पिछले दस सालों से सपा का मजबूत गढ़ बनी हुई नगीना सीट पर इस बार जीत के समीकरण मुस्लिम और दलित मतों पर निर्भर हैं। इस बार मुस्लिमों के बिखराव का दावा किया जा रहा है। यदि ऐसा हुआ तो यह सपा के लिए मुश्किल बन सकता है। वहीं, दलितों में सेंधमारी नतीजों को बदलकर रख सकती है। हालांकि सपा मुस्लिमों के साथ अन्य जातियां, भाजपा परंपरागत वोट बैंक के साथ दलित, बसपा दलितों के साथ मुस्लिमों के वोटों में अपनी-अपनी जीत की संभावना तलाश रही है। सभी उम्मीदवार अपनी जीत का दावा कर रहे हैं।
नगीना विधानसभा सीट पर मतदान समाप्त होने के बाद से भाजपा, सपा और बसपा तीनों पार्टी के प्रत्याशी व उनके समर्थक अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। सपा व भाजपा दोनों पार्टियों के समर्थक पतंग की उड़ान के आधार पर अपनी जीत की गुणा भाग लगा रहे हैं। एक तरफ जहां भाजपा समर्थक मुस्लिम वोटों के बिखराव होने, दलित वोटों में सेंधमारी करने और अपने परंपरागत वोट का एक तरफा उनके पक्ष में जाने पर अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी के समर्थक उसके परंपरागत मुस्लिम वोटों का एकतरफा उनके पक्ष में जाने, दलित व सवर्ण वोटों में सेंधमारी के दम पर जीत का दावा कर रहे हैं। दूसरी तरफ बसपा समर्थक दलित/मुस्लिम गठजोड़ के सहारे अपनी जीत का दम भर रहे हैं।