आईआईटी कानपुर के हेल्थ सेंटर में इलाज के दौरान हुई रिसर्च स्कालर आलोक कुमार पांडेय की मौत और बवाल के मामले आईआईटी प्रशासन को क्लीन चिट मिल गई है। मामले की जांच कर रहे फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट डायरेक्टर ऑफिस को सौंप दी। जिसमें बवाल के लिए स्टूडेंटों को जिम्मेदार ठहराया गया है। सूत्रों के मुताबिक इसमें काफी हद तक आरोपी डाक्टर को भी क्लीन चिट मिल गई है। इंस्टीट्यूट के डिप्टी डायरेक्टर प्रो. एके चतुर्वेदी ने रिपोर्ट मिलने की पुष्टि की। हालांकि उन्होंने जांच में सामने आई बातों को बताने से फिलहाल इंकार किया। प्रो.चतुर्वेदी ने बताया की डायरेक्टर शहर से बाहर हैं और उनके वापस आने पर ही रिपोर्ट का अध्ययन किया जाएगा।
विज्ञापन
डाक्टर काे भी मिली राहत
2 of 3
अार्ईअार्ई कानपुर में साथी की माैत के बाद प्रर्दशन करते छात्र (फाइल फाेटाे)
बताया जाता है कि जांच कमेटी ने इंस्टीट्यूट के मटेरियल साइंस डिपार्टमेंट में रिसर्च स्कालर रहे आलोक कुमार पांडेय की मौत हार्ट अटैक से ही पाया है। जांच में उन्होंने हेल्थ सेंटर में आलोक के इलाज में भी लापरवाही नहीं पाई है। हालांकि रेफर करने के दौरान मरीज के साथ किसी डाक्टर के न होने पर जरूर सवाल खड़े किए हैं।
अार्ईअार्ई कानपुर में साथी की माैत के बाद प्रर्दशन करते छात्र (फाइल फाेटाे)
जांच की रिपोर्ट आने के बाद अब आईआईटी प्रशासन मामले में स्टूडेंटों पर कार्रवाई करने का मन बना रही है। प्रशासन ने आलोक की मौत के बाद हुए बवाल में बाहरी हाथ होने का भी अंदेशा जताया है। प्रशासन दोषी स्टूडेंटों को चिन्हित करने के लिए कमेटी तैयार कर सकती है।