18 वर्षीय बेटा राहुल 22 दिन पूर्व अपने किसी परिचित के साथ पहली बार रोजगार के सिलसिले में दिल्ली गया था। उसके परिचित ने दिल्ली के फिल्मीस्तान इलाके में राहुल को काम पर लगा दिया। आज पता चला कि अग्निकांड में राहुल की भी मौत हो चुकी है। जिस बिल्डिंग में आग लगी थी, उसी की तीसरी मंजिल पर राहुल काम करता था और वहीं सोता भी था। नहीं जानती थी, जो पैसे कमाने राजधानी गया था, उसका ऐसे शव आएगा।
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रात में लगी आग में जल जाने से राहुल की मौत हो गई
- फोटो : अमर उजाला
ये दर्द है दिल्ली में हुए अग्निकांड में मारे गए राहुल के संतकबीर नगर रहते परिजनों का। परिजनों का संपर्क जब मोबाइल से बेटे से नहीं हो पाई तो गांव के अन्य लोगों के साथ पीड़ित पिता दिल्ली चले गए, जहां पर मजदूर बेटे की मौत होने की जानकारी हुई। पोस्टमार्टम के बाद परिजन मंगलवार को दिल्ली से बेटे का शव लेकर घर के लिए चल दिए हैं।
बखिरा थाना क्षेत्र के भानपुर माफी गांव निवासी गनपत मौर्या का बड़ा 18 वर्षीय बेटा राहुल 22 दिन पूर्व अपने किसी परिचित के साथ पहली बार रोजगार के सिलसिले में दिल्ली गया था। उसके परिचित ने दिल्ली के फिल्मीस्तान इलाके में राहुल को काम पर लगा दिया।
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विलाप करते राहुल के परिजन।
- फोटो : अमर उजाला
राहुल के चाचा अनिल मौर्या ने बताया कि रविवार को दिल्ली में अग्निकांड की सूचना मिली। उसके बाद से परिजन काफी परेशान थे। इधर भतीजे राहुल की मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। जिस परिचित के साथ राहुल दिल्ली गया था, वह भी घटनास्थल पर गए लेकिन पुलिस ने उन्हें सही सूचना नहीं दिया। इतना ही नहीं घटनास्थल पर जाने भी नहीं दिया गया। उसी के बाद पिता गणपत गांव के कुछ लोगों के साथ राहुल का पता लगाने दिल्ली के लिए रवाना हो गए। सोमवार को लोग दिल्ली पहुंचे तो पता चला कि अग्निकांड में राहुल की भी मौत हो चुकी है।
घर पर मौजूद परिजनों का रो- रो कर बुरा हाल
- फोटो : अमर उजाला
जिस बिल्डिंग में आग लगी थी, उसी की तीसरी मंजिल पर राहुल काम करता था और वहीं सोता भी था। रात में लगी आग में जल जाने से भतीजे राहुल की मौत हो गई। दिल्ली पुलिस ने पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंपा। मंगलवार देर शाम को पिता और साथ में गए अन्य लोग भतीजे का शव लेकर घर के लिए चल दिए है। राहुल तीन भाई और दो बहनों में सबसे बड़ा था। पिता गनपत राजेडीहा बाजार में कपड़े की सिलाई का काम करते हैं। घर पर मौजूद परिजनों का रो- रो कर बुरा हाल था। बुधवार को दोपहर तक शव गांव पहुंचने की उम्मीद लोग जताए हैं।