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सैलानियों के स्वागत को तैयार दुधवा नेशनल पार्क, वन मंत्री ऑनलाइन करेंगे उद्घाटन

Sat, 31 Oct 2020 10:19 PM IST
प्राची प्रियम संवाद न्यूज एजेंसी, पलियाकलां
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दुधवा नेशनल पार्क - फोटो : अमर उजाला
दुधवा नेशनल पार्क के द्वार एक नवंबर से सैलानियों के लिए खोल दिए जाएंगे। इस बार 15 दिन पूर्व खुल रहे पार्क की ओपनिंग दोपहर 12 बजे होगी। इसमें वनमंत्री दारा सिंह चौहान ऑनलाइन दुधवा नेशनल पार्क का उद्घाटन करेंगे। शनिवार को पीसीसीएफ, एफडी, डीडी समेत अन्य आला अधिकारी पूरे दिन पार्क में डटे रहे और तैयारियों को अंतिम रूप दिलाया। कोरोना की गाइड लाइन का पालन कराते हुए रविवार से सैलानियों के लिए पार्क को खोला जा रहा है। बता दें कि हर साल 15 नवंबर को खुलने वाले दुधवा नेशनल पार्क के द्वार को कोरोना संक्रमण के चलते एक नवंबर को ही खोला जा रहा है। इसके लिए भी पार्क प्रशासन की गाइड लाइन के मुताबिक ही सैलानियों को पार्क का भ्रमण कराया जाएगा। हाथी की सवारी जहां बंद रहेगी, वहीं 10 वर्ष से नीचे बच्चे व 65 वर्ष से ऊपर के बुजुर्गों को पार्क में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

थर्मल स्कैनिंग होने के बाद ही सैलानी पार्क के अंदर दाखिल हो सकेंगे। पार्क की तैयारियों का जायजा लेने के लिए विभाग के पीसीसीएफ राजीव गर्ग शनिवार को यहां पहुंचे। उन्होंने एफडी संजय पाठक, डीडी मनोज कुमार सोनकर से तैयारियों के बारे में जानकारी हासिल की। इसके बाद खुद ही तैयारियों का जायजा भी लिया। हटों को देखा और सैलानियों को किसी प्रकार की कोई दिक्कतें न आएं, इसके दिशा-निर्देश भी दिए। पीसीसीएफ के आने से पूर्व ही पार्क में जंगल जाने के मुख्य द्वार पर साज-सज्जा का कार्य चलता रहा।
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दुधवा नेशनल पार्क - फोटो : अमर उजाला
हाथियों के साथ सेल्फी के अरमान भी रह जाएंगे अधूरे
दुधवा नेशनल पार्क में हाथियों के साथ सेल्फी लेने के अरमान भी सैलानियों के अधूरे रह जाएंगे। कोविड-19 के चलते हाथी की सवारी पर पहले ही बैन लगाया जा चुका है। अब हाथियों को भी यहां से हटाकर दक्षिण सोनारीपुर रेंज में उनका आधार शिविर बनाया गया है, जिससे हाथी के साथ सैलानी इस बार सेल्फी नहीं खींच सकेंगे।

14 थारूहट व डॉरमेट्री होगी रुकने का साधन
दुधवा नेशनल पार्क में आने वाले सैलानियों के लिए 14 थारूहट और डॉरमेट्री के साथ ही छह रूम का गेस्ट हाउस रुकने के लिए है। इसके अलावा सठियाना, सोनारीपुर, किशनपुर में भी रुकने का साधन है। हटों की ऑनलाइन बुकिंग होगी।

किशनपुर में इस बार भी हो सकते हैं बाघ के दीदार
पिछले पर्यटन सत्र में सैलानियों को किशनपुर में बाघ का दीदार होना आम बात है। यहां अक्सर सैलानियों को बाघ के दीदार हो जाते थे। इसमें एक साथ पांच शावकों के साथ घूमती बाघिन को भी बीते वर्ष सैलानियों ने कैमरे में कैद किया था। उम्मीद है कि इस बार भी सैलानियों को किशनपुर में बाघों के दर्शन होंगे।

 
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दुधवा नेशनल पार्क - फोटो : अमर उजाला
ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए स्टे होम भी है उपलब्ध
ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार देने के उद्देश्य से स्टे होम भी सैलानियों के लिए उपलब्ध रहेंगे। इसमें किशनपुर में फार्म हाउस के साथ ही अन्य किसानों द्वारा बनवाए गए स्टे होम शामिल हैं। जहां स्थानीय संस्कृतिक और खानापान की सुविधा सैलानियों को मिलेगी।

कैसे पहुंचें दुधवा
दुधवा नेशनल पार्क की यात्रा काफी सुगम है और आसानी से किसी भी साधन से यहां आया जा सकता है। दिल्ली और लखनऊ के सैलानियों के लिए दुधवा का रास्ता काफी सुगम है। दुधवा नेशनल पार्क के लिए दिल्ली से आने वाले सैलानी वाया बरेली, पीलीभीत, मैलानी होते हुए पलिया और यहां से दुधवा जा सकते हैं। दिल्ली से पलिया तक कई रोडवेज और प्राइवेट बसें भी चलती हैं, जो सैलानियों के लिए यहां आने में काफी मददगार साबित होंगी। लखनऊ से भी निजी और यात्री वाहनों से यहां आया जा सकता है। लखनऊ से वाया सीतापुर लखीमपुर पलिया होते हुए दुधवा जा सकते हैं।

 

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दुधवा नेशनल पार्क में सैलानियों के रुकने की व्यवस्था - फोटो : अमर उजाला
सीमा बंद होने से पलिया के व्यापारियों की होगी आमदनी
दुधवा नेशनल पार्क रविवार से खुल रहा है, जबकि नेपाल बॉर्डर कोरोना महामारी के चलते बीते सात माह से पूरी तरह से बंद है। ऐसे में दुधवा आने वाले वह सैलानी जो नेपाल जाकर खरीददारी या भ्रमण करने जाते थे वह अब नहीं कर सकेंगे। ऐसे में पलिया के दुकानदारों की आमदनी हो सकती है। दुधवा से लौटते समय भी सैलानी पलिया आकर खरीददारी कर सकते हैं।

होटलों में भी हो सकती है सैलानियों की भीड़
कोरोना काल में एक हट में दो लोगों के रुकने के नियम के तहत हटों के फुल हो जाने के बाद पलिया के स्थानीय होटलों में भी सैलानियों की भीड़ लग सकती है। ऐसा इसलिए है कि संख्या कम होने के बाद हट जल्दी बुक हो जाएंगे, जिससे सैलानी पलिया की ओर रुख करेंगे।

 
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दुधवा नेशनल पार्क - फोटो : अमर उजाला
आदिवासी थारू महिलाओं के उत्पादों का लगता है काउंटर
दुधवा नेशनल पार्क में पर्यटन के अलावा यहां पर आदिवासी थारू महिलाओं को भी काफी लाभ होता है। आदिवासी थारू महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उनके उत्पादों को रूप देने के साथ उनकी बिक्री का शिविर भी पर्यटन सत्र शुरू होते ही लगाया जाता है। जहां बड़ी संख्या में सैलानियों की भीड़ जुटती है। बाहर से आने वाले सैलानी यहां की थारू संस्कृति से परिचित होते हैं। इनके उत्पादों में सबसे ज्यादा अगरबत्ती, मसाले, जूट से बने बैग, डलिया, टोपी, कैप, मोबाइल बैग, पर्स आदि चर्चित हैं।
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