लोकसभा चुनाव 2019 में कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को उत्तर प्रदेश की कमान सौंपी गई थी। जिसके बाद प्रियंका गांधी ने यूपी में अपना दम तोड़ चुकी कांग्रेस को फिर से जिंदा करने के लिए लखनऊ, कानपुर, बांदा, फतेहपुर, उन्नाव सहित कई दौरे किए। कांग्रेसियों काे प्रियंका गांधी के आने के बाद एक उम्मीद नजर आई थी लेकिन उनके दौरे और रोड शो भी कांग्रेस को यूपी में खत्म होने से नहीं बचा सके।
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प्रियंका गांधी जनसभा को संबोधित करती हुईं (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
इस बार के लोकसभा चुनाव में पारंपरिक समीकरण एक-एक कर ढेर होते दिखाए दिए। भाजपा प्रत्याशी साध्वी निरंजन ज्योति को चुनावी मैदान में शिकस्त देने से लिए कांग्रेस और गठबंधन के खेमे में भी कम कवायद नहीं की गई थी। कांग्रेस ने मतदाताओं के बीच खासी पैठ रखने वाले पूर्व सांसद राकेश सचान पर दांव लगाया था। यहां तक कि पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में माहौल बनाने को कांग्रेस की स्टार प्रचारक प्रियंका गांधी वाड्रा दो बार जिले में आईं।
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प्रियंका गांधी कानपुर में जनसभा को संबोधित करती हुईं (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
उनकी नुक्कड़ सभाओं में खासी भीड़ भी जुटी, लेकिन परिणाम चौंकानेवाले रहे। आखिर में कांग्रेस प्रत्याशी की जमानत तक नहीं बच सकी। फाइनल रिजल्ट में गठबंधन बसपा प्रत्याशी को एक लाख 98 हजार 205 वोट से हराकर साध्वी निरंजन ज्योति मैदान मारने में बेहद सफल रहीं। लोकसभा 2019 के चुनाव में भाजपा हाईकमान ने केंद्रीय राज्यमंत्री व सांसद साध्वी निरंजन ज्योति पर दोबारा अपना भरोसा जताया था।
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जन सभा को संबोधित करतीं प्रियंका गांधी (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
हाल में ही प्रयागराज महाकुंभ में महामंडलेश्वर की उपाधि मिलने के बाद यह सीट भाजपा के लिए और भी महत्वपूर्ण और चुनौती परक हो गई थी। गठबंधन (बसपा, सपा व रालोद) ने मिलकर बसपा के बिंदकी विधानसभा से दो बार विधायक रहे सुखदेव प्रसाद वर्मा पर दांव लगाया। कांग्रेस ने सपा छोड़ कर पार्टी में आए पूर्व सांसद व जनता के बीच खासे घुले मिले राकेश सचान को मैदान में उतारकर पूरी कसरत की।
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पीएम मोदी पर हमलावर हुईं प्रियंका गांधी (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
भाजपा के प्रचार में अमित शाह, राजनाथ सिंह, सीएम योगी आदित्यनाथ, दोनों डिप्टी सीएम ने चुनावी जनसभा की। बसपा ने एक ही स्टार प्रचारक मायावती की जनसभा कराई। कांग्रेस ने दो बार प्रियंका गांधी को जिले में बुलाया। मुस्लिम वोटों को लुभाने के लिए मशहूर शायर इमरान प्रतापगढ़ी, कद्दावर नेता प्रमोद तिवारी, नसीमुद्दीन सिद्दीकी की भी मदद ली गई। फिर भी चुनावी नतीजे में जमानत नहीं बची।
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लोगों से मुखातिब होतीं प्रियंका गांधी (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
इसके अलावा चुनावी मैदान में प्रसपा के महेश चंद्र साहू अपने मुखिया शिवपाल सिंह यादव की जनसभा कराने के बाद भी जमानत नहीं बचा सके। इन्हें तो नोटा से भी कम वोट मिले। चुनाव मैदान में कुल दस प्रत्याशी थे, इनमें किसी की भी जमानत नहीं बच सकी। चुनाव परिणाम में भाजपा प्रत्याशी साध्वी निरंजन ज्योति को 566040 वोट मिले। गठबंधन प्रत्याशी सुखदेव प्रसाद वर्मा रनर रहे इन्हें 367835 वोट मिला।
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महिलाओं से संवाद करतीं प्रियंका गांधी (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
पिछले लोकसभा चुनाव में बसपा व सपा को मिलाकर 478512 वोट मिले थे। गठबंधन इस बार इसे भी सहेज कर नहीं रख सकी। इसके पीछे सपा के बड़े नेताओं की जनसभा न होने को भी एक वजह माना जा रहा है। चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को कुल 66077 वोट मिले हैं। इनकी जमानत नहीं बच सकी। प्रसपा प्रत्याशी को केवल 2718 वोट ही नसीब हो सका। बता दें कि जिले में नोटा को 14692 वोट मिले हैं। यह चुनाव परिणाम में चौथे स्थान पर रहा।
फतेहपुर में सभा के दौरान प्रियंका गांधी (फाइल फोटो)
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राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो भाजपा के लिए जिले में वर्ष 2014 में शुरू हुई मोदी लहर का असर इस चुनाव में भी बरकरार रहा। जिले को मिल रहे नए प्रोजेक्ट मेडिकल कालेज, रेलकोच कारखाना, केंद्रीय विद्यालय आदि भी वोट खींचने का साधन बने। मुस्लिम वोटों का भी झुकाव भाजपा में महसूस किया गया। विधानसभा में तो इसी लहर के सहारे जिले की सभी छह विधानसभाओं में भाजपा व उनके सहयोगी का कब्जा है।