बलिया की बाढ़
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39 करोड़ खर्च, फिर भी नहीं रुकी तबाही
1955 में गीता प्रेस, गोरखपुर की पहल पर बना दूबे छपरा रिंगबंधा 1982, 2003 और 2013 में क्षतिग्रस्त हुआ। 2014-15 में करीब 10 करोड़ रुपये खर्च कर इसकी उंचाई बढ़ाई और चौड़ीकरण किया गया। इसे टेंगरही बिड़ला बंधे से जोड़ा गया। 2016 की बाढ़ में रिंगबंधा फिर बह गया। इसके बाद 2017 में 29 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत हुई। 2018 में कम बाढ़ के बावजूद स्पर और रिंगबंधे का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। 16 सितंबर 2019 को करीब एक किलोमीटर लंबा रिंगबंधा गंगा में समा गया और दर्जनों गांवों के 50 हजार लोग फिर बाढ़ की चपेट में आ गए।