बरेली के लेखपाल मनीष कश्यप हत्याकांड में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि जेल जाने के बाद से दो पत्नियों का खर्चा उठाना मुश्किल हो गया था। फिरौती वसूलने के लिए मनीष की हत्या की थी।
बरेली के लेखपाल मनीष कश्यप (28) की हत्या के मुख्य आरोपी ओमवीर कश्यप ने कर्जा चुकाने के लिए हत्या कर फिरौती वसूलने की साजिश रची थी। पुलिस पूछताछ में ओमवीर ने बताया कि वह एक हत्या के आरोप में पहले भी जेल गया था। इसके चलते उसकी आर्थिक हालत कमजोर हो गई। जमानत पर बाहर आने के बाद अर्टिगा कार की टूट चुकीं किस्तें भरने और दो पत्नियों का खर्चा उठाने के लिए उसने रिश्तेदारों के साथ मिलकर पांच लाख फिरौती वसूलने की साजिश रची थी। हालांकि फिरौती वसूलने के पहले ही वह पकड़ा गया।
ओमवीर सत्तापक्ष के एक नेता का खास गुर्गा है। नेता के प्रभावशाली रहते वक्त उसने काफी रुपये कमाए और गांव में हनक दिखाई। नेता की पकड़ कमजोर होते ही वह भी परेशानी में घिर गया।
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जांच पड़ताल करते अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
मई में हत्या के मामले में ओमवीर नामजद हुआ था। कुछ महीने वह जेल में रहा। उसने पुलिस को बताया कि करीब 60 हजार रुपये उसकी जमानत कराने में लग गए। साल भर पहले उसने कार फाइनेंस पर ली थी। उसकी भी दो किस्तें टूट गई थीं। उसने बताया कि उसकी एक पत्नी गांव में तो दूसरी नोएडा में रहती है। दोनों का खर्च उठाना मुश्किल हो गया था। बच्चों की फीस तक जमा नहीं कर पा रहा था।
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आरोपी का घर
- फोटो : अमर उजाला
शातिर निकला ओमवीर, घर से मिले दस्तावेज
शाम के वक्त एसओजी के साथ कैंट, फतेहगंज पश्चिमी व फरीदपुर थाना प्रभारी की टीम ने ओमवीर के घर की तलाशी ली। यहां से लेखपाल मनीष के कपड़े, उसका बस्ता व सरकारी अभिलेख और मुहर आदि सामान बरामद कर लिया गया। ओमवीर बेहद शातिर निकला। वह अपनी अर्टिगा कार से हरियाणा, पंजाब व अन्य प्रदेशों में मजदूरों को ईट भट्ठों व अन्य कामों के लिए ले जाने का ठेकेदारी वाला काम करता है। इन दिनों उसने निश्चिंत होकर कई प्रदेशों व गोंडा आदि शहरों तक की यात्रा की।
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नाले में मिला सिर
- फोटो : अमर उजाला
एक तीर से करने थे दो शिकार
एसएसपी अनुराग आर्य ने भी ओमवीर से बात की। उसने बताया कि लेखपाल से उसकी दोस्ती थी। वरासत के मामलों में वह मनीष को छोटी मोटी कमाई भी करवा देता था। लेखपाल मनीष की हलके के गांव खल्लपुर के प्रधान हरिराम से नहीं बनती थी। तब ओमवीर ने यह भी साजिश रची कि हत्या करके हरिराम को फंसा दिया जाएगा। उसने घटना के बाद मनीष के परिजनों तक भ्रामक सूचनाएं भिजवाकर खल्लपुर के प्रधान को पुलिस की नजर में चढ़ाने की भी कोशिश की। इसी की वजह से परिजनों ने प्रधान के खिलाफ तहरीर भी दी थी। हालांकि पुलिस ने अज्ञात पर अपहरण का मामला दर्ज किया था।
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लेखपाल मनीष का फाइल फोटो
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साले ने लेखपाल के घर जाकर भांप ली थी हैसियत
ओमवीर का साला सूरज लेखपाल मनीष के घर भी जा चुका था और उसे पता था कि परिवार के पास काफी रुपया है। शुरू में उन्होंने केवल अगवा करने की ही साजिश रची थी। बाद में आपस में चर्चा की मनीष सबको पहचानता है तो उसे छोड़ने के बाद फंसना तय है। तब सोच लिया कि उसे अगवा करके हत्या कर देंगे। कपड़े व अन्य साक्ष्य दिखाकर परिजनों से फिरौती वसूल लेंगे।
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नाले में मिला सिर
- फोटो : अमर उजाला
मैंने तो पूरी लाश फेंकी थी
नाले से लेखपाल की केवल खोपड़ी मिली है। पास में उनके कुछ कपड़े भी थे। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने तो गला कसकर हत्या करने के बाद शव नाले में फेंक दिया था। केवल खोपड़ी ही क्यों मिली, इस बारे में वह कुछ नहीं जानता।
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मौके पर पुलिस अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
पहले भी हुए थे लापता, हल्के में लेती रही पुलिस
चूंकि लेखपाल एक बार पहले भी चार दिन को लापता हुए थे, इस लिहाज से फरीदपुर पुलिस इसे गंभीरता से नहीं ले रही थी। जब लेखपाल की मां प्रदर्शन के दौरान बेहोश हुई तो एडीजी रमित शर्मा ने उन्हें सहारा दिया। उसी दिन एडीजी ने लेखपाल की तलाश को एसपी क्राइम के नेतृत्व में एसओजी को लगाया। तब एसएसपी अनुराग आर्य ने भी फरीदपुर इंस्पेक्टर से हटाकर विवेचना फतेहगंज पश्चिमी इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार चतुर्वेदी को सौंप दी। एसएसपी रोज टीमों की मॉनीटरिंग करके एडीजी को रिपोर्ट भेज रहे थे।
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मृतक लेखपाल के परिजन
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परिजनों ने की डीएनए जांच कराने की मांग
लेखपाल मनीष के भाई विष्णु ने बताया कि ओमवीर व कुछ दूसरे प्रधानों ने रामगंगा किनारे की काफी जमीनों पर कब्जा कर रखा है। उन्हें लगता है कि जमीन के असली मालिकों ने अपनी जमीन खाली कराने को पैमाइश कराने की मांग की होगी। शायद आरोपियों को डर हो कि सही पैमाइश से उनका कब्जा खत्म हो जाएगा। इतनी जल्दी उनके भाई का हल्का बदलने की वजह भी यही लग रही है। कहा कि वह खोपड़ी के अवशेष से कैसे मानें कि यह उनके भाई के हैं। एसडीएम से कह रहे हैं कि इसकी डीएनए जांच करा दें तो वह दस्तखत नहीं कर रहे हैं। कहा कि सही खुलासा न हुआ तो कोर्ट जाएंगे।
शराब पिलाकर कार में सूरज ने गला कसा
ओमवीर ने बताया कि 27 नवंबर को उसने सुबह के वक्त लेखपाल से बात कर दोपहर में घूमने व पार्टी करने की बात कही। दोपहर एक बजे दोबारा याद दिलाया। फिर तय प्लान के मुताबिक तीन बजे लेखपाल को लेकर अपनी कार से बुखारा रोड रेलवे क्रॉसिंग पहुंचा। वहां सूरज व अन्य साथी भी थे। वहां इन लोगों ने बीयर व देशी शराब खुद पी और मनीष को पिलाई। फिर शाम ढले कार से मिर्जापुर में ओमवीर के घर की ओर चल दिए। कार ओमवीर चला रहा था और लेखपाल उसके बराबर में बैठा था। सूरज बाकी लोगों के साथ पीछे बैठा था। ओमवीर के मुताबिक, मिर्जापुर के पास ही सूरज ने पीछे से मफलर डालकर लेखपाल का गला कस दिया। रात साढ़े दस बजे मिर्जापुर व बभिया के पास ओमवीर के घर के पीछे ही नाले में शव दबा दिया।