फूलन देवी (फाइल फोटो)
उन्होंने बेटी की शादी बेहमई मजरा के खोजा गांव में की है। एक वक्त दबंगों के अत्याचार ने आक्रोश पैदा कर दिया था। इससे तंग फूलन देवी ने बंदूक उठाई। इसका यह मतलब नहीं कि पूरा गांव गुनहगार हो। फूलन की मां मूलादेवी की देखरेख उनका नाती मोहन करता है। वह किसी बाहरी को देखकर भड़क जाती हैं। फूलन के जिक्र पर बुदबुदाती हैं... माई मोड़ी को दबंगन ने दुक्ख (दुख) दई, इते कोई मदद नईं करी... तबइ वह बीहड़न में गई।
हम क्यों जाएं फूलन के गांव। वहां हमारा क्या काम। वहां से कोई इधर आता तो विधवाओं का गुस्सा फट पड़ता है। हमने नरसंहार का वह खौफनाक मंजर देखा है तो चैन नहीं पड़ता। अब तो न्याय की उम्मीद भी कम ही है। - रामलखन, बेहमई
फूलन ने अपने पर हुए अत्याचार का बदला लिया था। इसमें उसके पूरे गांव का क्या कसूर। बेहमई कांड के बाद इस गांव पर पुलिस और दबंग कहर ढा रहे थे। तब भी फूलन ने रक्षा की थी। अब आक्रोश कम हुआ है। - रामसेवक, गुढ़ापुरवा