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सीएसए दीक्षांत समारोह: राज्यपाल बोलीं- होम साइंस की छात्राएं किचन में जाते भूल जाती हैं सारी पढ़ाई

Wed, 09 Oct 2019 06:01 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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सीएसए दीक्षांत समारोह - फोटो : अमर उजाला
पांच-छह सदस्यों वाले परिवार में कोई बच्चा होगा, कोई बुजुर्ग कोई युवा तो हो सकता है कोई गर्भवती स्त्री भी हो। जब खाना बनता है तो सभी को एक सा खाना दिया जाता है। न तो बच्चे, बुजुर्ग और न ही गर्भवती स्त्री को क्या पोषक तत्व मिलने चाहिए इसका ध्यान रखा जाता है।
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सीएसए दीक्षांत समारोह - फोटो : अमर उजाला
यहां पढ़ने वाली होम सांइस की छात्राएं सारे पोषक तत्वों के बारे में सीखती हैं। परीक्षा देती है, गोल्ड मेडल भी ले जाती है लेकिन किचन में जाते ही सारी पढ़ाई भूल जाती है। यह बात कानपुर स्थित चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में आयोजित 21वें दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कही। उन्होंने कहा उचित खानपान से ही स्वस्थ रहेंगे और देश आगे बढ़ेगा।
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सीएसए दीक्षांत समारोह - फोटो : अमर उजाला
कुलाधिपति ने कहा कि फल हम तब खाते हैं, जब बीमार होते हैं। बच्चों में बचपन से ही फलों को खाने की आदत डाले। आठ साल की उम्र तक बच्चों का 80 फीसदी विकास हो जाता है। इसलिए पोषक तत्वों पर विशेष ध्यान दें। घर में छोटी सी लाइब्रेरी बनाएं और बच्चों को किताबें पढ़ने की भी आदत डालें। उन्होंने कहा कि देश भर की संस्थाओं ने 4600 टीबी ग्रस्त बच्चों को गोद लिया है, जो स्वागत योग्य है। 2022 तक हम टीबी से मुक्त हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि पानी की कमी नहीं, सही मैनेजमेंट जरूरी है। तालाबों का होना बेहद जरूरी है। 

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सीएसए दीक्षांत समारोह - फोटो : अमर उजाला
मिल्क बैंक बनाने की सलाह
आनंदीबेन पटेल ने गुजरात का उदाहरण देते हुए कहा कि गांव में कई डेयरी हैं, जहां बड़ा सा पात्र रखा रहता है। लोग दूध लेने आते हैं और उस पात्र में अपनी स्वेच्छा से थोड़ा दूध डालते हैं। उस दूध को एकत्र करके पास की आंगनबाड़ी में बच्चों को वितरित कर दिया जाता है। ऐसा ही मिल्क बैंक यहां भी तैयार किया जा सकता है।
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सीएसए दीक्षांत समारोह - फोटो : अमर उजाला
जब रुकवाया अपने भतीजे का विवाह
मेरे भाई ने अपने 12वीं में पढ़ रहे बेटे का विवाह तय कर दिया। मुझे जब पता चला तो मैंने बाल विवाह का विरोध किया। कई बार विरोध किया लेकिन भाई ने मेरी बात को नजरअंदाज कर दिया। तब मैं पुलिस लेकर सीधे घर पहुंच गई और विवाह रुकवाया और सबसे लिखित में लेकर हस्ताक्षर भी लिए। जीवन में कभी कठोर फैसले लेने पड़ते हैं। वह छात्रों से बोलीं, गोल्ड मेडल लेना, लेकिन विवाह में गोल्ड मत मांगना। वरना पढ़ाई लिखाई का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। साथ ही बेटियों की शिक्षा पर जोर दिया। 
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