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क्रीमों के अंधाधुंध इस्तेमाल से लड़कियों में भी दाढ़ी-मूंछ, बचकर रहें

Sun, 18 Mar 2018 01:47 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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डेमाे पिक
कोई क्रीम चंद दिनों में काले व्यक्ति को गोरा नहीं कर सकती है। प्रचारित की जा रहीं कुछ क्रीमों में मिले स्टेरॉयड से कई लड़कियों में भी दाढ़ी-मूंछ नजर आने लगी हैं। पढ़ें पूरी रिपोर्ट
 
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डॉ. सुधा यादव - फोटो : अमर उजाला
क्रीमों के अंधाधुंध इस्तेमाल से बचना चाहिए। साथ ही कीटाणु मारने वाले साबुन और शैंपू के अंधाधुंध इस्तेमाल से त्वचा के मित्र बैक्टीरिया भी नष्ट हो रहे हैं। इस वजह से त्वचा में जल्द संक्रमण, बीमारियां होने लगती हैं। ये जानकारी चंडीगढ़ मेडिकल कालेज के चर्म रोग विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. भूषण कुमार और अलीगढ़ के डॉ. राजीव शर्मा ने दी।

 
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डेमाे पिक
मेडिकल कालेज के चर्म रोग विभाग की तरफ आडीटोरियम में शनिवार को आयोजित ‘डर्मा मीट-2018 अ सिस्टमिक अप्रोच’ की शुरुआत महापौर प्रमिला पांडेय ने की। इसमें डॉ. भूषण कुमार ने बताया कि कुछ ही लोगों को कीटाणु मारने वाले साबुन, शैंपू, डैंड्रफ खत्म करने वाले शैंपू की जरूरत पड़ती है।

 

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डॉ. राजीव शर्मा - फोटो : अमर उजाला
डॉ. राजीव शर्मा ने दावा किया कि सामान्य दाद एक हफ्ते में ठीक हो जाती है, पर मेडिकल स्टोर से कोई भी क्रीम खरीदकर लगाने से कई बार ठीक होने में कई हफ्ते लग जाते हैं। डॉक्टर की सलाह पर ही इलाज कराना चाहिए।

 
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डेमाे पिक
डॉ. राजीव शर्मा के अनुसार त्वचा शरीर के अंदर के स्वास्थ्य का आइना है। यदि लिवर की बीमारी है तो त्वचा पर खुजली, दाने पड़ सकते हैं। हृदय रोग के साथ कोलेस्ट्रल बढ़ने पर त्वचा में पीली गांठ हो सकती हैं। गुर्दे की बीमारी में पंजों में सूजन आने लगती है। सूर्य की रोशनी हड्डियों के लिए ही फायदेमंद नहीं है, बल्कि त्वचा और हृदय के लिए फायदेमंद है।

 
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डॉ. भूषण कुमार - फोटो : अमर उजाला
बच्चों, गर्भवती महिलाओं को भी सुबह या शाम एक घंटे की धूल लेनी चाहिए। यदि ऐसा संभव न हो पाए तो विटामिन-डी का पाउडर, गोलियां खाई जा सकती हैं। त्वचा रोग और इनके प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ती जा रही है, पर ऐसे रोगों के इलाज के लिए देशभर में मात्र 10 हजार विशेषज्ञ हैं।

 
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