कन्नौज के सौरिख कस्बे से चार वर्षीय बच्चे को अगवा करने वाली महिला सिपाही मीरा के बारे में बड़ा राज खुला है। पुलिस की पूछताछ में पता चला कि मीरा ने पति को फंसाने के लिए बच्चे का अपहरण किया था। दूसरे दिन वह पति के घर शिवली में बच्चे को छोड़ने जाने वाली थीं। इसके पहले पुलिस के चंगुल में आ गईं।
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परिजनों की गोद में बच्चा
- फोटो : amar ujala
सौरिख कस्बे के नगरिया महादेव निवासी शानू के चार वर्षीय बेटे आयुष का बुधवार को अपहरण हो गया था। छानबीन में सामने आया था कि इटावा के बकेवर थाने में तैनात प्रधान आरक्षी मीरा देवी ने आयुष को अगवा किया था। गुरुवार को पुलिस ने कानपुर के बर्रा इलाके से मीरा देवी को गिरफ्तार कर आयुष को तलाश कर लिया। शुक्रवार को पूछताछ के बाद मीरा देवी को जेल भेज दिया गया।
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थाने में लगी भीड़
- फोटो : amar ujala
पुलिस के मुताबिक पहले मीरा ने बताया कि वह आयुष को इसलिए ले गई थीं कि दूसरे दिन सौरिख पुलिस को देकर वाहवाही लूट सकें। कड़ाई पर बताया कि पति जितेंद्र उर्फ बउआ से विवाद चलता है। इससे फंसाने की योजना बनाई। पति के घर आयुष को छोड़ कर पुलिस को अपहरण की सूचना देनी थी। इससे कि पति को जेल भेज दिया जाए। एएसपी विनोद कुमार ने बताया कि महिला सिपाही ने अज्ञात बाइक सवार से लिफ्ट ली थी। बाइक नंबर सीसीटीवी फुटेज में आने से वह गिरफ्त में आ गईं।
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घटना के बाद मौके पर मौजूद एसपी
- फोटो : amar ujala
इस तरह मीरा देवी तक पहुंची पुलिस
मीरा देवी ने घटना वाले दिन बुधवार को ऊलर गांव में नोटिस तामील कराया था। उनके साथ सौरिख थाने में तैनात सिपाही हरीश गया था। आयुष को उठाकर बाइक पर बैठाते समय मीरा देवी सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गईं। प्रधान आरक्षी होने के कारण वर्दी के कंधे पर तीन सफेद फीती लगी थीं। फुटेज देख हरीश ने मीरा को पहचान लिया। इसके बाद पुलिस ने इटावा पुलिस से संपर्क कर मीरा के बर्रा वाले मकान में दबिश देकर गिरफ्तार कर लिया।
कैदियों और बंदियों से नहीं की बात, सिर्फ एक रोटी खाई
लंबे समय से महकमे में तैनात मीरा घटना की बाबत सोचकर जेल में रो रही हैं। गुरुवार को जेल जाने के बाद शाम को सिर्फ एक रोटी खाई। जेलर शिवकुमार यादव ने बताया कि जेल में बंद महिला कैदी और बंदियों से मीरा देवी ने बात नहीं की। जेल की अन्य महिलाओं की तरह रखा जा रहा है।