फरिश्तों को किसी ने नहीं देखा, लेकिन बागपत के इरफान, नौशाद और शरीफ उन लोगों के लिए फरिश्तों से कम नहीं हैं, जो यमुना में डूब रहे थे, लेकिन ये तीनों दोस्त नदी की लहरों से डूबते लोगों को बाहर निकाल लाए। पिछले 20 सालों में ये करीब 300 लोगों की जान बचा चुके हैं।
मोहल्ला देशराज के रहने वाले इरफान, नौशाद, शरीफ बीस साल पहले यमुना किनारे अपने पशुओं को चराने के लिए जाते थे, दिनभर वहां रहने के दौरान पहले तैरना सीख और फिर गोता मारना सीख गए। अब किसी को डूबते देखते हैं, अपनी जिंदगी की परवाह किए बगैर उसे बचाने के लिए कूद पड़ते हैं। तीनों के इस जज्बे को देखते हुए पुलिस व प्रशासन अधिकारियों ने कई बार इन्हें सम्मानित भी किया है। आगे पढ़ें इन दोस्तों की दिलेरी की कहानियां और कैसे इन तीन दोस्तों ने लोगों को नई जिंदगी दी है।