हिमालय की तलहटी का तराई क्षेत्र शिव साधकों का प्रमुख केंद्र रहा है। यही कारण है कि लखीमपुर खीरी जिले में कई प्राचीन शिव मंदिर हैं। इनमें से कई मंदिर महाभारतकालीन हैं। मोहम्मदी तहसील क्षेत्र में जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर की दूरी पर जंगल में स्थित जंगली नाथ मंदिर का इतिहास भी महाभारतकाल से जुड़ा है। इस मंदिर से चार किलोमीटर की दूरी पर गोमती नदी बहती है। जंगल के बीचोंबीच दुर्गम स्थान पर स्थापित यह मंदिर पांडवों के अज्ञातवास के समय का बताया जाता है। जानते हैं जंगली नाथ मंदिर का इतिहास और मान्यता...
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जंगली नाथ मंदिर में स्थापित शिवलिंग
- फोटो : अमर उजाला
पुजारी सुरेंद्र कुमार शर्मा के मुताबिक पौराणिक मान्यता है कि यहां पर पांडवों ने अज्ञातवास का समय व्यतीत किया था। उसी दौरान पांडवों ने इस क्षेत्र से मैगलगंज तक 12 शिवलिंगों की स्थापना की थी।
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जंगल के बीच में स्थित है यह मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
उसी में से एक शिवलिंग यहां स्थापित है, जिसे जंगली नाथ मंदिर के नाम से जाना गया। बताते हैं कि कई वर्ष पहले चरवाहों ने यहां पेड़ों के बीच शिवलिंग देखा। इसके बाद यहां मंदिर का निर्माण कराया गया।
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प्राचीन वट वृक्ष
- फोटो : अमर उजाला
सुरेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि मंदिर परिसर में प्राचीन विशालकाय बरगद का पेड़ है। प्राचीन बरगद पर वैज्ञानिक भी शोध कर चुके हैं, जिसमें यह पता चला है कि यह वट वृक्ष 5500 वर्ष पुराना है।
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जंगली नाथ मंदिर में स्थापित शिवलिंग
- फोटो : अमर उजाला
मान्यता है कि जंगली नाथ मंदिर में आज भी अश्वत्थामा पूजा करने आते हैं। सुबह जब मंदिर खुलता है तो शिवलिंग पूजित मिलती है। सावन मास और शिवरात्रि पर यहां भक्तों की भारी भीड़ रहती है।
पुजारी के मुताबिक जंगली नाथ मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां आकर जो भक्त सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करता है, उसकी मनोकामनाएं पूरी होती है। यहां 12 महीनों में अनुष्ठान चलते रहे हैं।