फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

श्रावण: यूपी के बागपत में है आठ पलकों वाला अलौकिक शिवलिंग, भगवान परशुराम ने यहां कर्ण को दिया था श्राप

Tue, 27 Jul 2021 06:40 PM IST
Dimple Sirohi प्रदीप पांचाल, अमर उजाला, बागपत
विज्ञापन
1 of 5
आठ पलकों वाला शिवलिंग, महंत एकादशी गिरी महाराज - फोटो : Amar Ujala baghpat
बागपत के चांदीनगर क्षेत्र में आठ पलकों वाला अलौकिक शिवलिंग मौजूद है। पौराणिक इतिहास के अनुसार यह वही शिवलिंग है जहां भगवान परशुराम ने महादानी कर्ण को अभिशाप दिया था। 

गांव खट्टा प्रहलादपुर के महेश मंदिर में आठ पलकों का अलौकिक शिवलिंग की पौराणिक मान्यता है। मंदिर क्षेत्र में भगवान परशुराम का प्राचीन आश्रम है।  बताया जाता है कि भगवान परशुराम ने इसी स्थान पर रुष्ट होकर कर्ण को श्राप दे दिया था।

जूना अखाड़े के महंत एकादशी गिरी महाराज इस अलौकिक व अद्भुत मंदिर की देख-रेख करते हैं। मंदिर प्रांगण में 25 हजार साल पुराना वृक्ष भी मौजूद है। इसकी पुष्टि भारत सरकार की ऐतिहासिक धरोहर की जांच करने वाले विशेषज्ञों की टीम भी कर चुकी है।
विज्ञापन

2 of 5
जूना अखाड़े के महंत एकादशी गिरी महाराज - फोटो : Amar Ujala baghpat
मंदिर के पुजारी एकादशी गिरी बताते हैं कि मंदिर प्रांगण में पूर्व महंतों की समाधियां बनी हुई हैं और एक धूना 24 घंटे चलता है।

बताया जाता है हिसावदा निवासी एक लड़की को स्वप्न में प्राचीन वृक्ष पर गणेश भगवान की तस्वीर दिखाई दी थी। स्वप्न की सच्चाई देखने को युवती के परिजन महेश मंदिर पहुंचे थे, जिसके बाद से यहां वृक्ष को गणेश भगवान मानकर पूजा जाता है।
विज्ञापन

3 of 5
प्राचीन बरगद का पेड़ - फोटो : Amar Ujala baghpat
मंदिर में मौजूद है आठ पलकों वाली पिंडी
मंदिर में आठ पलक वाली लाल पिंडी मौजूद है। भगवान परशुराम ने प्राचीनकाल में मंदिर में शिवलिंग की स्थापना की थी और मंदिर प्रागंण के नजदीक ही का आश्रम बनाया था। 

4 of 5
मंदिर प्राचीन बरगद का पेड़ - फोटो : Amar Ujala Meerut
इसी स्थान पर दिया था कर्ण को श्राप
बताया जाता है कि भगवान परशुराम ने इसी स्थान पर कर्ण को श्राप दिया था। महंत एकादशी गिरी महाराज बताते हैं भगवान परशुराम इसी स्थान पर कर्ण की गोद पर अपना सिर रखकर विश्राम कर रहे थे।  को जमीन पर रेंग रहे बिच्छू ने कर्ण के पांव काट लिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
प्राचीन बरगद का पेड़ - फोटो : Amar Ujala Meerut
महंत बताते हैं कि बिच्छू के काटने पर भी कर्ण जरा भी नहीं हिले, लेकिन उनके पांव से बह रहे खून से भगवान परशुराम की निद्रा भंग हो गई, उन्होंने क्रोधित होकर कर्ण को सूत पुत्र बताकर श्राप दिया था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें