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अमर प्रेम कहानी का गवाह: धंसता जा रहा नौगढ़ किला, मिटती जा रही राजकुमारी चंद्रकांता की रहस्य गाथा

Mon, 25 Sep 2023 01:08 PM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, चंदौली
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यूपी के चंदौली जिले में है नौगढ़ किला - फोटो : अमर उजाला
अय्यारों की साजिशों, तिलस्मी अजूबों और अनेक ऐतिहासिक घटनाओं का गवाह रहा नौगढ़ का किला अब मिट्टी में दफन हो रहा है और उसके साथ ही दफन हो रही है राजकुमारी चंद्रकांता की अमर प्रेम कहानी और उसका रहस्य। कभी हाथी,घोड़े और सैनिकों से गुलजार रहने वाला यह किला आज समय की मार से उजाड़ पड़ा हुआ है। किले की सुंदर प्राचीर और अद्भुत कलाकृतियां धरती में समा गईं हैं। अब केवल छत ही बची है, जिस पर वन विभाग ने गेस्ट हाउस बना दिया है। विजयगढ़ की राजकुमारी चंद्रकांता और नौगढ़ के राजकुमार वीरेंद्र की प्रेम कहानी आज भी वनांचल के लोगों के जुबान पर है लेकिन वो इस कथा के स्मारक तक नहीं पहुंच सकते हैं। अगर सरकार पहले कर तो यह किला पर्यटन का बड़ा केंद्र बन सकता है। 
गेरुवतवा पर्वत के दक्षिण-पूर्व में स्थित नौगढ़ किले के उत्तर-पूर्वी भाग में कर्मनाशा नदी बहती है। किला भट्टियों के अवशेषों के साथ-साथ धातु और खनिज कचरे से भरा है। इसे चंद्रकांता कोठी के नाम भी जाना जाता है। 
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यूपी के चंदौली जिले में है नौगढ़ किला - फोटो : अमर उजाला
नौगढ़ किले में आज भी वह सुरंग साफ देखी जा सकती है जो लोगों के अनुसार विजयगढ़ जाती थी। विजयगढ़ की राजकुमारी चंद्रकांता और नौगढ़ के राजकुमार वीरेंद्र सिंह की अमर प्रेम कहानी का गवाह यह किला चंद्रकांता से जुड़ी किंवदंतियों के लिए प्रसिद्ध है। 
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यूपी के चंदौली जिले में है नौगढ़ किला - फोटो : अमर उजाला
 चंद्रकांता तत्कालीन मिर्जापुर (अब सोनभद्र) के विजयगढ़ के महाराजा जय सिंह और रानी रत्नगर्भा की एकलौती पुत्री थीं। जबकि राजकुमार वीरेंद्र सिंह तत्कालीन वाराणसी जनपद (अब चंदौली) के नौगढ़ राज्य के अधिपति सुरेंद्र सिंह के पुत्र थे। दोनों की प्रेम कहानी के बीच तमाम अवरोध थे। 

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यूपी के चंदौली जिले में है नौगढ़ किला - फोटो : अमर उजाला
विजयगढ़ के महराजा जय सिंह अपने वीरेंद्र सिंह को अपने पुत्र शक्ति सिंह का हत्यारा मानते थे। इसको लेकर ही कई युद्ध हुए, चंद्रकांता और वीरेंद्र सिंह का मिलन हुआ या नहीं यह कोई नहीं जानता। आज नौगढ़ का ऐतिहासिक किला मिट्टी में दफन हो रहा है। वन विभाग ने इसके छत पर गेस्ट हाउस बनाकर इसका नाम चंद्रकांता वन विश्राम गृह रखा है। जहां वीआईपी आकर विश्राम करते हैं, आम आदमी के लिए यह बंद रहता है। 
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यूपी के चंदौली जिले में है नौगढ़ किला - फोटो : अमर उजाला
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.केशरी नारायण त्रिपाठी कहते हैं कि चंद्रकांता की कहानी लोग बड़ी दिलचस्पी से सुनते हैं। सरकार लगातार ऐसे ऐतिहासिक स्थलों को विकसित कर पर्यटन को बढ़ावा दे रही है। पर नौगढ़ के किले पर किसी की नजर नहीं है, अगर इस किले को भी पर्यटकों के लिए खोल दिया जाए तो पर्यटन के साथ ही रोजगार बढ़ेगा।  
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यूपी के चंदौली जिले में है नौगढ़ किला - फोटो : अमर उजाला
वन क्षेत्राधिकारी (नौगढ़) पीके सिंह ने बताया कि महराजा बनारस स्टेट की यह आखिरी सीमा थी। जहां राजपरिवार आखेट के लिए आया करता था। इसके बाद महराजा ने ही इसे वन विभाग को संरक्षण के लिए सौंपा था। जर्जर किले को संरक्षित करने के लिए ही उसकी छत पर गेस्ट हाउस बनाया गया है। किला नीचे दब चुका है लेकिन इसे बाहर से देखने के लिए भी काफी लोग आते हैं।
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कर्मनाशा नदी - फोटो : अमर उजाला
वरिष्ठ साहित्यकार देवकीनंदन खत्री ने चंद्रकांता की जनकथा को उपन्यास में इस तरह बुना कि उसकी लोकप्रियता शिखर पर पहुंच गई। उस जमाने में अधिकतर लोग उर्दू भाषा-भाषी ही थे। पाठकों ने इस उपन्यास को पढ़ने के लिए हिंदी सीखी। इसी लोकप्रियता के चलते चंद्रकांत संतति की रचना की। इन उपन्यासों को पढ़ते वक्त लोग खाना-पीना भी भूल जाते थे। इसका प्रकाशन सन 1888 में वाराणसी के लहरी प्रेस से हुआ था। इसी कहानी पर नीरजा गुलेरी ने टीवी धारावाहिक चंद्रकांता बनाई जो भारतीय टेलीविजन के इतिहास में सबसे बड़े ब्लॉकबस्टर साबित हुई। 
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