उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के परिवार और वकील को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीआरपीएफ का सुरक्षा घेरा दिया गया है। दुष्कर्म पीड़िता के गांव में सीआरपीएफ के जवान भेजे गए हैं। पीड़िता के वकील अजेंद्र अवस्थी को भी चार सीआरपीएफ जावानों के सुरक्षा घेरे में रखा गया है।
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दुष्कर्म पीड़िता के गांव में दहशत का माहोल कायम है
- फोटो : अमर उजाला
इससे पहले कोर्ट के आदेश में गुरुवार देर शाम को उन्नाव डीएम ने पीड़िता की मां को 25 लाख रुपये का चेक भी लखनऊ डीएम के हाथों भिजवाया था। इस सब के बीच हर किसी की जुबान पर एक ही बात है और वो यह है कि जिस पीड़िता की कभी पुलिस रिपोर्ट तक दर्ज करने के लिए तैयार नहीं थी उसे अब सीआरपीएफ का सुरक्षा घेरा मिला है। दुष्कर्म पीड़िता की सुरक्षा में लापरवाही हुई। एएसपी की जांच में इसका खुलासा हुआ तो उन्होंने सुरक्षा में लगे तीनों पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया।
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दो ट्रकों से सीआरपीएफ जावन दुष्कर्म पीड़िता के गांव पहुंचे
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मामले में पांच दिन से जांच चल रही थी। चार अप्रैल 2018 को दुष्कर्म पीड़िता के पिता की मौत के बाद मामले ने तूल पकड़ा तो उच्च न्यायालय ने पीड़िता और उसके परिवार की सुरक्षा के निर्देश पुलिस को दिए थे। उच्च न्यायालय के निर्देश पर दुष्कर्म पीड़िता की सुरक्षा में कांस्टेबल सुदेश कुमार, कांस्टेबल रूबी पटेल, व अनीता देवी को तैनात किया गया था।
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सुरक्षा में तैनात जवान
- फोटो : अमर उजाला
28 जुलाई को दुष्कर्म पीड़िता, चाची और मौसी के साथ रायबरेली जेल में बंद चाचा से मिलने वकील महेंद्र सिंह के साथ उनकी कार से जा रही थी। गुरुबख्शगंज में रहस्यमय हुए कार हादसे में दुष्कर्म पीड़िता की चाची उसकी मौसी की मौत हो गई थी, जबकि पीड़िता और वकील गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घटना के वक्त पीड़िता की सुरक्षा में लगाए गए पुलिस कर्मी मौजूद नहीं थे।
पीड़िता के वकील को भी मिली है सुरक्षा
- फोटो : अमर उजाला
सुरक्षा में हुई चूक पर सवाल उठे तो आईजी जोन लखनऊ एसके भगत ने एसपी एमपी वर्मा को जांच के निर्देश दिए। एसपी ने एएसपी विनोद कुमार पांडेय से जांच कराई। गुरुवार को एएसपी ने एसपी को जांच रिपोर्ट सौंपी, जिसमें सुरक्षा कर्मियों की लापरवाही की पुष्टि हुई। एसपी ने जांच रिपोर्ट के आधार पर पीड़िता के गनर सुदेश कुमार, कांस्टेबल रूबी पटेल और सुनीता को निलंबित कर दिया। इसके साथ ही सभी पर विभागीय जांच भी बैठाई गई है।