डेमो पिक
युवक ने एचआईवी से ग्रसित होने की शंका को लेकर वर्ष 2010 में जिला अस्पताल में एचआईवी की जांच कराई थी। तब उसने बताया था कि उसकी पत्नी भी एक गंभीर बीमारी से ग्रसित थी, जिससे दो वर्ष पहले ही उसकी मौत हो गई। बहरहाल आईसीटीसी परामर्शदाताओं ने इस पर विशेष ध्यान नहीं दिया, पर जब उसकी जांच रिपोर्ट आई तो उसमें वह पाजिटिव मिला और उसका विधिवत इलाज चला। केंद्र के परामर्शदाता प्रहलाद सिंह गौर ने बताया कि वर्ष 2014 तक वह लगातार इलाज के लिए आता रहा, पर उसके बाद आना बंद कर दिया।