बरेली में मुहर्रम पर ताजियेदारी शुक्रवार को यौम-ए-आशुरा पर मुकम्मल हो गई। शहरभर के तख्त-ताजिये व अलम बाकरगंज स्थित कर्बला में गमगीन माहौल में दफन किए गए। गांव-कस्बों में भी ताजिये के जुलूस निकाले गए।
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बाकरगंज कर्बला की ओर जाता खानकाह नियाजिया से निकला मुहर्रम का जुलूस।
- फोटो : संवाद
बरेली में मुहर्रम पर शहीदाने कर्बला की याद में दस दिनों से चल रही ताजियेदारी शुक्रवार को मुकम्मल हो गई। यौम-ए-आशुरा पर शहरभर के तख्त-ताजिये व अलम बाकरगंज स्थित कर्बला पर गमगीन माहौल में दफन किए गए। सुबह से ही या हुसैन की सदाएं बुलंद करने से साथ ढोल पर मातम करते अजादार कर्बला पहुंचते रहे। वहां ताजियेदारों ने तख्त, ताजिये, अलम व छड़ों आदि पर मन्नती चीजें चढ़ाईं। कर्बला के मैदान में उनको दफन किया गया। जुलूसों के आने का सिलसिला रात तक जारी रहा। लोग नियाज-नजर और चिरागां कर दुआएं व मन्नतें मांगते रहे। तमाम लोगों ने लंगर और तबर्रुक भी बांटे।
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कर्बला में दफन हुए ताजिये
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इस मौके पर कर्बला पर मेला भी लगाया गया। इसमें बच्चे और बड़े सभी खान-पान की दुकानों पर मनपसंद व्यंजनों का स्वाद लेते रहे। खेल-तमाशों का भी लोगों ने आनंद लिया। खास कर झूलों पर बच्चे मौज करते दिखे। कर्बला कमेटी के के अध्यक्ष खलील अहमद, सचिव सैयद हबीब हुसैन, नायब सदर महबूब अंसारी, आमिर खान, नौशाद, अकील खान, तौफीक खान, बिलाल अब्बासी आदि व्यवस्था में मुस्तैद रहे।
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जगह-जगह बांटे गए लंगर
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खानकाह नियाजिया के जुलूस का हुआ इस्तकबाल
यौम-ए-आशुरा पर खानकाह नियाजिया के सज्जादानशीन शाह मेहंदी मियां की कयादत में खानवादों और मुरीदों का काफिला शुक्रवार को बाकरगंज कर्बला पहुंचा। काफिले में दर्जनों तख्त, ताजिये और अलम शामिल थे। जुबां पर या हुसैन की सदाएं और दिल में शहीदाने कर्बला की मोहब्बत लिए ख्वाजा कुतुब, बिहारीपुर, जसोली, जखीरा, सिटी रोड, रेलवे क्रॉसिंग इलाकों से होता हुआ उनका काफिला कर्बला की ओर बढ़ता रहा। इस दौरान जगह-जगह पर लोग इस्तकबाल करते रहे। कर्बला पहुंचकर उन्होंने ताजिये दफन किए। नियाज-नजर के बाद लंगर तकसीम किया गया।
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मुहर्रम का जुलूस
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इमाम हुसैन से मोहब्बत करना हर मुसलमान के ईमान का हिस्सा
आस्ताना-ए-आलिया मोहम्मदिया (दरगाह वली मियां) में 10 मुहर्रम को इमाम हुसैन की फातेहा हुई। इस मौके पर इमाम हुसैन की हक, इन्साफ और इन्सानियत के लिए दी गई कुर्बानी को याद किया गया। कारी गुलाम यासीन ने कलाम पाक की तिलावत की। मौलाना शमीम, सैयद मुस्तजाब अली और नवीद ने मनकबत पेश की। हाफिज अफजाल मोहम्मदी ने इमाम हुसैन की जिंदगी पर प्रकाश डाला।
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मुहर्रम के जुलूस में लंगर लूटते लोग
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उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन से मोहब्बत करना हर सुन्नी मुसलमान के ईमान का हिस्सा है। इमाम हुसैन ने 10 मुहर्रम 61 हिजरी को यजीद के जुल्म के खिलाफ जंग लड़ी। उन्होंने अपने खानदान और साथियों के साथ भूखे-प्यासे रहकर जान कुर्बान कर दी। शिजरा शरीफ पढ़ने के बाद सज्जादानशीं अल्हाज अनवर मियां हुजूर ने दुआ-ए-खैर की।
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सीसी कैमरों से लैस रहे पुलिसकर्मी
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कैमरों से लैस रहे पुलिसकर्मी व वाहन
इस बार मुहर्रम पर पुलिसकर्मियों से लेकर उनके वाहन भी कैमरों से लैस रहे। इसका असर यह रहा कि कहीं से सांप्रदायिक विवाद की सूचना नहीं आई। एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि सभी थानों को वाई-फाई से लैस पांच-पांच विशेष कैमरे दिए गए थे। मुख्यालय से मुहैया कराए गए इन कैमरों को सभी बड़े जुलूसों या उन स्थानों पर इस्तेमाल किया गया, जहां सांप्रदायिक विवाद की आशंका बनी रहती है। ऐसे कैमरे ऊंचे डंडों पर बांधकर पुलिसकर्मियों को दिए गए। थानों की गाड़ी पर भी कैमरे लगाए गए थे।
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शिया समुदाय ने निकाला जुलूस
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कर्बला के शहीदों को याद कर निकाला जुलूस अलम
शहर में शुक्रवार को शिया समाज ने कर्बला के बहत्तर शहीदों की याद में जुलूस-ए-अलम निकाला। इस दौरान अंजुमनों के सदस्यों ने नौहा पढ़ते हुए जंजीरों से मातम किया। यह जुलूस मोहल्ला गढ़ैया इमामबाड़ा वसी हैदर से शुरू हुआ। जुलूस विभिन्न मार्गों से होते हुए किला स्थित कोठी नवाब नब्बू साहब पहुंचा। यहां अंजुमन गुलदस्ता-ए-हैदरी ने जंजीर का मातम किया। इसके बाद जुलूस इमामबाड़ा फतेह अलीशाह काला इमामबाड़ा पहुंचा। यहां हजरत इमाम हुसैन के छह माह के बच्चे हजरत अली असगर के ताबूत की जियारत कराई गई। हजरत अली असगर के मसायब बयान किए गए, जिससे लोगों की आंखें नम हो गईं।
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शिया समुदाय ने निकाला जुलूस
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काला इमामबाड़ा से अंजुमन शमशीर-ए हैदरी सहित अन्य शिया समुदाय के लोग जुलूस में शामिल हुए। अली कॉलोनी लीचीबाग मोड़ पर अंजुमन परचम-ए-अब्बास ने भी जंजीर का मातम कर शहादत का पुरसा दिया। जुलूस स्वालेनगर स्थित शिया कर्बला पहुंचकर समाप्त हुआ। यहां मौलाना सिब्ते हैदर जैदी ने मसायब बयान किए और जियारते आशूरा पढ़ाई। इससे पहले यौमे आशूरा के अमाल इमाम-ए-जुमा मौलाना हसीन हैदर नकवी की अगुवाई में हुए। रात में शाम ए गरीबा की मजलिस कई इमामबाड़ों में आयोजित की गई। इसमें कर्बला में रात के मंजर का बयान किया गया।
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कर्बला में दफन हुए ताजिये
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मिलाद की महफिल और जलसे हुए
यौम-ए-आशुरा के मौके पर सुन्नी मुसलमानों ने शहीद-ए-कर्बला को अपने अपने अंदाज में खिराज पेश किया। सुन्नी हलकों में कुरान ख्वानी, लंगर, महफिल-ए-मिलाद और जलसों का आयोजन किया गया। शहर के तमाम मुस्लिम इलाकों में सुबह से चहल पहल रही। लोगों ने रातभर जागकर अल्लाह की इबादत की, रोजा रखा। दरगाहों और खानकाहों में हाजिरी दी। जगह जगह शर्बत, चाय की सबील लगाई गई और लंगर किया।
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आला हजरत दरगाह
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आला हजरत दरगाह के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां ने कई जगह जलसों में शिरकत कर शहीद ए कर्बला हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 जानिसार साथियों की शहादत को याद करते हुए कहा कि कर्बला के शहीदों ने खुद की कुर्बानी देकर इस्लाम को बचा लिया। उन्होंने खिराज पेश करते हुए कहा कि आज मुसलमानों को हजरत इमाम हुसैन की शिक्षा पर अमल करने की जरूरत है।
दरगाह आला हजरत के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि रात भर दरगाह आला हजरत पर अकीदतमंदों का हाजिरी देने के लिए तांता लगा रहा। लोगों ने दरगाह प्रमुख हजरत सुब्हानी मियां और सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां से मिलकर दुआ कराई। दरगाह पर भी लंगर का आयोजन किया गया। इस मौके पर मौलाना जाहिद रजा, मौलाना बशीर उल कादरी, परवेज नूरी, औरंगजेब नूरी, शाहिद नूरी, अजमल नूरी, मंजूद रजा, ताहिर अल्वी आदि लोग मौजूद रहे।