कानपुर रैली में अमित शाह यूपी सीएम योगी आदित्य नाथ के साथ बहुत जोश के साथ पहुंचे थे लेकिन मंच पर पहुंचते ही उनके माथे पर चिंता की लकीरें नजर आने लगीं। शाह के माथे पर ये रेखाएं देखकर भाजपा के बड़े नेता सकते में आ गए। कईयों की तो दिल की धड़कने भी तेज हो गईं।
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खाली कुर्सियों ने भाजपा के हर बड़े नेता की धड़कनें बढ़ा दी थीं
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भाजपा की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का सम्मेलन हो और भीड़ का निर्धारित लक्ष्य सिर्फ आधा पहुंचे, यह बात हजम नहीं होती। बुधवार को निराला नगर मैदान में भाजपा के कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के बूथ कार्यकर्ताओं के सम्मेलन में ऐसा ही नजारा था। खाली कुर्सियों ने भाजपा के हर बड़े नेता की धड़कनें बढ़ा दी थीं।
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तनाव में दीप प्रज्जवलित करके सम्मेलन के शुभारंभ की औपचारिकता तक नहीं की गई
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शायद इसी तनाव में दीप प्रज्जवलित करके सम्मेलन के शुभारंभ की औपचारिकता तक नहीं की गई। कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन में 17 जिलों के 10 लोकसभा क्षेत्र से 23,900 बूथ कार्यकर्ताओं को आना था। सम्मेलन की शुरुआत सुबह 11 बजे होेनी थी। इस समय तक सम्मेलन स्थल पर 500 कार्यकर्ता भी नहीं पहुंचे थे। 12 बजे तक यह आंकड़ा दो हजार के आसपास तक पहुंचा।
घबराए भाजपाइयों ने ‘भीड़ मैनेजमेंट’ शुरू किया
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20,000 से ज्यादा खाली कुर्सियां देखकर भाजपा नेताओं की धड़कनें बढ़ने लगी थीं। कार्यकर्ताओं के आने की रफ्तार भी इतनी तेज नहीं थी कि मैदान को आधे घंटे में भरा जा सके। मीडिया से लेकर पार्टी के नेताओं में इस बात की चकचक होने लगी थी। माना जाने लगा था कि सम्मेलन की शुरुआत में देरी होगी। शो फ्लॉप जाने की आशंका से घबराए भाजपाइयों ने ‘भीड़ मैनेजमेंट’ शुरू किया।
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एक बजे तक मैदान में एक चौथाई कुर्सियां खाली थीं
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भाजपा नेताओं ने मंच से यह संबोधित कर माहौल सुधारने का प्रयास किया कि यह निर्धारित लोगों का कार्यक्रम है। एक बजे तक मैदान में एक चौथाई कुर्सियां खाली थीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चकेरी एयरपोर्ट पहुंच चुके थे। उन्होंने वहीं पर राष्ट्रीय अध्यक्ष के आने का इंतजार किया। बताया जाता है कि मैदान भरने का इंतजार था। आखिरकार दो बजे तक मैदान में 10,000 के आसपास लोगों की भीड़ पहुंची।
कुछ कुर्सियां भी हटाई गईं। ठीक दो बजे अमित शाह और मुख्यमंत्री मंच पर पहुंचे। उन्होंने हाथ हिलाकर गर्मजोशी से कार्यकर्ताओं का अभिनंदन स्वीकार किया, लेकिन पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीन दयाल उपाध्याय के चित्र पर मार्ल्यापण करने और दीप प्रज्वलन की औपचारिकता नहीं हुई। दिया बाती और माला जस के तस रखे रहे। भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेंद्र मैथानी ने 25,000 से ज्यादा लोगों की भीड़ बताई।