हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद विधायक कुलदीप सेंगर को जल्द उन्नाव कारागार से लखनऊ जेल शिफ्ट करने की संभावना बढ़ गई है। माना जा रहा है कि मुकदमों की सुनवाई भी लखनऊ में कराई जाएगी।
सूत्र बताते हैं कि सीबीआई ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में पेश की रिपोर्ट में विधायक कुलदीप पर दर्ज पाक्सो एक्ट के मुकदमे को लखनऊ ट्रांसफर करने की बात कही थी। आरोपियों को लखनऊ जेल शिफ्ट करने का भरोसा भी दिया था।
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उन्नाव रेप केस
किशोरी की मां विधायक व अन्य अभियुक्तों की उन्नाव जेल में मौजूदगी से परिवार को खतरा का अंदेशा जता चुकी है। इस बीच जांच टीम भी मान रही है कि इनके उन्नाव जेल में रहने से पीड़िता के साथ-साथ गवाहों ने मनोबल पर भी असर पड़ सकता है।
हाईकोर्ट की फटकार के बाद सीबीआई ने उन्नाव प्रकरण में जांच तेज कर दी है। बृहस्पतिवार को माखी के तत्कालीन थाना प्रभारी अशोक भदौरिया व अन्य पुलिस कर्मियों से सीबीआई ने लंबी पूछताछ की। सीबीआई की टीम ने पीड़िता के पिता की पिटाई वाले दिन का घटनाक्रम पूछा।
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उन्नाव रेप केस
सूत्रों का कहना है कि सीबीआई ने एसओ से पूछा कि पीड़िता के पिता की पिटाई के मामले की एफआईआर दर्ज करने के बजाए उसके खिलाफ एफआईआर क्यों दर्ज की गई? तमंचा कहां मिला? दूसरे दिन दर्ज की गई एफआईआर से विधायक कुलदीप सेंगर के भाई का नाम किसके कहने पर निकाला गया? एसओ जब मौके पर गए थे और पीड़िता के पिता की पिटाई हो रही थी तो पिटाई करने वालों को उसी समय गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया? पीड़िता के पिता के शरीर पर गहरे घाव होने के बाद भी उसका ढंग से इलाज क्यों नहीं कराया गया? सीबीआई तत्कालीन पुलिस कर्मियों के साथ साथ पूर्व में हुई एफआईआर के समय माखी थाने के प्रभारी रहे इंस्पेक्टर से भी पूछताछ करेगी।
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उन्नाव रेप केस
उन्नाव प्रकरण पर पीड़िता ने आरोप लगाया था कि उसके पिता को घर से ले जाकर विधायक के भाई अतुल सेंगर व उसके साथियों ने पेड़ में बांध कर मारा। इसी दौरान पीड़िता की मां ने माखी थाने पर जाकर बताया और जिसके बाद मौके पर माखी एसओ अशोक भदौरिया पहुंचे। आरोप है कि उनके सामने भी पीड़िता के पिता की पिटाई की गई। बाद में अशोक भदौरिया खुद अपनी गाड़ी में लादकर थाने ले गए और उसके पास से तमंचा बरामद दिखाकर जेल भेज दिया।
पीड़ित पक्ष की ओर से पहले मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। बाद में दर्ज किया गया तो उसमें मुख्य आरोपी विधायक कुलदीप सेंगर के भाई अतुल सेंगर का नाम निकाल दिया गया था। सीबीआई इन आरोपों की सच्चाई जानने की कोशिश कर रही है।