जिला पंचायत सदस्य श्वेता सिंह गौर की हत्या में नामजद पति भाजपा नेता डॉ. दीपक सिंह गौर को दूसरे दिन पुलिस ने नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिया। अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इसी केस में नामजद रिटायर्ड डीआईजी ससुर, सास और अधिवक्ता जेठ को पुलिस ने फिलहाल गिरफ्तार नहीं किया है। अदालत में पेशी के बाद जेल जाते समय दीपक सिंह गौर ने मीडिया से कुछ बातचीत की। सवालों के जवाब दिए। उसने कहा कि उस पर हत्या का मुकदमा दबाव में लिखा गया है। मेरे माता-पिता, भाई और सारे लोग निर्दोष हैं। बड़ी बिटिया का दाखिला कराने हम दोनों लखनऊ गए। 15 दिन वहीं अपने भाई के घर रहे। पिता और माता जी गांव में रहते हैं। घटना के समय बिटिया को लेने स्कूल गया था। तभी वहां फोन पर फांसी की सूचना मिली। दीपक ने कहा कि जिस वीडियो में हत्या की बात कही है उस वक्त नशे में था।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
यह 20 अप्रैल का वीडियो है। दीपक ने यह भी कहा कि श्वेता को वह फांसी लगाते देख नहीं सकता था। इसीलिए वहां से चला गया। हालांकि कुछ ही देर बाद अपनी बात से पलटते हुए कहा कि वह बेटी को लेने स्कूल गया था। तभी वहां फोन पर फांसी लगाने की सूचना मिली। न्यायालय निर्णय करेगा। मेरी बच्चियों को बरगला कर कुछ भी कहला दिया गया है। उनको समझ नहीं है।
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श्वेता सिंह गौर की फाइल फोटो
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विवेचना में हो सकती है धाराओं में तब्दीली
जिला अधिवक्ता संघ के सचिव और फौजदारी के वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश कुमार सिंह की राय में श्वेता गौर मामले में दर्ज रिपोर्ट में लगाई गई हत्या की धारा विवेचना और अदालत में टिक नहीं पाएगी। शायद पुलिस ही अपनी विवेचना में इसे धारा 306 आईपीसी (आत्महत्या के लिए प्रेरित करना) में तब्दील कर दे। क्योंकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी हैंगिंग पुलिस बता रही है और भी कई स्थलीय परिस्थितियां साक्ष्य बन सकती हैं।
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श्वेता सिंह गौर की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि यदि धारा 306 लगाई गई तो इसमें सात वर्ष की कैद का प्रावधान है। श्वेता की बेटियों द्वारा पिता व अन्य परिजनों पर लगाए गए आरोपों के बारे में अधिवक्ता ने कहा कि इसे दबाव में कहा जाना भी माना जा सकता है। विवेचना के दौरान पुलिस 161 सीआरपीसी के तहत बेटियों के बयान अदालत में कराएगी। वही मान्य होंगे।
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भाजपा नेता श्वेता सिंह की मौत का मामला, बेटी ने हाथ जोड़कर मांगा न्याय
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पुलिस अधिकारी के घर पर मिली ठौर, बसपा नेता बने माध्यम
गिरफ्तार किए जाने के बाद डॉ. दीपक सिंह गौर ने मीडिया से कहा कि मैं निर्दोष हूं। मेरी जीवन संगिनी चली गई। मैं बहुत दुखी हूं। घटना वाले दिन पत्नी से कोई विवाद नहीं हुआ। यह पूछे जाने पर कि घटना के बाद दो दिन कहां रहे? इस पर कहा कि वह बाहर था, लेकिन स्थान का जिक्र नहीं किया।
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भाजपा नेता श्वेता सिंह की मौत के मामले में वायरल हो रहा वीडियो
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हालांकि चर्चा है कि वह तिंदवारी क्षेत्र के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के यहां रहा। एक बसपा नेता उसके माध्यम रहे। उन्हीं के बताने पर दीपक ने खुद को पुलिस के हवाले किया। चर्चा इस बात की है भाजपा नेता दीपक सिंह गौर जितने दिन गायब रहते, यह मामला सुर्खियों में रहता। उनकी गिरफ्तारी के बाद से प्रकरण के ठंडा पड़ने की बात कही जा रही है।
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पति और दो बेटियों के साथ श्वेता सिंह गौर
- फोटो : अमर उजाला
भाजपा जिला पंचायत सदस्य का शव फंदे से लटका मिला
आपको बता दें कि बांदा जिला पंचायत सदस्य व भाजपा महिला मोर्चा की जिला महामंत्री श्वेता सिंह गौर का शव बुधवार को बंद कमरे में फंदे से लटका मिला था। श्वेता के पिता धर्मवीर सिंह ने भाजपा नेता व अधिवक्ता पति डॉ. दीपक सिंह गौर पर हत्या का आरोप लगाया है। डॉ. दीपक भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष रह चुके हैं। पत्नी श्वेता (35) जसपुरा क्षेत्र में वार्ड-12 (जसपुरा प्रथम) से जिला पंचायत सदस्य थीं।
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भाजपा नेता श्वेता सिंह की मौत का मामला
- फोटो : अमर उजाला
दीपक का पैतृक गांव मरझा (जसपुरा) है। दीपक और श्वेता अपनी तीनों बेटियों मित्तो (14), गौरी (10) व अविष्का (8) के साथ शहर के इंदिरा नगर स्थित आवास में रहते थे। सुबह 10 बजे नौकर छेदीलाल ने श्वेता के कमरे के बाहर से आवाज दी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। संदेह पर नौकर ने श्वेता के रिश्तेदार व कुछ पड़ोसियों को बुलाया। कमरे का दरवाजा तोड़ा गया तो सामने पंखे के सहारे दुपट्टे से श्वेता का शव लटका मिला।
पति और बच्चों के साथ श्वेता सिंह गौर
- फोटो : अमर उजाला
कमरे के बाहर आंगन में श्वेता के दो मोबाइल फोन भी टूटे हुए मिले। पुलिस अधिकारी, फोरेंसिक टीम व डॉग स्क्वॉड मौके पर पहुंचे। छेदीलाल ने पुलिस को बताया कि मित्तो लखनऊ में हॉस्टल में रहती है। गौरी सुबह अपने स्कूल चली गई थी। अविष्का कर्वी में अपनी ननिहाल में थी।