हमीरपुर में करीब 22 साल, दो माह और 23 दिन पूर्व मुख्यालय के व्यस्ततम सुभाष बाजार सब्जी मंडी के पास हुए एक ही परिवार तीन समेत पांच लोगों के सामूहिक नरसंहार मामले में निचली अदालत ने सदर विधायक अशोक सिंह चंदेल समेत दस आरोपियों को बरी कर दिया था। 22 सालों पर जब परिवार को न्याय मिला तों आंखों में आंसू छलक पड़े।
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सजा के बाद पीड़ित पक्ष में खुशी का माहाैल
- फोटो : अमर उजाला
पीड़ित पक्ष के लंबे संघर्ष के बाद उनकी अपील पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में शुक्रवार को सजा सुनाई गई। पिछले 26 जनवरी 1997 को सुभाष बाजार सब्जी मंडी के पास स्थित नसीम बंदूक वाले के मकान में रमजान पर्व के चलते विधायक अशोक सिंह चंदेल मिलने गए थे।
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22 साल पहले इसी गली में हुआ था सामूहिक नरसंहार
- फोटो : अमर उजाला
सड़क पर विधायक व अन्य के वाहन खड़े थे। इसी बीच राकेश शुक्ला अपने भतीजे अंबुज को साथ लेकर उसके जन्मदिन के लिए सामान लेने जा रहे थे। तभी सड़क से वाहन निकालने को लेकर विवाद हुआ था। इसी विवाद में गोलियां चलने लगीं। देखते ही देखते राकेश शुक्ला, अंबुज शुक्ला समेत पांच लोगों की मौत हो गई।
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2017 में स्थानीय न्यायालय से बाहर निकलता दोषी रुक्कू (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
इस घटना से शहर में सन्नाटा पसर गया। शुक्रवार को हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद पीड़ित पक्ष ने खुशी जताते हुए कहा कि फैसला देर से सही, मगर उन्हें अब सही न्याय मिला है। वहीं विधायक खेमे में मायूसी छा गई। 22 साल पहले हमीरपुर में सरेबाजार हुए सामूहिक हत्याकांड में हमीरपुर के मौजूदा भाजपा विधायक अशोक सिंह चंदेल समेत ग्यारह दोषियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा अप्रत्याशित नहीं है।
2017 में स्थानीय न्यायालय परिसर में तैनात पुलिस फोर्स। (फाइल फोटो)
हत्याकांड के दोषी और विधायक चंदेल के कार चालक रुक्कू को हाईकोर्ट पहले ही उम्रकैद की सजा सुना चुका है। कानून के जानकारों का यह अनुमान सही साबित हुआ कि अन्य दोषियों का भी कमोवेश यही हश्र होगा। उधर, बुंदेलखंड में विधायक रहते हुए उम्रकैद की सजा पाने वाले हमीरपुर के अशोक सिंह चंदेल दूसरे विधायक हैं।