फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिल जीत लेंगी ये तस्वीरें: हैदरपुर वेटलैंड झील... अब संरक्षण के बदल जाएंगे तौर तरीके, दुनियाभर में मिलेगी पहचान

Fri, 10 Dec 2021 01:32 PM IST
कपिल kapil रजनीश त्यागी, अमर उजाला, बिजनौर
विज्ञापन
1 of 7
हैदरपुर वेटलैंड - फोटो : amar ujala
हैदरपुर वेटलैंड हस्तिनापुर अभ्यारण्य में होने के कारण पहले ही संरक्षण की श्रेणी में आता है। यहां पर शिकार पर प्रतिबंध है। रामसर साइट का दर्जा मिलने के बाद अब यहां पर संरक्षण के तौर तरीके बदल जाएंगे। प्रदेश सरकार से लेकर केंद्र सरकार तक अब यहां के विकास के लिए काम कराएंगी। यहां पर पक्षियों, जलीय जीवों, वन्य जीवों की कई-कई प्रजातियां मौजूद हैं।
 
बिजनौर गंगा बैराज के 6,908 हेक्टेयर क्षेत्र में हैदरपुर वेटलैंड एक मानव निर्मित झील है। 1984 में मध्य गंगा बैराज के निर्माण के दौरान यह बनाई गई थी, ताकि बाढ़ आने पर ज्यादा पानी इस झील में चला जाए। हैदरपुर वेटलैंड में हिरण सहित कई जानवरों, 30 से अधिक प्रजातियों के पेड़-पौधे, पक्षियों की 300 से अधिक प्रजातियां, 102 जलपक्षी, 40 से ज्यादा प्रजाति की मछली और दस से अधिक स्तनपायी प्रजातियां मिलती हैं।
विज्ञापन

2 of 7
हैदरपुर वेटलैंड झील - फोटो : amar ujala
कई संकटग्रस्त प्रजातियों का यहां हो रहा संरक्षण
हैदरपुर वेटलैंड पर 15 से अधिक ऐसी प्रजातियां मौजूद हैं, जिनमें विश्व स्तर पर संकटग्रस्त घोषित किया हुआ है। जैसे घड़ियाल (गेवियलिस गैंगेटिकस) और लुप्तप्राय हॉग हिरण (एक्सिस पोर्सिनस), ब्लैक-बेलिड टर्न (स्टर्ना एक्यूटिकौडा), स्टेपी ईगल (एक्विला निपलेंसिस), भारतीय स्किमर (रिनचोप्स एल्बीकोलिस) और गोल्ड महासीर (टोर पुतिटोरा)।
 
इस तरह परवान चढ़ती गईं परियोजनाएं
यूं तो हैदरपुर वेटलैंड के विकसित होने के बाद तमाम नाम सामने आए। तमाम लोगों का योगदान इसमें रहा। यहां के विकास में तेजी वन संरक्षक वीके जैन और मंडलायुक्त सहारनपुर संजय कुमार के प्रयासों से आई।
विज्ञापन

3 of 7
हैदरपुर वेटलैंड - फोटो : amar ujala
2016 में पहली बार हुआ था सर्वे
हैदरपुर वेटलैंड को सबसे पहले मेरठ में तैनात रहे तत्कालीन चीफ मुख्य वन सरंक्षक मुकेश कुमार ने खोजा था। वर्ष 2016 में मुकेश कुमार ने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के साथ मिलकर पूरी हस्तिनापुर सेंचुरी में वेटलैंड का सर्वे कराया था। उस समय हुए सर्वे में यहां 41 प्रजातियों के पक्षी रिपोर्ट में शामिल किए गए थे।
 
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने उपलब्ध कराई जानकारी
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के कॉआडिनेटर संजीव यादव ने बताया कि हैदरपुर वेटलैंड पर तमाम सर्वे हुए। यहां गणना भी कराई गई। इससे संबंधित समस्त जानकारी इंटरनेट पर रामसर साइट पर डाल दी गई है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वेटलैंड एंड पॉलिसी डायरेक्टर सुरेश बाबू स्वयं इसके लिए हैदरपुर वेटलैंड आए। दो बार यहां पर पक्षी दिवस भी मनाया गया। सामूहिक सहयोग से यह संभव हो सका।

4 of 7
हैदरपुर वेटलैंड - फोटो : amar ujala
वन संरक्षक और मंडलायुक्त सहारनपुर के प्रयास रंग लाए
सेवानिवृत्त वन संरक्षक वीके जैन, तत्कालीन कमिश्नर सहारनपुर संजय कुमार ने इसे विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तमाम वन अफसरों और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अफसरों को इसमें जोड़ा और दुनियाभर के वैज्ञानिकों की विजिट हैदरपुर वेटलैंड पर कराई गई। वीके जैन बताते हैं कि आज ही मैंने हैदरपुर वेटलैंड के रामसर साइट घोषित होने की चर्चा सुनी। मैं सेवानिवृत्त जरूर हुआ, लेकिन हैदरपुर से दिल से जुड़ाव है। इसमें खास बात यह है कि यह तीन साल पहले शून्य पर था। झाड़ियों में छिपी इस झील को मात्र तीन साल में विश्व स्तर की पहचान मिल गई। इससे जुड़े सभी लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा, तभी यह संभव हो सका।
विज्ञापन

5 of 7
आशीष। - फोटो : amar ujala
हैदरपुर वेटलैंड से शुरू होता है आशीष का दिन 
आशीष लोया... ऐसा युवा जिसने संकल्प से मुजफ्फरनगर और बिजनौर को नई पहचान दी। वह अब तक चिडिय़ाओं की 325 प्रजाति को चिन्हित कर दुनिया के पक्षी विशेषज्ञों और पर्यावरण मंत्रालय के समक्ष ला चुके हैं। सात साल के सफर में वन्य प्रेमियों की जमात एकत्र की। लोगों और वन विभाग को अपने साथ जोड़ा।

हैदरपुर वेटलैंड पर कैमरे, मोबाइल और दूरबीन के साथ रोज आशीष लोया आपको घूमते हुए मिल जाएंगे। लोया का सफर महाराष्ट्र के अकोला से शुरू होता है। पढ़ाई के बाद नौकरी के लिए न्यूयार्क पहुंच गए। यहां आर्ट ऑफ लिविंग से जुड़े तो फिर स्वदेश लौटे। बिजनौर और मुजफ्फरनगर से आवाजाही शुरू हुई तो गंगा बैराज ने जिंदगी में नया मोड़ ला दिया। यहां खड़े होकर पक्षियों की उड़ान देखते रहते। गंगा और सोनाली के बीच उड़ती चिड़ियों की पहचान करना और फोटो खींचना शौक बन गया। आशीष लोया बताते हैं कि वह शुरुआत में अकेले थे, लेकिन सफर शुरू किया। इसके बाद वन विभाग, क्षेत्र के ग्रामीण, मीडिया और पक्षी प्रेमियों की जमात बन गई। हैदरपुर आने वाले पक्षियों ने मुझे नई पहचान देने का काम किया है।
विज्ञापन

6 of 7
हैदरपुर वेटलैंड - फोटो : amar ujala
क्या होते हैं वेटलैंड
नमी या दलदली भूमि वाले क्षेत्र को आर्द्रभूमि या वेटलैंड कहा जाता है। जैव विविधता वाले यह वह क्षेत्र होते हैं जहां भरपूर नमी पाई जाती है। यह वह क्षेत्र होते हैं, जहां वर्ष भर आंशिक रूप से या पूर्णत: पानी भरा रहता है।

बढ़ रही पर्यटकों की संख्या
देश-विदेश के पक्षियों की महत्वपूर्ण प्रजातियों के अलावा यहां पर बारहसिंघा हिरन कुलांचे भरते हुए देखे जा सकते हैं। हैदपुर वेटलैंड पर पर्यटकों की संख्या भी बढ़ने लगी है। रविवार और छुट्टी के दिन यहां आसपास के जिलों के लोग भी पक्षियों को देखने के लिए पहुंचते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
हैदरपुर वेटलैंड - फोटो : amar ujala
हैदरपुर को कराया जाएगा विकसित
केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान ने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय की पहल पर हैदरपुर सूची में शामिल हो गया है। भविष्य में और अधिक प्रयास किए जाएंगे। जिले के लिए यह गौरव की बात है।

जानिए यूपी के रामसर स्थल
ऊपरी गंगा नदी, ब्रजघाट से नरौरा खिंचाव साण्डी पक्षी अभयारण्य, समसपुर पक्षी अभयारण्य हरदोई, नवाबगंज पक्षी अभयारण्य रायबरेली, समन पक्षी अभयारण्य उन्नाव, पार्वती अरगा पक्षी अभयारण्य मैनपुरी, सरसई नावर झील गोंडा, सुर सरोबर (कीठम) इटावा, आगरा और हैदरपुर वेटलैंड।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें