झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के नवजात शिशु गहन चिकित्सा कक्ष (एसएनसीयू) में शुक्रवार देर रात भीषण आग लगने से 10 नवजात की मौत हो गई। जिस वार्ड में आग लगी थी, वहां 55 नवजात भर्ती थे। हादसे की सूचना मिलते ही करीब 15 दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंच गई। सेना को भी बुला लिया। रास्ता नहीं मिलने पर नवजातों को खिड़की के कांच तोड़कर बाहर निकाला गया।
झांसी में आग लगने के बाद मेडिकल कॉलेज की एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबोर्न केयर यूनिट) से तेजी से धुएं के गुबार निकले तो बाहर खुले में बैठे माता-पिता दौड़ते हुए अंदर गए और अंदाजे से अपने लाडले को लेकर बाहर आए। जिन माता-पिता को अपना लाडला नहीं मिला, वह बिलखते हुए तेजी से बाहर निकले। लोगों से हाथ जोड़कर लाडले को बाहर निकलवाने में हाथ जोड़कर मदद की गुहार करने लगे। महोबा के एक दंपती को जब अपना नवजात नहीं मिला तो वह वहीं अचेत होकर गिर पड़े। लोगों ने उनके मुंह पर पानी डाला तब करीब पांच मिनट के बाद होश आया।
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- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद दंपती ने बताया कि शादी के कई साल के बाद बड़ी मन्नत से संतान हुई थी। जब उसकी तबीयत बिगड़ी तभी से भगवान से जीवन की दुआ कर रहे थे। कोई एक बार मेरे लाल का चेहरा तो दिखा दो। उन्होंने रोते हुए बताया हमारा बच्चा नहीं मिल रहा है। कोई भी उसका पता लगाने में मदद नहीं कर रहा है। ऐसे में लगता है कि अब जीने का कोई मतलब नहीं है।
वहीं, एक मां बेटा नहीं मिलने की वजह से बिलख बिलखकर रोने लगी। वह रोते हुए बोली, नौ माह पेट में रखा और तुझे पाने के लिए ऑपरेशन का कष्ट भी झेला। तू मुझे ऐसे छोड़कर नहीं जा सकता। बिलखती माताओं को देखकर माहौल दर्दमय रहा।
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एसएनसीयू वार्ड के अंदरूनी हिस्से में ज्यादा गंभीर और बाहर कम गंभीर बच्चों को भर्ती किया जाता है। बाहर की तरफ भर्ती लगभग सभी बच्चों को बचा लिया गया है। अंदर के बच्चों में से भी काफी बच गए हैं। दस बच्चों की मौत की सूचना प्राप्त हुई है। राहत और बचाव कार्य जारी है। -अविनाश कुमार, जिलाधिकारी
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पीड़ित बच्चों को बचाना स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के नवजात शिशु गहन चिकित्सा केंद्र में जन्म से ही गंभीर बीमारी से ग्रस्त बच्चों को भर्ती किया जाता है। यहां भर्ती कई बच्चे वेंटिलेटर पर थे, जबकि ज्यादातर को ग्लूकोस की बोतल लगी हुईं थीं। आग लगने के बाद मची अफरा-तफरी में बच्चों को बचाने के लिए उनकी ऑक्सीजन व ग्लूकोस की बोतलें हटा दी गईं और उन्हें इमरजेंसी लाया गया। ऐसे में तमाम बच्चों की हालत बिगड़ गई। ऐसे बच्चों को बचाना अब स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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वरिष्ठ ही नहीं, सभी जूनियर डॉक्टर भी बुलाए
एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबोर्न केयर यूनिट) में आग लगने की सूचना मिलते ही मेडिकल कॉलेज के न सिर्फ सीनियर डॉक्टर्स बल्कि सभी जूनियर डॉक्टर्स को ड्यूटी पर बुला लिया गया है। बाल रोग विभाग के सभी डॉक्टरों की ड्यूटी मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में लगा दी गई है ताकि किसी भी बच्चे के उपचार में कोई दिक्कत नहीं हो।
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मेडिकल कॉलेज में भीषण आग, 10 शिशुओं की मौत
झांसी के महारानी लक्ष्मी बाई मेडिकल कॉलेज के नवजात शिशु गहन चिकित्सा वार्ड (एसएनसीयू) में भीषण आग लगने से 10 नवजात शिशुओं की झुलसने एवं दम घुटने से मौत हो गई। जिस वार्ड में आग लगी थी, वहां 55 नवजात भर्ती थे। 45 नवजात को सुरक्षित निकाल लिया गया। हादसे की सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंच गई। सेना को भी बुला लिया। सेना एवं दमकल की गाड़ियों ने आग बुझाने में मदद कीं।
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दस नवजात की मौत से अस्पताल परिसर में कोहराम मच गया। माता-पिता भी अपने बच्चों को बचाने की गुहार लगाते रहे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शुक्रवार रात करीब पौने ग्यारह बजे वार्ड से धुआं निकलता दिखा। वहां मौजूद लोगों ने शोर मचाया। जब तक कुछ समझ पाते, आग की लपटें उठने लगीं। कुछ ही देर में आग ने वार्ड को अपनी जद में ले लिया।
वहां भगदड़ मच गई। नवजात को बाहर निकालने की कोशिश हुई, पर धुआं एवं दरवाजे पर आग की लपट होने से नवजात समय पर बाहर नहीं निकाले जा सके। दमकल की गाड़ियों के पहुंचने पर शिशुओं को बाहर निकाला जा सका।
शार्ट सर्किट से ऑक्सीजन कंसनट्रेटर में लगी आग
सीएमएस डॉ. सचिन माहूर के मुताबिक, शार्ट सर्किट से ऑक्सीजन कंसनट्रेटर में आग लग गई। देखते ही देखते आग की चपेट में पूरा वार्ड आया गया, जिससे वार्ड में भगदड़ मच गई। मौजूद स्टाफ व परिजन नवजातों को लेकर बाहर की ओर भागे।
आग की चपेट में आने से दस बच्चों की मौत हो गई है। जबकि, वार्ड में लगभग 54-55 बच्चे भर्ती थे। बाकी बचाए गए बच्चों का इलाज जारी है।- बिमल कुमार दुबे, मंडलायुक्त