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औरैया हादसा: बच गए तो ऊपर वाले को कहा शुक्रिया, इन्हें छूकर निकली मौत, बयां किया आंखों देखा भयावह मंजर

Sat, 16 May 2020 05:03 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया
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यूपी के औरैया में बड़ा हादसा - फोटो : अमर उजाला
औरैया जिले के चिरूहुली गांव के पास हुए हादसे में मामूली घायल हुए प्रवासी मजदूरों ने बताया कि उनके दिल में घर पहुंचने की खुशी को पल भर में सामने से गुजरी मौत ने खत्म कर दिया।
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यूपी के औरैया में बड़ा हादसा - फोटो : अमर उजाला
हालांकि मामूली चोटहिल हुए प्रवासियों ने ऊपर वाले का शुक्रिया अदा किया। बोले कि इस हादसे में घायल होने के बाद अब देखो कब तक ठीक होकर हम अपने परिजनों से मिल पाएंगे।
 
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यूपी के औरैया में बड़ा हादसा - फोटो : अमर उजाला
सदर कोतवाली क्षेत्र के गांव चिरूहुली के पास शनिवार को सुबह हुई दुर्घटना में मामूली रूप से घायल होने के बाद 50 शैय्या युक्त जिला अस्पताल में भर्ती प्रवासियों ने मौत को नजदीक से देखा। बोले, मुझे तो सिर्फ इतना ही पता है कि हम बस बच गए। इसके लिए ऊपर वाले का शुक्रिया, इसके आगे कुछ भी नहीं। 

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शंभू माहतो - फोटो : अमर उजाला
राजस्थान में मार्बल कंपनी में काम करने वाले शंभू कहते हैं कि लॉकडाउन के बाद काम बंद हो जाने से पास में जो रुपया था वह भी खर्च हो गया। साथ ही घर से भी बार-बार सूचना आने लगी कि घर वापस आ जाओ। जब जाने के लिए ट्राला में जगह मिली तो सोचा कि चलो अब तो घर पहुंच ही जाएंगे। अचानक से हुए हादसे ने अंदर तक हिलाकर रख दिया।
 
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गोपाल - फोटो : अमर उजाला
लॉकडाउन के दौरान राजस्थान से अपने घर पुरुलिया पश्चिम बंगाल जाते समय हादसे में मामूली घायल हुए गोपाल बताते हैं कि भोर का समय था और वह नींद में थे। तभी एक जोरदार टक्कर के बाद से अफरातफरी मच गई। जब तक वह कुछ समझ पाते वह चूने की कई बोरियां के नीचे दब चुके थे। ऊपर वाले का शुक्र गुजार हूं कि तभी कुछ देर बाद पहुंचे पुलिस कर्मियों व गांव के लोगों ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। मौत को सामने से देखकर अंदर तक सिहर गया। 
 
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उमेश कुमार - फोटो : अमर उजाला
झाड़खंड निवासी उमेश ने बताया कि लॉकडाउन में फंसने से परेशानियां झेल रहे थे। तभी अन्य साथियों ने अपने घर वापस लौटने की योजना बनाई। इस पर लगभग 30 लोग एक साथ पैदल निकले। थोड़ी दूर चलने के बाद एक ट्रॉला मिला। उसी से सभी गंतव्य को निकल लिए। घर पहुंचने की बहुत खुशी थी लेकिन पता नहीं था कि घर पहुंचने के रास्ते में इस तरह से मौत का भी सामना करना पड़ेगा। फिलहाल थोड़ी चोट है। इलाज चल रहा है। घर वालों की भी याद आ रही है। घर में संपर्क का कोई साधन न होने से परिजनों से बात भी नहीं कर पा रहा हूं। निश्चित रूप से मेरे परिवार वालों की कृपा रही है जो मैं सुरक्षित बच गया।
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