बिकरू कांड में एसआईटी की जांच रिपोर्ट में तत्कालीन एसपी ग्रामीण प्रद्युम्न सिंह के पर्यवेक्षण पर सवाल उठाकर एसओ विनय तिवारी को शह देने का आरोप लगा है। वहीं सीओ आरके चतुर्वेदी को जय बाजपेई की जांचों का दबाना महंगा पड़ा है। उनको इसीलिए दोषी बनाया गया है।
कानपुर पुलिस को एसआईटी रिपोर्ट सौंप दी गई है। दोषी पाए गए पुलिसकर्मियों पर अब कार्रवाई जल्द होगी। एसआईटी ने 40 पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया है। इसमें से 37 पुलिसकर्मियों में सिपाही, दरोगा और इंस्पेक्टर हैं। तीन पीपीएस प्रद्युम्न सिंह (वर्तमान में नोएडा तैनाती), सीओ आरके चतुर्वेदी (वर्तमान में अयोध्या में तैनाती) व सीओ एलआईयू सूक्ष्म प्रकाश हैं।
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विकास दुबे कांड
- फोटो : अमर उजाला
सूत्रों के मुताबिक एसआईटी की रिपोर्ट में लिखा गया है कि चौबेपुर थाना ग्रामीण क्षेत्र में है। थाने का पर्यवेक्षण करना एसपी ग्रामीण की जिम्मेदारी थी। इसमें जितना जिम्मेदार चौबेपुर पुलिस है उतना ही एसपी ग्रामीण व एसएसपी।
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विकास दुबे कांड
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इसीलिए एसएसपी अनंत देव को निलंबित किया गया। इसके अलावा तत्कालीन एएसपी कन्नौज केसी गोस्वामी की रिपोर्ट में जिन पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई सिफारिश की गई थी। इसकी जांच सीओ आरके चतुर्वेदी को दी गई थी। ये जांच जय के खिलाफ थी। उन्होंने ये जांच दबा दी थी।
दो दरोगाओं ने दी थी विकास को दबिश की जानकारी
बिकरू कांड में पूर्व चौबेपुर एसओ विनय तिवारी और दरोगा केके शर्मा जेल में बंद हैं। एसआईटी की जांच में सामने आया है कि वारदात की रात केके शर्मा और एक अन्य दरोगा कुंवर पाल सिंह ने विकास को दबिश की जानकारी दी थी। आखिर में विकास ने सिपाही राजीव को फोन किया था।