मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस बात से इनकार करते हैं कि उन्नाव, हाथरस और लखीमपुर जैसी घटनाओं की वजह से उनकी सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा है। साम्प्रदायिकता के सवाल पर कहते हैं कि भाजपा इसे नहीं फैलाती, बल्कि वह साम्प्रदायिकता फैलाने वालों के मंसूबों पर पानी जरूर फेरती है। अयोध्या, काशी के बाद मथुरा को लेकर भाजपा की योजना के बारे में भी वे इशारों-इशारों में जवाब देते हैं। अमर उजाला को दिए विशेष इंटरव्यू में योगी ने इन मुद्दों पर अपनी बात रखी है। पढ़ें, 10 अहम सवालों पर योगी आदित्यनाथ के जवाब..
मुख्यमंत्री से पूछा गया था कि आप तमंचाधारी, दंगाई, कैराना में पलायन जैसे मुद्दे खुलकर उठाते हुए क्या पहले से ज्यादा आक्रामक हो गए हैं?
योगी से पूछा गया था कि आवारा गोवंश की वजह से किसान परेशान हैं। अब भी आवारा पशु खेतों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। क्या इस समस्या का कोई ठोस उपाय नहीं है?
मुख्यमंत्री से पूछा गया था कि मथुरा को लेकर नेताओं के लगातार बयान सामने आए हैं। इस पर सरकार या पार्टी का क्या प्लान है?
योगी आदित्यनाथ से सवाल था कि अखिलेश यादव ने राज्य कर्मचारियों की पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाली की बात कही है। क्या यह मुद्दा चुनाव में आपके लिए बड़ी चुनौती होगी?
मुख्यमंत्री से सवाल था कि उन्नाव, हाथरस और लखीमपुर में तीन अलग-अलग घटनाएं हुईं। क्या इससे सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा है?
योगी आदित्यनाथ से पूछा गया था कि इस बार सपा और रालोद का गठबंधन है। किसान आंदोलन का मुद्दा भी हावी रहा है। इसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। पार्टी इससे कैसे निपटेगी?
मुख्यमंत्री से सीधा सवाल था कि विपक्ष के नेता भाजपा पर साम्प्रदायिकता फैलाने का आरोप लगाते हैं। इस पर आपका क्या कहना है?
योगी आदित्यनाथ से पूछा गया था कि राज्य में बेरोजगारी भी बड़ा मुद्दा है। युवाओं के रोजगार पर क्या सरकार काम कर पाई है?
मुख्यमंत्री से सवाल था कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अखिलेश सरकार के मुकाबले आपकी सरकार ने कितना काम किया है?
साक्षात्कार के दौरान योगी आदित्यनाथ ने अपनी सरकार के काम-काज के बारे में तमाम जानकारी दी। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि एक काम वह पूरा नहीं कर पाए।