अरुणऔर खुशी
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इकलौते भाई की चिता के सामने फूटा बहनों का दर्द, बोलीं- अब किसकी कलाई पर बांधेंगीं राखी
अरुण अपनी पांच बहन लक्ष्मी, सुंदरी, शिवानी, रोली और जान्हवी के बीच इकलौता भाई था। पूरे परिवार की उम्मीदें और खुशियां उसी से जुड़ी थीं। शव के पास बिलखती बहनों की जुबान पर बस एक ही मार्मिक सवाल था, अब हम किसकी कलाई पर राखी बांधेंगे। बड़ी बहन लक्ष्मी रो-रोकर कह रही थी, अब हमें मायके की याद आने पर ससुराल से विदा कराने कौन आएगा...? बहनों के ये शब्द सुनकर वहां सांत्वना देने पहुंचे पड़ोसियों और रिश्तेदारों के सब्र का बांध भी टूट गया। शव देखते ही एक बहन बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़ी, जबकि मां सुमन देवी बार-बार बेटे का बेजान चेहरा निहारते हुए विलाप कर रही थीं।