पंजाब और यूपी पुलिस की साझा कार्रवाई में मारे गए खालिस्तान समर्थक तीनों आतंकियों के शवों का मंगलवार को पोस्टमार्टम कराया गया। दोपहर करीब 2:30 बजे शुरू हुआ पोस्टमॉर्टम देर शाम तक चला।
पीलीभीत में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए तीनों आतंकियों के कुल छह गोली लगीं। इसमें जसनप्रीत सिंह को एक, वरिंदर को दो और गुरविंदर को तीन गोलियां लगी थीं। जसनप्रीत के शरीर के अंदर बुलेट निकली, जबकि शेष दोनों आतंकियों के गोली आरपार हो गई थी। पोस्टमार्टम होने के बाद यह स्पष्ट हो सका। हालांकि आधिकारिक रूप से इस मामले में डॉक्टर और पुलिस अधिकारियों ने कोई बयान जारी नहीं किया है।
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पोस्टमार्टम हाउस के बाहर खड़ी पुलिस और मृतकों के परिजन
- फोटो : अमर उजाला
दो चिकित्सकों के पैनल ने किया शवों का पोस्टमार्टम
पंजाब और यूपी पुलिस की साझा कार्रवाई में मारे गए खालिस्तान समर्थक तीनों आतंकियों के शवों का मंगलवार को पोस्टमार्टम कराया गया। दोपहर करीब 2:30 बजे शुरू हुआ पोस्टमॉर्टम देर शाम तक चला। इस दौरान पोस्टमॉर्टम हाउस पर पुलिस का पहरा रहा। पीलीभीत और पंजाब की पुलिस मौजूद रही। पोस्टमॉर्टम के बाद पंजाब पुलिस की निगरानी में परिजन तीनों के शव लेकर रवाना हो गए।
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पोस्टमार्टम हाउस के बाहर पंजाब पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस ने सोमवार रात को ही पोस्टमार्टम कराने की कोशिश की, लेकिन डीएम संजय कुमार की ओर से परिजनों के आने की स्थिति के आधार पर मंगलवार सुबह 11 बजे से पोस्टमार्टम कराने की अनुमति दी। दो चिकित्सकों का पैनल बनाया गया। वीडियो रिकॉर्डिंग कराई गई। परिजनों के पहुंचने के बाद कागजी प्रक्रिया पूरी की गई।
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पोस्टमार्टम हाउस के बाहर खड़ी एंबुलेंस
- फोटो : अमर उजाला
करीब 2:30 बजे पैनल ने पोस्टमार्टम शुरू किया। करीब दो घंटे तक पोस्टमार्टम चला। इस दौरान कोतवाल राजीव कुमार सिंह की अगुवाई में पुलिस तैनात रही। पंजाब की फोर्स भी दिन भर पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद रही। शाम करीब साढ़े छह बजे पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पंजाब पुलिस की निगरानी में परिजन शव को लेकर पंजाब के लिए रवाना हो गए। सीएमओ डॉ. आलोक कुमार ने भी पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर स्थिति को परखा और कागजी प्रक्रिया पूरी की।
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मृतक आतंकियों के परिजन
- फोटो : अमर उजाला
परिजन बोले...उनके बच्चों ने तो कभी मारपीट तक नहीं की
पंजाब और पीलीभीत पुलिस के साझा ऑपरेशन में सोमवार को मारे गए खालिस्तान समर्थक तीनों आतंकियों के परिजन मंगलवार सुबह पीलीभीत में पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। परिजनों का कहना था कि उनके बेटों का कभी मारपीट में भी नाम सामने नहीं आया। वे ऐसा नहीं कर सकते। चार दिन तक पंजाब पुलिस घर के आसपास तक नहीं आई। अचानक मुठभेड़ की सूचना मिली, जो भी हुआ वह यकीन से परे है।
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वीरेंद्र सिंह, गुरविंदर सिंह और जसन प्रीत सिंह के फाइल फोटो
- फोटो : यूपी पुलिस
मुठभेड़ में पंजाब के गुरदासपुर जिले के रहने वाले खालिस्तान समर्थक आतंकी वरिंदर सिंह, गुरविंदर सिंह व जसनप्रीत सिंह की मौत हुई थी। तीनों पर कलानौर थाने की बख्शीवाल पुलिस चौकी पर ग्रेनेड फेंकने आरोप था। मंगलवार को पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद मृतक गुरुविंदर सिंह के पिता गुरदेव सिंह ने बताया कि उनका इकलौता बेटा 19 दिसंबर को घर से चप्पल और टीशर्ट पहनकर निकला था।
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स्वरूप सिंह, आतंकी जसनप्रीत सिंह के पिता
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद उसका फोन बंद हो गया। चार दिन तक कोई जानकारी नहीं लगी। घर पर भी पुलिस नहीं आई। सोमवार को उसके मारे जाने की जानकारी मिली। उन्हें घटनाक्रम पर विश्वास नहीं हो रहा। दावा किया कि जिस दिन चौकी पर ग्रेनेड फेंकने की घटना हुई, उस दिन उनका बेटा घर पर ही था। मृतक जसनप्रीत सिंह के पिता स्वरूप सिंह ने भी यही तर्क दिया। उन्होंने कहा कि उनका बेटा कभी पंजाब में नहीं घूमा तो यहां तक कैसे पहुंच गया।
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गुरमीत सिंह (आतंकी वरिंदर के जीजा)
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने भी घटना के दिन बेटे के घर पर होने का दावा किया। बताया कि, 19 दिसंबर को ट्रक पर हेल्पर का कार्य करने की बात कहकर वह घर से निकला। इसके बाद सोमवार को मुठभेड़ की जानकारी मिली। कहा कि, उसका कोई भी अपराधिक इतिहास नहीं रहा। मृतक वरिंदर के जीजा गुरमीत सिंह ने बताया कि वरिंदर के अवैध गतिविधियों में शामिल होने की बात कभी सामने नहीं आई। न ही कोई अपराधिक इतिहास रहा। ऐसे में घटनाक्रम पर विश्वास नहीं हो रहा।
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मुठभेड़ में मारे गए थे तीन आतंकी
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तीन माह पूर्व ही जसनप्रीत ने की थी लव मैरिज
जसनप्रीत के पिता स्वरूप सिंह ने बताया कि दो बेटियों और तीन बेटों में जसनप्रीत सबसे छोटा था। तीन माह पहले ही उसने अपनी मर्जी से लव मैरिज की थी। परिवार के साथ घर पर ही रह रहा था।
Pilibhit Encounter: पोस्टमार्टम हाउस के बाहर खड़े परिजन
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गरीब परिवारों के थे तीनों
मारे गए तीनों आतंकियों की परिवारिक स्थिति कमजोर है। उनके परिवार गरीब हैं। पोस्टमाॅर्टम हाउस पर मिले परिजनों ने कहा कि वे लोग मेहनत-मजदूरी कर परिवार को चला रहे हैं। बच्चे भी मेहनत मजदूरी ही करते थे। जसनप्रीत अशिक्षित था। वहीं वरिंदर और गुरवदिंर 12वीं पास थे। तीनों पांच किलोमीटर दायरे में स्थित अलग-अलग गांवों में रहते थे। तीनों में आपस में दोस्ती थी।