अय्यारों की साजिशों, तिलस्मी अजूबों और अनेक ऐतिहासिक घटनाओं का गवाह रहा नौगढ़ का किला अब मिट्टी में दफन हो रहा है और उसके साथ ही दफन हो रही है राजकुमारी चंद्रकांता की अमर प्रेम कहानी और उसका रहस्य। कभी हाथी,घोड़े और सैनिकों से गुलजार रहने वाला यह किला आज समय की मार से उजाड़ पड़ा हुआ है। किले की सुंदर प्राचीर और अद्भुत कलाकृतियां धरती में समा गईं हैं। अब केवल छत ही बची है, जिस पर वन विभाग ने गेस्ट हाउस बना दिया है। विजयगढ़ की राजकुमारी चंद्रकांता और नौगढ़ के राजकुमार वीरेंद्र की प्रेम कहानी आज भी वनांचल के लोगों के जुबान पर है लेकिन वो इस कथा के स्मारक तक नहीं पहुंच सकते हैं। अगर सरकार पहले कर तो यह किला पर्यटन का बड़ा केंद्र बन सकता है।
गेरुवतवा पर्वत के दक्षिण-पूर्व में स्थित नौगढ़ किले के उत्तर-पूर्वी भाग में कर्मनाशा नदी बहती है। किला भट्टियों के अवशेषों के साथ-साथ धातु और खनिज कचरे से भरा है। इसे चंद्रकांता कोठी के नाम भी जाना जाता है।