फर्रुखाबाद में 25 बच्चों को बंधक बनाकर पूरे देश में सुर्खियों में रहे करथिया गांव के बदमाश दंपति सुभाष व रूबी की मौत के बाद उसके लगाए आरोप भी दफन हो गए हैं। पुलिस व प्रशासन के अधिकारी इनाम की घोषणा से गदगद हैं। किसी ने भी इन बिंदुओं पर गौर करना जरूरी नहीं समझा कि आखिर सुभाष ने इतना कठोर कदम क्यों उठाया।
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इसी घर में बच्चों को बनाया गया था बंधक, चप्पे चप्पे पर सुभाष ने लगाए थे बम
- फोटो : अमर उजाला
प्रशासन के अधिकारियों का दावा है कि सुभाष की मां को आवास मिल चुका था। इसलिए उसे मुख्यमंत्री आवास नहीं आवंटित किया गया। लेकिन शौचालय तो दिया जा सकता था। इस पर अफसर मौन हैं। मोहम्मदाबाद कोतवाली के गांव करथिया निवासी सुभाष बाथम ने 30 जनवरी की दोपहर अपनी पुत्री गौरी के जन्म दिन के बहाने बुलाकर करीब 25 बच्चों को घर के तहखाने में बंधक बना लिया था।
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छूटने के बाद बंधक बनाए गए बच्चे, अंजली और अपहरणकर्ता सुभाष
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पुलिस व प्रशासन के अधिकारी पहुंचे तो सुभाष ने गांव के मुखबिरी करने वाले लालू तिवारी व स्वाट टीम के सिपाही सचेंद्र सिंह, अनुज तिवारी पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाकर इनको बुलाने की मांग की थी। इसके बाद समझाने गए गांव के बालू तिवारी को जब सुभाष ने गोली मार दी तो पुलिस व प्रशासन के होश उड़ गए थे। इसके बाद किसी को भी सुभाष के गेट के सामने नहीं ले जाया गया।
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ग्रामीणों की पिटाई से आरोपी सुभाष की पत्नी की मौत
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इसी दिन रात एक बजे मुठभेड़ में सुभाष को ढेर कर दिया गया। गांव वालों की पिटाई से पत्नी रूबी की भी मौत हो गई। पुलिस ने दोनों के शवों का पोस्टमार्टम कराने के बाद अंतिम संस्कार कर दिया। दोनों की मौत के साथ ही उनके लगाए आरोप भी दफन हो गए हैं। शासन ने दस लाख का इनाम देने की घोषणा से पुलिस महकमा खुश है। पुलिस व प्रशासन के किसी भी अधिकारी ने सुभाष के इस क्रूर कदम के पीछे की वजह जानने की कोशिश नहीं की।
ईंटों व हथौड़ों से ग्रामीणों ने तोड़ा गेट, बंधक बच्चों को मुक्त कराने में मारा गया सुभाष
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प्रशासन की ओर से बस इतना बताया गया कि सुभाष को आवास नहीं मिल सकता था। उसकी मां सगुना देवी को आवास दिया जा चुका है। लेकिन शौचालय तो मिल सकता था, वह क्यों नही मिला और इस बिंदु पर अफसरों ने मौन साध रखा है। पुलिस अधीक्षक डा. अनिल मिश्रा ने बताया कि मामले की जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी कि उसके आरोप सही थे या गलत।