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पति का प्यार बना दूसरी पत्नी के लिए मौत का द्वार, रिपोर्ट देखकर फूट- फूटकर रोने लगा

Sat, 17 Feb 2018 08:05 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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डेमो पिक
जहां वेलेंटाइन डे पर जीवनसाथी एक दूसरे को कीमती उपहार दे रहे थे, वहीं यूपी के हरदोई जिले का एक युवक बुधवार को पत्नी को लिफाफे में बंद एचआईवी पाजिटिव रूपी मौत का पैगाम सौंप रहा था।
 
 
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युवक ने एचआईवी से ग्रसित होने की शंका को लेकर वर्ष 2010 में जिला अस्पताल में एचआईवी की जांच कराई थी। तब उसने बताया था कि उसकी पत्नी भी एक गंभीर बीमारी से ग्रसित थी, जिससे दो वर्ष पहले ही उसकी मौत हो गई। बहरहाल आईसीटीसी परामर्शदाताओं ने इस पर विशेष ध्यान नहीं दिया, पर जब उसकी जांच रिपोर्ट आई तो उसमें वह पाजिटिव मिला और उसका विधिवत इलाज चला। केंद्र के परामर्शदाता प्रहलाद सिंह गौर ने बताया कि वर्ष 2014 तक वह लगातार इलाज के लिए आता रहा, पर उसके बाद आना बंद कर दिया।
 
 
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परामर्शदाता ने बताया कि इसी वर्ष जनवरी में एक बार फिर वह दूसरी पत्नी को साथ लेकर आया और दोनों ने जांच कराई तो पति को तो पहले से ही संक्रमण था तो आई रिपोर्ट में अबकी उसकी दूसरी पत्नी भी एचआईवी पाजिटिव निकली।
 

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हैरानी की बात यह कि वह रिपोर्ट लेने वेलेनटाइन डे के दिन सेंटर आया और रिपोर्ट जानकर वह वहीं रोने लगा, जिस पर परामर्शदाताओं ने उसे समझाया कि बीच में इलाज छोड़कर उसने न सिर्फ अपनी दूसरी पत्नी की जान आफत में डाली, बल्कि इलाज छोड़ने के कारण उसमें संक्रमण भी और गहरा गया है। परामर्शदाता ने बताया कि कुल मिलाकर दोनों की ही अब जिंदगी और मौत के  बीच जंग जारी है। 
 
 
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जिला अस्पताल के आईसीटीसी केंद्र में आई रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी माह में ही तीन रोगी पॉजिटिव मिलने से स्वास्थ्य महकमा सकते में आ गया। बीते वर्ष कुल 20 पाजिटिव पाए गए थे, वहीं इस वर्ष पहले माह तीन पाजिटिव पुरुष और फरवरी माह में एक महिला पाजिटिव मिलने से साल की शुरुआत स्वास्थ्य महकमे के लिए ठीक नहीं है। बहरहाल शासन को इसकी रिपोर्ट भेज दी गई है। 
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जनवरी, फरवरी में एक, अप्रैल में एक, जून में दो, जुलाई में चार, अगस्त में छह, सितंबर में दो, अक्तूबर, नवंबर और दिसंबर में एचआईवी पॉजिटिव का एक-एक मामला सामने आया है।
 
 
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चआईवी पाजिटिव एड्स की प्राथमिक अवस्था है। जिला अस्पताल स्थित आईसीटीसी के परामर्शदाता प्रहलाद सिंह बताते हैं कि एचआईवी पाजिटिव एड्स नहीं है, पर इससे एड्स होता है। एचआईवी पाजिटिव व्यक्ति के रक्त को मेडिकल कालेज सेंटर पर जांच को भेजा जाता है। रक्त में सीडी लिम्फोसाइट्स की संख्या अगर सामान्य होती है तो दवा चलती है। कहा कि इलाज जरूर कराना चाहिए। 
 
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