उन्नाव दुष्कर्म कांड रायबरेली की घटना के बाद सुर्खियों में आए विधायक कुलदीप सेंगर प्रकरण ने एक बार फिर उनके करीबियों की धड़कने बढ़ा दी हैं। दुष्कर्म पीड़िता के चाचा की ओर से दर्ज मुकदमे में अधिकतर वह नाम शामिल हैं जिनसे 15 माह पहले सीबीआई कई चक्रों में गहन पूछताछ कर चुकी है।
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विधायक कुलदीप सिंह सेंगर
- फोटो : PTI
रायबरेली की घटना में नाम दर्ज होने से लोगों में दहशत है। 4 अप्रैल 2018 को पीड़िता के पिता की पिटाई और ठीक चार दिन बाद उसकी मौत के मामले ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया तो जांच सीबीआई को सौंप दी गई। पीड़िता की मां व चाचा ने उस वक्त तहरीर में जो नाम दिए थे उनमें कई ऐसे हैं जिन्हें पुलिस ने कुलदीप सेंगर का रसूख देखते हुए मुकदमे में शामिल ही नहीं किया था।
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भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर
सीबीआई की जांच में पीड़िता के चाचा ने पूर्व की तहरीर का जिक्र किया था तो सीबीआई ने उनसे भी कई चक्रों में पूछताछ की थी, जिनके नाम पुलिस ने मुकदमे में शामिल नहीं किए थे। 28 जुलाई की घटना में दर्ज किए गए मुकदमे में विधायक के भाई, नवाबगंज ब्लॉक प्रमुख समेत अधिकांश वहीं नाम हैं जिन्हें पुलिस ने पूर्व में अभयदान दिया था। 15 माह बाद फिर से विधायक के करीबियों को सीबीआई का डर सताने लगा है।
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आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर, सहआरोपी शशि सिंह
- फोटो : अमर उजाला
ये है पूरा मामला
4 जून 2017 को माखी गांव से एक 17 साल की किशोरी को गांव के ही शुभम व उसका साथी कानपुर के चौबेपुर निवासी अवधेश तिवारी अगवा कर ले गए थे। करीब आठ महीने बाद किशोरी मिली तो उसने आपबीती बताई। पीड़िता की मां की गुहार पर भी माखी थाने में कार्रवाई नहीं हुई।
तहरीर में पीड़िता की मां ने गांव के ही रहने वाले विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर और पड़ोस की एक महिला शशि सिंह के जरिए बहाने से घर बुलाकर रेप और इसके बाद उसके गुर्गों पर गैंगरेप का आरोप लगाया था। जिसमें माखी थाने की पुलिस ने खेल किया था। जिसके बाद से सीबीआई इस मामले की जांच कर रही थी।