किसान महापंचायत- बिजनौर
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संगठन की लड़ाई हमेशा किसान के हक मेें ही लड़ी जाएगी, लेकिन ऐसे राजनीतिक दलों और किसान नेताओं का भी ध्यान रखना है जो रात को खुद ही बैरीकेडिंग हटाकर भाग आए और केवल अपने फायदे के लिए ही आंदोलन में बैठे थे।
गौरव टिकैत ने कहा कि किसान अपने हक के लिए दो महीने से ज्यादा समय से लड़ाई लड़ रहे हैं। लेकिन अब भी किसानों ने नहीं, बल्कि सरकार ने कमजोरी दिखाई है। किसानों के आंदोलन को खालिस्तानियों का आंदोलन बताया जा रहा था। किसानों को अहंकार से भरी सरकार से टकराना है, इसलिए लड़ाई लंबी लड़नी पडे़गी।