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India Carpet Expo: सुंदर, सस्ता और टिकाऊ कालीन ढूंढते रहे खरीदार, 400 करोड़ से अधिक व्यापार की उम्मीद

Wed, 11 Oct 2023 09:29 PM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, भदोही
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भदोही में इंडिया कारपेट एक्स्पो का समापन - फोटो : अमर उजाला
यूपी के भदोही जिले में लगातार दूसरे साल आयोजित अंतरराष्ट्रीय कालीन मेला (इंडिया कारपेट एक्सपो) का बुधवार को समापन हो गया। चार दिन के इस एक्सपो में कई देशों के खरीदारों और उनके प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। विदेशी प्रतिनिधियों में परंपरागत हैंडनाटेड पर्सियन कालीन की मांग कम हुई है। इसका मुख्य कारण इसका महंगा होना बताया जा रहा है। निर्यातकों कहना है कि खरीदारों का जोर सस्ता, सुंदर और टिकाऊ कालीन पर रहा। हस्तनिर्मित और सिल्क के कालीन महंगे और सुंदर होते हैं। इस बार दोनों कालीन की मांग कुछ खास नहीं रही।  खरीदार सस्ते कालीन ही ढूंढते रहे। कालीन निर्यात संवधर्न परिषद (सीईपीसी)  ने चार दिनों में 400 करोड़ से ज्यादा कारोबार होने की उम्मीद जताई है। एक्सपो में 255 विदेशी खरीदार और 250 आयातक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
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भदोही में इंडिया कारपेट एक्स्पो का समापन - फोटो : अमर उजाला
भदोही में दूसरी बार अंतरराष्ट्रीय कालीन मेला का आयोजन होने से निर्यातक के साथ ही सीईपीसी के प्रशासनिक समिति के सदस्य भी काफी उत्साहित थे। इस बार बीते साल की अपेक्षा ज्यादा आयातकों ने पंजीकरण कराया था लेकिन कम व्यापार का अनुमान जताया जा रहा है।
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भदोही में इंडिया कारपेट एक्स्पो का समापन - फोटो : अमर उजाला
हस्तनिर्मित और सिल्क के कालीन महंगे और सुंदर होते हैं। इस बार कारपेट में दोनों कालीन की मांग कुछ खास नहीं रही। हैंडनाटेड कालीन तैयार में होने में महीनों लगते हैं। सिल्क की कालीन बनने में भी वर्षों लग जाते हैं और रेशम की कीमत भी ज्यादा होती है। ऐसे में इनकी लागत बढ़ जाती है।

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भदोही में इंडिया कारपेट एक्स्पो का समापन - फोटो : अमर उजाला
एजाज अहमद ने बताया कि उन्होंने सस्ते से लेकर महंगे फ्लोर कवरिंग प्रदर्शित किए थे, लेकिन खास लाभ नहीं मिला। बताया कि हैंडटफ्टेड, हैंडलूम, ऊनी और सूती दरियां, हैंडनाटेड के अपेक्षाकृत सस्ते होते हैं, इसलिए उनकी मांग से बाजार कुछ संभला रहा। सिल्क कालीन बनाने वालों में मायूसी रही। 
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भदोही में इंडिया कारपेट एक्स्पो का समापन - फोटो : अमर उजाला
नई दिल्ली से सिल्क कालीन लेकर आए साकिब अल्ताफ ने बताया कि गत वर्ष भी वे आए थे, लेकिन तब हालात बेहतर थे। उधर एक्सपो के अंतिम दिन दोपहर बाद से लोग स्टॉल को बढ़ाने में लग गए। बाहर से आए निर्यातकों को आज ही लौटना था, इसलिए शाम तक मेला क्षेत्र से निकल गए। 
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भदोही में इंडिया कारपेट एक्स्पो का समापन - फोटो : अमर उजाला
भदोही और आसपास के निर्यातक भी शाम तक अपना पैकअप करने में लगे रहे। भदोही के निर्यातकों में कुछ अत्यधिक उत्साहित रहे तो कुछ के अनुसार व्यवसाय न के बराबर हुआ। एक्सपो के समाप्त होते ही निर्यातक नई उम्मीदों के साथ अपने माल ट्रांसपोर्ट के जरिए लेकर ग्रेटर नोएडा रवाना हो गए। 
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भदोही में इंडिया कारपेट एक्स्पो का समापन - फोटो : अमर उजाला
निर्यातकों से मिले फीडबैक के बाद सीईपीसी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि चार दिनों के इस आयोजन से उम्मीद के मुताबिक सफलता मिली है। इसमें ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, ब्राज़ील, बुल्गारिया, कनाडा, इजिप्ट, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, कजाकिस्तान, स्विट्जरलैंड, ताइवान, टर्की, यूएसए जैसे विदेशी खरीदारों से शानदार प्रतिक्रिया मिली है। 

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भदोही में इंडिया कारपेट एक्स्पो का समापन - फोटो : अमर उजाला
सीईपीसी के अनुसार चार दिनों में 3000 से 4000 व्यापार संबंधी पूछताछ की गई। जिससे आने वाले तीन से चार महीनों में 400 करोड़ से अधिक का कारोबार प्राप्त होगा। सीईपीसी प्रशासनिक समिति अध्यक्ष मुकेश कुमार गोंबर ने बताया कि भदोही में यह महज दूसरा आयोजन था। जिसका उद्देश्य कालीन उद्योग को एक वृहद मंच प्रदान करना था। मुख्यमंत्री के आगमन से कालीन व्यापारियों में नई उर्जा का संचार हुआ है। 
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कारपेट एक्सपो मार्ट भदोही - फोटो : अमर उजाला
आने वाले समय में भदोही में होने वाला कारपेट एक्स्पो और भी ऊंचाईयों को प्राप्त करेगा। बताया कि इस फेयर में निर्यातकों और आयातकों के बीच जो व्यापारिक वार्ता हुई है। वह आगामी चार से पांच महीनों में 400 करोड़ से अधिक व्यापार में परिवर्तित होगा। बताया कि भागीदार और एक्सपो में आने वाले विदेशी खरीदार बहुत खुश थे।
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