कानपुर के चौबेपुर में बुजुर्ग आनंद कुमार की हत्या से पहले आरोपियों के घर पर दारू-मुर्गा पार्टी हुई। इसमें चौबेपुर थाने के दो दरोगा और दो सिपाही भी शामिल हुए। इसके बाद आरोपियों ने रंजिश के चलते सामने वाले परिवार पर हमला कर दिया। आरोप है कि पुलिस भी इस हमले में शामिल रही। पनऊपुरवा की इस वारदात के बाद एक बार फिर बिकरू कांड की तरह पुलिस और अपराधियों का गठजोड़ उजागर हुआ है। पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के दौरान वारदात होना बड़ा सवाल है। आनंद के परिजनों के मुताबिक सोमवार शाम सात बजे से श्री कृष्ण के घर तमाम लोग जुटने लगे थे। इसी दौरान जीप से दरोगा व सिपाही भी पहुंचे। शराब के साथ नॉनवेज पार्टी थी। खाने पीने के बाद श्री कृष्ण व उसके बेटों ने गालीगलौज शुरू कर दी।
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कानपुर: चौबेपुर में पुलिस का खूनी खेल
- फोटो : amar ujala
परिजनों का आरोप है कि साजिश के तहत आनंद को मारा गया। पहले से ही श्री कृष्ण व उसके साथियों ने तैयारी कर रखी थी। इसी वजह से पुलिस को बुलाया गया ताकि दूसरा कोई विरोध न कर सके।
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घटना के बाद लगी भीड़
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पड़ोसी नहीं पहुंचते तो बिछ जाती लाशें
परिजनों ने बताया कि जिस तरह से आरोपियों ने हमला किया था उससे ऐसा लग रहा था कि पूरे परिवार को खत्म करने का मंसूबा है। गनीमत रही कि चीख पुकार सुनकर पड़ोसी एकजुट होकर आ गए। इसके चलते आरोपियों को भागना पड़ा।
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घटना के बाद रोते बिलखते परिजन
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चुनावी रंजिश में वारदात को अंजाम देने का आरोप
मृतक की बहू संदीपा ने मामले में तहरीर दी है। बताया है कि पंचायत चुनाव में उनके परिवार ने ऋषभ शुक्ला का समर्थन किया था। दूसरी तरफ इमलिया गांव के मनीष दीक्षित भी चुनाव लड़ रहे थे। मनीष दीक्षित का समर्थन आरोपी श्रीकृष्ण कर रहे थे।
इस वजह से श्रीकृष्ण व उनका परिवार उनसे रंजिश रखने लगा था। संदीपा ने मनीष के पिता रामकुमार दीक्षित, दोनों दरोगाओं, दो अज्ञात सिपाहियों, शोभित, श्रीकृष्ण, राजन, गोविंद व सुधीर के अलावा चार-पांच अन्य अज्ञात के खिलाफ तहरीर दी है।