वट सवित्री वत्र पर अलोपीदेवी मंदिर में वृक्ष की परिक्रमा कर पूजन करती महिलाएं।
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बृहस्पतिवार को वट वृक्षों के नीचे व्रतियों के पहुंचने का सिलसिला सुबह से ही आरंभ हो गया। संगम के अलावा गंगा, यमुना के घाटों पर डुबकी लगाने के बाद सज धज कर महिलाएं वट सावित्री की पूजा के लिए निकलीं। द्रोपदी घाट पर वटवृक्ष की पूजा के लिए अशोक नगर से लेकर सीडीए पेंशन कॉलोनी तक की महिलाएं पहुंची। वहां वट की पूजा के बाद कलावा के धागों से परिक्रमा की जाती रही। इस दौरान पूजा के लिए वटों की छाया में पहुंचने वाली सुहागिनों में से किसी के हाथ में पूजा की थाली तो किसी के हाथ में डलिया दिखी। महिलाओं के साथ परिवार के सदस्य भी पूजा की सामग्री लेकर चल रहे थे। इस दौरान वट वृक्ष के नीचे पूजा कर सावित्री और सत्यवान की प्रतिमाओं की भी प्रतिष्ठापना की गई। फिर, वेदियां सजाकर तरह-तरह के फल, बांस के पंखे, पूड़ी, हलवा, गुलगुला अर्पित किया गया।