युवा तुर्क के नाम से मशहूर रहे दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की आज पुण्यतिथि है। पूर्व पीएम चंद्रशेखर से जुड़े कई ऐसे किस्से हैं, जिन्हें आज भी सुनाया जाता है। कहा जाता है कि वो पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने राज्य मंत्री या केंद्र में मंत्री बने बिना ही सीधे प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की पुण्यतिथि आज कहीं सादे कार्यक्रम तो कहीं घरों से श्रद्धांजलि देकर मनाई जाएगी। आज भी उनकी कमी बलिया जिला के लोगों को खलती है। चंद्रशेखर का जन्म बलिया जिले के इब्राहिमपट्टी गांव में एक मध्यम वर्गीय परिवार में 17 अप्रैल 1927 को हुआ था।
वे 1977 से 1988 तक जनता पार्टी के अध्यक्ष रहे थे। चंद्रशेखर अपने छात्र जीवन से ही राजनीति की ओर आकर्षित थे और क्रांतिकारी जोश एवं गर्म स्वभाव वाले आदर्शवादी के रूप में जाने जाते थे। बागी बलिया इसे यूं ही नहीं कहा जाता है। यहां से देश की सियासत का बड़ा आंदोलन उपजा था और उसके बाद देश में कांग्रेस सरकार को चुनौती भी देश में यहीं से मिलनी शुरू हुई थी। चंद्रशेखर ने 6 जनवरी से 30 जून 1983 तक दक्षिण के कन्याकुमारी से नई दिल्ली तक लगभग 4260 किलोमीटर की पदयात्रा की थी।
उनके पदयात्रा का लक्ष्य लोगों से मिलना व उनकी समस्याओं को समझना था। उन्होंने सामाजिक व राजनीतिक कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने के लिए देश के विभिन्न भागों में 15 भारत यात्रा केंद्र स्थापित किए थे। वे आज की राजनीति से परे थे। वह क्षेत्रवाद व परिवारवाद की राजनीति से कोसो दूर रहे। चंद्रशेखर बोन कैंसर से पीड़ित हो गए और आठ जुलाई 2007 को उनका निधन हो गया, जिसकी कमी आज भी लोगों के दिलों दिमाग में है।