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बिकरू कांड में सामने आया चौंकाने वाला सच, विकास दुबे को लेकर मिला हैरान करने वाला बड़ा सबूत

Sat, 18 Jul 2020 08:59 AM IST
शाहरुख खान सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
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kanpur encounter - फोटो : amar ujala
दहशतगर्द विकास दुबे और पुलिस-प्रशासन के बीच की साठगांठ का बड़ा सबूत सामने आया है। विकास दुबे ने असलहा बाबू से मिलकर अपने 15 से 18 गुर्गों के फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनवाए थे। ये लाइसेंस पिछले साल जनवरी से मार्च के बीच जारी किए गए। तब 77 फर्जी शस्त्र लाइसेंस के मामले में असलहा बाबू समेत सात आरोपी जेल भी गए थे। हालांकि विकास के गुर्गों के लाइसेंस मामलों का खुलासा नहीं हुआ था। अब एसटीएफ की तफ्तीश में इसका खुलासा हुआ है।

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vikas dubey news - फोटो : amar ujala
बिकरू कांड के बाद छानबीन में पता चला था कि बदमाशों ने लाइसेंसी असलहों से भी पुलिस पर गोलियां बरसाईं थीं। इसलिए एसटीएफ ने विकास के गुर्गों के शस्त्र लाइसेंसों की तफ्तीश की। एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक जांच में पता चला कि फर्जी दस्तावेज लगाकर 15 से 18 लाइसेंस बनवाए गए थे। यह पूरा खेल विकास ने असलहा बाबू विनीत तिवारी के साथ मिलकर किया। असलहा बाबू विकास के इशारों पर काम करता था। विकास ने एक वकील के मुंशी जय किशन उर्फ जैकी के जरिये लाइसेंस के दस्तावेज भिजवाए थे। बाबू ने पूरा खेल कर लाइसेंस जारी करवाए।
 
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vikas dubey news - फोटो : amar ujala
77 फर्जी लाइसेंस में शामिल हैं ये लाइसेंस
पिछले साल कुल 190 शस्त्र लाइसेंस बने थे। इसमें 77 शस्त्र लाइसेंस फर्जी पाए गए थे। प्रशासन ने कोतवाली थाने में असलहा बाबू विनीत तिवारी, कारीगर जितेंद्र व अन्य अज्ञात पर केस दर्ज कराया था। तत्कालीन एसपी क्राइम राजेश यादव के नेतृत्व में तत्कालीन एसएसपी अनंत देव एसआईटी गठित कर जांच कराई थी। 

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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
सीओ राजेश पांडेय पर्यवेक्षक थे। एसआईटी इन नामजद आरोपियों के अलावा कारीगर मुकुल, विशाल, अधिवक्ता संजीव व उनके बेटे शुभम के अलावा वकील के मुंशी जय किशन को जेल भेजा था। एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक इन 77 लाइसेंसों में विकास के गुर्गों के भी लाइसेंस शामिल हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
नहीं जमा किए थे शस्त्र
फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद पुलिस ने इन लाइसेंसों के साथ खरीदे गए असलहों को भी जमा कराने की प्रक्रिया की थी। एसटीएफ सूत्रों का कहना है कि विकास के गुर्गों ने शस्त्र जमा नहीं किये थे। इसमें भी पुलिस की बड़ी लापरवाही रही है।
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vikas dubey - फोटो : amar ujala
कई एसटीएफ की रडार पर
फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले के सभी आरोपी जेल से छूट चुके हैं। अब एक बार फिर वे जांच के दायरे में आ गए हैं। एसटीएफ ने पुलिस-प्रशासन से इस पूरे प्रकरण का विवरण मांगा है। आरोपियों से जल्द पूछताछ होगी। जय किशन पर शिकंजा सबसे पहले कसेगा। वहीं सवाल है कि एसआईटी उस वक्त इस फर्जीवाड़े को क्यों नहीं पकड़ सकी। जिसके-जिसके लाइसेंस बने हैं, एसटीएफ के पास उनके बारे में पूरी जानकारी है लेकिन अभी इसको सार्वजनिक नहीं किया है।
 
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