इसी बीच जब आरक्षण का निर्धारण किया गया तो इस ग्राम पंचायत का प्रधान पद महिला के लिए आरक्षित घोषित हो गया। चूंकि जितेंद्र सिंह अविवाहित थे, लिहाजा इनकी मुकिश्लें बढ़ गईं, उनका पूरा दांव ही विफल होने की स्थिति में आ गया। उनके समर्थकों ने उन्हें शादी करने का सुझाव दिया तो वह तैयार हो गए।