फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नरसंहार की टीस...नफरतें आज भी बीस, बेहमई जाकर माफी मांगना चाहती थी फूलन, गांव में घुसने न दिया गया

Mon, 15 Feb 2021 09:57 AM IST
शिखा पांडेय शैलेश अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
1 of 5
बेहमई कांड - फोटो : अमर उजाला
चालीस साल पहले बेहमई गांव में फूलन देवी ने नरसंहार कर नफरत की जो आग लगाई थी, वह अभी पूरी तरह बुझी नहीं है। पीपे का पुल और सड़कें बनने के बाद बेहमई से गुढ़ा का पुरवा (फूलन का गांव) की दूरी भले कम हो गई हो, पर दिलों के फासले नहीं पटे हैं। न कोई उस गांव जाता है और न वहां का कोई इधर झांकता है।

फूलन के जिंदा रहते उसके गुढ़ा का पुरवा गांव का कोई बेहमई के करीब से गुजरता था तो उसकी शामत आ जाती थी। गांव जागरूक हुए हैं, लेकिन नफरत अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। फूलन और उसके गांव का जिक्र आते ही बेहमई गांव के 65 साल के सुरेश सिंह का गुस्सा छलक पड़ता है।

गांव के बीचोबीच बने कुएं की तरफ इशारा कर बताते हैं कि इसी जगह फूलन गैंग ने निहत्थे लोगों को इकट्ठा किया और कुछ दूर ले जाकर मार डाला था। उसे सजा देना तो दूर सांसद बना दिया। पीढ़ी गुजर गई और न्याय कानूनी दांवपेच में उलझा है। विधवाओं को देख कलेजा बैठ जाता है।
विज्ञापन

2 of 5
बेहमई कांड (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
पूर्व प्रधान जयवीर सिंह बताते हैं कि फूलन ने बहुत कोशिश की बेहमई आकर माफी मांगने की, लेकिन उसे घुसने नहीं दिया। क्या विधवाओं का सुहाग वह वापस कर सकती थी? वह तो सांसद बनकर दिल्ली तक पहुंच गई, लेकिन बेहमई की बेवाएं तो अभी भी गांव की दहलीज पर सुबक रही हैं। फिल्म में बेहमई में फूलन पर अत्याचार की जो कहानी दिखाई गई, वह झूठ है। जिस सपा ने फूलन को सांसद बनाया, उसका इस गांव में बहिष्कार है। सवा सौ परिवार वाले इस गांव की आबादी लगभग आठ सौ है।

बुजुर्ग लाजवती ने बताया कि उन्होंने फूलन का क्रूर चेहरा देखा है। वह मार दी गई पर यह बात सालती है कि अभी तक उसके गैंग के डकैत जेल से बाहर हैं। रामलखन बताते हैं कि मुलायम सिंह ने कहा था कि फूलन को माफ कर दो, बेहमई को सैफई बना देंगे, लेकिन गांव वालों ने उन्हें और उनके प्रस्ताव को ठुकरा दिया। 

उधर, फूलन के गांव (गुढ़ा का पुरवा) के लोग भी बेहमई से बचते हैं। वे कहते हैं नई पीढ़ी को कोई खास फर्क नहीं पड़ता, लेकिन बुजुर्गों के मन में नाराजगी खत्म नहीं हुई है। वे खुलकर बात करने में संकोच करते हैं। गांव के सिद्धनाथ कहते हैं कि पांच साल पहले बेहमई के बगल के गांव में यहां से बरात गई थी।
विज्ञापन

3 of 5
फूलन देवी (फाइल फोटो)
उन्होंने बेटी की शादी बेहमई मजरा के खोजा गांव में की है। एक वक्त दबंगों के अत्याचार ने आक्रोश पैदा कर दिया था। इससे तंग फूलन देवी ने बंदूक उठाई। इसका यह मतलब नहीं कि पूरा गांव गुनहगार हो। फूलन की मां मूलादेवी की देखरेख उनका नाती मोहन करता है। वह किसी बाहरी को देखकर भड़क जाती हैं। फूलन के जिक्र पर बुदबुदाती हैं... माई मोड़ी को दबंगन ने दुक्ख (दुख) दई, इते कोई मदद नईं करी... तबइ वह बीहड़न में गई।

हम क्यों जाएं फूलन के गांव। वहां हमारा क्या काम। वहां से कोई इधर आता तो विधवाओं का गुस्सा फट पड़ता है। हमने नरसंहार का वह खौफनाक मंजर देखा है तो चैन नहीं पड़ता। अब तो न्याय की उम्मीद भी कम ही है। - रामलखन, बेहमई

फूलन ने अपने पर हुए अत्याचार का बदला लिया था। इसमें उसके पूरे गांव का क्या कसूर। बेहमई कांड के बाद इस गांव पर पुलिस और दबंग कहर ढा रहे थे। तब भी फूलन ने रक्षा की थी। अब आक्रोश कम हुआ है। - रामसेवक, गुढ़ापुरवा

4 of 5
फूलन देवी (फाइल फोटो)
यह है उस नरसंहार और फूलन की कहानी
पुलिस रिकार्ड के अनुसार 14 फरवरी 1981 दोपहर लगभग 2.30 बजे डकैत फूलन देवी ने अपने 35-40 साथियों के साथ बेहमई गांव पर हमला कर दिया 20 लोगों को गोलियों से छलनी कर दिया। अतीत के पन्ने बताते हैं कि जालौन जिले के गुढ़ा का पुरवा गांव निवासी फूलन देवी छह भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर थी।

1972 में नौ साल की उम्र में उसकी शादी महेशपुर गांव के उससे उम्र में तीनगुना बड़े पुत्तीलाल के साथ कर दी गई। फूलन ने एक बार इंटरव्यू में इस संवाददाता को खुद बताया था कि पति उसके साथ जबरदस्ती करता था और खूब काम करवाता था। एक दिन वह अपने मायके आ गई और फिर वापस नहीं गई।

ताऊ ने उसकी 37 बीघा जमीन हड़प ली। विरोध पर उसने दबंगों को फूलन के पीछे लगा दिया। दबंग ने फूलन से छेड़छाड़ तो उसने उसे थप्पड़ जड़ दिया। यह गांव में किसी लड़की का दबंग को पहला जवाब था। इसके बाद दबंगों ने बाबू गुर्जर गिरोह को फूलन की सुपारी दे दी। बाबू गुर्जर फूलन को उठा ले गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
फूलन देवी (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
बीहड़ में उसके साथ जबरदस्ती की जाती थी। इस बीच, गुर्जर गिरोह के विक्रम मल्लाह से फूलन की नजदीकियां हुईं। विक्रम ने फूलन पर अत्याचार करने वाले बाबू गुर्जर को मार दिया और खुद सरगना बन बैठा। गिरोह जातीय आधार पर बंट गया। एक तरफ लालाराम-श्रीराम सिंह तो दूसरी तरफ विक्रम मल्लाह और फूलन। एक दिन धोखे से लालाराम-श्रीराम ने विक्रम को मार दिया और फूलन को बेहमई में बंधक बना लिया।

फूलन के साथ लालाराम गैंग ने तीन हफ्ते तक ज्यादती की, सरेआम इज्जत तार-तार की और मरणासन्न कर गांव के बाहर फेंक दिया। इसके बाद फूलन ने डाकू मुस्तकीम से संपर्क किया और दबंगों से बदला लेने की अपनी मंशा भी जता दी। मुस्तकीम ने गैंग के मान सिंह सहित कई डकैतों को फूलन के साथ कर दिया। मान सिंह से फूलन की नजदीकियां हुईं। दोनों ने बीहड़ के एक मंदिर में बदला लेने की कसम खाई और फिर बेहमई कांड को अंजाम देकर इस कसम को पूरा किया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें