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Chitrakoot Accident: नींद और रफ्तार बनी काल...चली गई छह की जान, सड़क पर बिखरा खून और मंजर देख कांप गई रूह

Sat, 07 Dec 2024 10:54 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट

सार

Chitrakoot News: प्रयागराज से अस्थि विसर्जित कर लौट रहे लोगों की बोलेरे झांसी-मिर्जापुर हाईवे पर रैपुरा कस्बे के पास गिट्टी लदे डंपर से टकरा गई। इस हादसे में पिता-पुत्र समेत छह लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा बोलेरो चालक को झपकी आने से हुआ।
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Chitrakoot Road Accident - फोटो : amar ujala

चित्रकूट जिले में हाईवे पर दर्दनाक हादसे की वजह बोलेरो चालक को झपकी आना बताया गया है। चालक की झपकी ने छह लोगों की जान ले ली और पांच लोग जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। रैपुरा के पास हुए इस हादसे का मंजर देख अधिकारियों के अलावा राहगीरों की भी रूह कांप गई। डंपर व बोलेरो की टक्कर के बाद बोलेरो सवार श्रद्धालुओं को किसी तरह बाहर निकाला गया, तो उनकी चीख व आंखों में आंसू देख सभी द्रवित रहे।

सड़क पर पड़े खून पर अधिकारियों ने जाकर मौरंग डलवा दी। घायल रामस्वरूप ने बताया कि वह गाड़ी चलाना जानता है, लेकिन नींद के कारण उसने बोलेरो चलाने से मना कर दिया, लेकिन परिवार के अन्य लोग और रिश्तेदार नहीं माने। यही जिद महंगी पड़ गई। छतरपुर जिले के गुलगंज निवासी कामता की अस्थि विसर्जन करने गए परिवार और रिश्तेदार सड़क हादसे का शिकार हो गए।

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Chitrakoot Road Accident - फोटो : amar ujala
अस्थि विसर्जन करने गए थे प्रयागराज
गुलगंज निवासी जयंती ने बताया कि परिजन और रिश्तेदार अस्थि विसर्जन करने गए थे। हादसे में कामता के भाई अर्जना, दामाद मोहन और साढ़ू मंगना की मौत हो गई। रिश्तेदार नन्हें और उनके पुत्र हरिराम की भी मौत हुई है। घायलों में जमुना और उसके दो पुत्र राज व आकाश समेत अन्य भी रिश्तेदार हैं।
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Chitrakoot Road Accident - फोटो : amar ujala
मजदूरी कर करते थे परिवार का पालन पोषण
सड़क हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करते थे। परिवार के अन्य सदस्य भी मजदूरी करते हैं। घटना की जानकारी होने पर कुछ परिजन पहुंचे। इतना बड़ा हादसा होने के कारण वह कुछ सही सही बता नहीं पा रहे थे।

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Chitrakoot Road Accident - फोटो : amar ujala
मात्र एक भाई बचा था उसकी भी हो गई मौत
चार भाइयों में सिर्फ अर्जना ही बचे थे, जो भाई कामता की अस्थि विसर्जित कर लौटते समय हादसे का शिकार हो गए। इससे उनकी भी मौत हो गई।
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Chitrakoot Road Accident - फोटो : amar ujala
चालक के पिता फूट-फूट कर रोये
सड़क हादसे में मृत बोलेरो चालक निसार के पिता छुन्नू खान, बहन मदीना और परिवार के अन्य लोग अस्पताल आए थे। पिता छुन्नू फूट-फूटकर रोते रहे। बताया कि निसार खुद ही अपनी बोलेरो चलाता था। उसके एक पुत्र दानिश और दो पुत्रियां हैं। पत्नी कलीजा है।
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Chitrakoot Road Accident - फोटो : amar ujala
शव गांव तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस का इंतजाम कराया
दिल दहला देने वाली दुर्घटना की सूचना अन्य परिजनों को जल्द नहीं मिल पाई। दरअसल हादसे के बाद घायल भी बेहोश हो गए थे। पुलिस ने उनके पास मिले मोबाइल से परिजनों को सूचना दी। परिजनों ने निजी वाहनों से चित्रकूट आकर जिला अस्पताल में मृतकों की शिनाख्त की। कुछ घायलों के हाल जानने प्रयागराज गए। जिला प्रशासन ने शव गांव तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस का इंतजाम कराया।
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Chitrakoot Road Accident - फोटो : amar ujala
पुलिस ने बनाई हेल्प डेस्क
हादसे के बाद उच्चाधिकारियों के निर्देश पर पोस्टमार्टम हाउस में मृतकों के परिजनों से जानकारी लेकर पंचनामा कराया गया। इसके लिए हेल्प डेस्क बनाई गई। यहां पांच सिपाहियों को बैठाया गया जो परिजनों को जानकारी देते रहे। इसके बाद पोस्टमार्टम हुआ।

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मुख्यमंत्री ने परिजनों को दो-दो लाख देने की घोषण की
भीषण हादसे की जानकारी मिलने पर सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने शोक जताते हुए मृतक के परिजनों को दो-दो लाख रुपये मदद देने की घोषणा की है।

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रात में आने से रोका पर नहीं माने और चली गई जान
छतरपुर से बड़े भाई की अस्थि कलश का विसर्जन करने अर्जना अहिरवार का परिवार और रिश्तेदार गुरुवार को दोपहर तीन बजे प्रयागराज के संगम पहुंचे थे। अस्थि विसर्जन और कर्मकांड में अंधेरा हो गया। अर्जना और जमुना ने फोन पर परिजनों को इसकी जानकारी दी। परिजनों ने रात रुककर विश्राम कर सुबह आने के लिए कहा, लेकिन वे लोग नहीं माने। तड़के रवाना हो गए और रास्ते में हादसा हो गया।

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पहचान कराने के लिए मशक्कत
बोलेरो में 11 लोग सवार थे। इसमें छह की मौत हो गई और पांच घायल हैं। घायलों के बेहोश होने से मृतकों की पहचान में पुलिस को मशक्कत करनी पड़ी। यहां तक कि एक मृतक का नाम पहले जो बताया गया वह मृतक नहीं घायल निकला जबकि घायलों की सूची में शामिल एक मृतक मिला।
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पीछे बैठे बालकों की बच गई जान
बोलेरो में आगे की सीट पर चालक निसार के अलावा मंगना व अर्जना बैठे थे। बालक आकाश व राज सबसे पीछे वाली सीट पर बैठे थे। डंपर से टक्कर होने पर आगे की सीट के तीनों की मौके पर मौत हो गई। बोलेरो का अगला पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। यहां तक कि पुलिस को तीनों को बाहर निकालने के लिए दरवाजे तोड़ने पड़े पीछे बैठे होने के कारण दोनों बालकों की जान बच गई।
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