के बाद कोर्ट में समर्पण किया था, उसे सेशन न्यायालय से उम्रकैद की सजा पहले ही सुनाई जा चुकी है। शुक्रवार को सजा सुनाए जाने के बाद जहां पीड़ित पक्ष के घर दिवाली जैसा जश्न था, वहीं रात में घरों में घी के दीपक भी जलाए गए। शनिवार को भी वादी राजीव शुक्ला के आवास पर बधाई देने का वालों का तांता लगा रहा। इस दौरान लोगाें ने मुंह भी मीठा कराया।
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विधायक अशोक चंदेल, रघुवीर सिंह
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सदर विधायक अशोक चंदेल की गिरफ्तारी को लेकर लोग सारा दिन जहां चर्चा करते रहे, वहीं हाईकोर्ट से उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद शनिवार को सदर विधायक रोजाना की तरह विवेक नगर स्थित आवास पर मौजूद रहे। उनसे मिलने के लिए काफी लोग उनके आवास भी पहुंचे। विधायक ने आवास पर जनता दरबार लगाकर लोगों की समस्याएं भी सुनी।
‘अभी हाईकोर्ट के फैसले की कॉपी उनको नहीं मिली है। प्रमाणित आदेश की प्रति उनके पास कोर्ट के माध्यम से आएगी। आदेश की प्रति आने के बाद अगर विधायक और अन्य अभियुक्त कोर्ट में आत्मसमर्पण नहीं करते हैं तो उनकी गिरफ्तारी की जाएगी। हेमराज मीना, पुलिस अधीक्षक