कानपुर देहात के सिकंदरा थाना क्षेत्र के जगन्नाथपुर गांव के पास अंधे मोड़ पर रविवार की देर रात बारिश के दौरान कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे नाले में पलट गई। हादसे में बीएसएफ के दरोगा समेत एक होमगार्ड, दो सगी बहनों समेत छह लोगों की मौत हो गई। कार सवार सभी लोग तिलक समारोह में शामिल होकर भिंड से मुर्रा डेरापुर लौट रहे थे। हादसे के दौरान दो बच्चे कार का शीशा तोड़कर बाहर निकल आए, जिससे उनकी जान बच गई।
डेरापुर थाना क्षेत्र के मुर्रा निवासी पंकज शर्मा की बेटी सुगम शर्मा का तिलक लेकर परिवार के लोग रविवार को मध्यप्रदेश के जिला भिंड के बड़ापुरा (फुफगांव) गए थे। देर रात पंकज का परिवार और रिश्तेदार अलग-अलग गाड़ियों से वापस गांव लौट रहे थे। एक कार में पंकज का छोटा भाई विकास और परिवार के लोग थे। विकास कार से रात दो बजे के करीब जैसे ही सिकंदरा थाना क्षेत्र के जगन्नाथपुर गांव के अंधे मोड़ के पास पहुंचे तभी बारिश की वजह से फिसलन होने से कार अनियंत्रित हो गई और सड़क किनारे करीब आठ फीट गहरे पानी भरे नाले में पलट गई।
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मौके पर जांच करती पुलिस।
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हादसे में विकास की बेटी वैष्णवी उर्फ नैंसी (14), बेटा शिवा उर्फ विराट (12) किसी तरह शीशा तोड़कर बाहर निकल आए लेकिन विकास समेत छह लोग कार में फंसे रहे।
काफी देर बाद हादसे की जानकारी मिलने पर ग्रामीण पहुंचे और जानकारी पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने कार में फंसे घायलों को बाहर निकाला और सिकंदरा स्वास्थ्य केंद्र ले गई, जहां डॉक्टरों ने विकास शर्मा (42) निवासी मुर्रा थाना डेरापुर, खुशबू (17) पुत्री पंकज शर्मा, प्राची (13) पुत्री पंकज निवासी मुर्रा थाना डेरापुर, गोलू (16) पुत्र विजय निवासी बैरी बाघपुर थाना शिवली, प्रतीक (10) पुत्र पवन निवासी शैलहा थाना शिवराजपुर कानपुर नगर व संजय शर्मा (45) उर्फ संजू निवासी एमएल-69 बर्रा-4 कानपुर को मृत घोषित कर दिया।
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घटना की जानकारी पर अस्पताल पहुंचे परिजनों में चीख पुकार मच गई। देर रात सीओ सिकंदरा प्रिया सिंह, एसपी बीबीजीटीएस मूर्ति भी मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी ली। पंकज ने पुलिस को बताया कि संजय शर्मा उसके चाचा थे, जो बीएसएफ में एएसआई थे, जबकि छोटा भाई विकास बिल्हौर में होमगार्ड थे। एसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने बताया कि जांच के दौरान बारिश के कारण अचानक ब्रेक लगने से गाड़ी फिसलकर नाले में पलटने की जानकारी मिली है। घटना के कारणों की जांच की जा रही है।
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तीव्र मोड़ और बारिश की फिसलन बनी हादसे की वजह
थाना क्षेत्र के जगन्नाथपुर गांव के पास जिस जगह पर कार बेकाबू होकर नाले में पलटी, वहां पर तीव्र मोड़ है, ऊपर से बारिश होने के कारण सड़क पर बहकर आई मिट्टी की वजह से फिसलन हो गई थी। हादसे के बाद पुलिस भी इन्हीं बिंदुओं पर जांच कर रही है। पुलिस का भी मानना है कि अचानक से ब्रेक लगाने से गाड़ी का संतुलन बिगड़ने से पलट होगी। पुलिस को भी काफी दूर से टायर मार्क (रगड़ के निशान) मिले हैं। पुलिस ने फोरेंसिक टीम व टेक्निकल टीम बुलाकर जांच कराई।
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घटनास्थल पर मौजूद कुछ लोगों ने पुलिस को बताया कि गांव से पहले तीव्र मोड़ होने के कारण कई बार पहले भी हादसे हो चुके हैं। यहां पर न तो कोई ब्रेकर है और न ही संकेतक लगा है। अनजान राहगीरों को मोड़ का अंदाजा नहीं लग पाता और अक्सर हादसे का शिकार हो जाते हैं। रविवार रात बारिश होने के बाद बढ़ी फिसलन और तीव्र मोड़ भी हादसे का कारण मानी जा रही है। एसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने बताया कि जांच में मौके पर टायर रगड़ने के निशान मिलें हैं। इससे पता चलता है कि चालक ने तीव्र मोड़ होने पर गाड़ी रोकने का प्रयास किया लेकिन गाड़ी फिसलने के बाद नाले में पलट गई। हादसे की जांच की जा रही है।
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उठो गोलू, तुम्हें तो डॉक्टर बनना है...
हादसे में बेटे अंश उर्फ गोलू को खोने के बाद पिता विजय शर्मा, मां विनीता का बुरा हाल था। पिता बेटे के शव को देखकर बार-बार यही कह रहा था, उठो गोलू तुम्हें तो डॉक्टर बनना है। तुमने तो मेरे सपने अधूरे छोड़ दिए। कभी वह पत्नी को संभलता तो कभी बेटे के शव के पास दहाड़े मार-मारकर रोता। परिवार के लोग उसे ढांढस बंधाते रहे। बैरी बाघपुर के रहने वाले विजय शर्मा ने बताया कि वह पंकज शर्मा का साला है। भांजी के तिलक समारोह में शामिल होने परिवार के लोग मुर्रा डेरापुर गए थे। बताया कि बेटा अंश शर्मा उर्फ गोलू नीट की तैयारी कर रहा है। उसने डॉक्टर बनाने का सपना देखा था, जबकि छोटा बेटा तनिष्क एयरफोर्स में है।
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नातिन की शादी के लिए संजय ने बढ़ाई थी छुट्टी
बीएसएफ जवान संजय शर्मा मूलरूप से मुर्रा डेरापुर के रहने वाले थे। उनके भतीजे पंकज की बेटी सुगम का चार फरवरी को तिलक था। हादसे में संजय की मौत के बाद बेटा शिवम जिला अस्पताल में बेसुध रोता बिलखता रहा। शिवम ने बताया कि पिता बीएसएफ के एसटीसी टेकनपुर ग्वालियर में एएसआई के पद पर तैनात थे। छह जनवरी तक छुट्टी लेकर घर आए थे लेकिन चाचा की बेटी का तिलक होने के कारण दो दिन पहले ही छुट्टी बढ़वाई थी। बताया कि परिवार बर्रा-4 कानपुर में रह रहा है। संजय की मौत के बाद पत्नी ममता, छोटा बेटा, सत्यम शर्मा, उनके रिश्तेदार ज्ञान प्रकाश शर्मा जिला अस्पताल में बिलखते रहे। शिवम ने बताया कि अनंतराम टोल पहुंचने पर उसने पापा से फोन पर बात की थी। इस पर पापा ने बताया कि कुछ देर वह गांव पहुंच जाएंगे।
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दामाद और पौत्र की मौत के बाद बदहवाश रही दादी
जिला अस्पताल पहुंची शैलहा शिवराजपुर निवासी मुन्नी देवी बदहवाश दिखी। दामाद विकास व पौत्र प्रतीक की मौत के बाद ''सब कुछ उजड़ गया'' की बात कहकर वह दहाड़े मार मारकर बिलखती रही। उसे बेटा श्रवण उर्फ बउवन ढांढस बंधाता रहा। श्रवण ने बताया कि प्रतीक उनके बड़े भाई पवन का बेटा है, जबकि विकास उनके बहनोई थे। विकास बिल्हौर में होमगार्ड हैं और तहसील में एक अधिकारी की गाड़ी चलाते थे। मुन्नी देवी ने सिसकियां भरते हुए बताया कि प्रतीक अपनी दादी का ख्याल रखता था। रोज सुबह चाय लेकर आता था। वह बार-बार यही कह रही थी, उठो प्रतीक अब दादी का चाय कौन पिहैये। इधर पति विकास की मौत के बाद पत्नी माया का रो-रोकर बुरा हाल रहा।
इकलौते बेटे की मौत से गुमसुम हो गया पवन
बेटे प्रतीक की मौत के बाद पिता पवन, मां कामिनी, बहन दीपाली उर्फ दीपांशी बिलखते रहे। पवन ने बताया कि प्रतीक उनका इकलौता बेटा था। घर में सबसे तेज था। दादी के साथ ही वह अपनी मां व बहन का ख्याल रखता था।