कानपुर के बिकरू कांड के आरोपी अमर दुबे की पत्नी खुशी दुबे की शनिवार को तबीयत खराब हो गई जिसके बाद उसे जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया। उसे खून की उल्टियां हो रही थीं। इलाज के बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। बता दें कि अमर दुबे को एसटीएफ की टीम ने आठ जुलाई को पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया था। इसी मामले में खुशी को भी जेल भेजा गया था। बाद में उसके नाबालिग निकलने पर उसे बाराबंकी स्थित बालिका संप्रेक्षण ग्रह भेज दिया गया।
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अमर की पत्नी खुशी की भी वारदात में रही भूमिका
- फोटो : अमर उजाला
वह बिकरू कांड में विकास दुबे के साथ ही पुलिस टीम पर हमले का आरोपी था। खुशी को बाराबंकी के जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती करवाया गया था जहां उसका इलाज चल रहा था। खून की उल्टियां होने से उसे काफी कमजोरी और बुखार भी था। इलाज के बाद उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।
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खुशी और मनु
- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि खुशी को 14 सितंबर को संप्रेक्षण गृह बाराबंकी लगाया गया था तब से वह यहीं रह रही थी। खुशी की अमर दुबे से 29 जून को शादी हुई थी। इसके बाद दो जुलाई को बिकरू में पुलिस टीम पर हमला करने में आरोपी पाए गए अमर दुबे को पुलिस मुठभेड़ में आठ जुलाई को मार दिया गया था। इसके बाद 10 जुलाई को पुलिस ने विकास दुबे को मार गिराया।
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मनु, विकास दुबे, खुशी दुबे
- फोटो : amar ujala
बिकरू कांड में आरोपी खुशी तिवारी की पैनल से परीक्षण कराने की मांग की सुनवाई गुरुवार को नहीं हो सकी। अब अगली तारीख तीन नवंबर तय की गई है। खुशी को भी पेशी पर नहीं बुलाया गया था बिकरू कांड में आरोपी बनाई गई अमर दुबे की कथित पत्नी नाबालिग खुशी तिवारी के मामले में उसके अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने पैनल से परीक्षण कराने की मांग की थी।
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आमर दुबे और खुशी
- फोटो : अमर उजाला
गुरुवार को सुनवाई होनी थी। उसके अधिवक्ता किशोर न्याय बोर्ड पहुंचे थे, लेकिन मामले की सुनवाई टल गई। अगली तिथि तीन नवंबर निर्धारित की गई है। बता दें कि दो जुलाई को कुख्यात विकास दुबे को गिरफ्तार करने गई पुलिस पर गोली चलाई गई थी। सीओ समेत आठ पुलिस कर्मी शहीद हो गए थे।
अमर दुबे की पत्नी खुशी को किशोर न्याय बोर्ड ने नाबालिग घोषित किया था
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पुलिस ने खुशी पर हत्या, हत्या के प्रयास, विस्फोटक अधिनियम जैसी 17 गंभीर धाराओं में आरोपी बनाया है। खुशी के पिता के अनुरोध पर उसका परीक्षण कराया गया था। घटना के दिन उसकी उम्र 16 साल 10 महीने 12 दिन थी। इसके बाद मामले की सुनवाई किशोर न्याय बोर्ड माती में हो रही है। वह बाराबंकी जिले के बालिका संरक्षण गृह में है।