प्रयागराज में बाढ़ आने के बाद लोगों को काफी परेशानी झेलनी पढ़ रही है। लोग कंट्रोल रूम में फोन कर लोगों से बीमार को अस्पताल पहुंचाने की गुहार लगा रहे हैं।
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गंगा की रफ्तार स्थिर होने के बावजूद दारागंज गंगा मूर्ति स्थल चौराहे पर भरा बाढ़ का पानी
- फोटो : अमर उजाला
प्रयागराज में गंगा और यमुना के जलस्तर में बुधवार को थोड़ी गिरावट दर्ज की गई लेकिन खतरा बरकरार है। फाफामऊ में बुधवार को गंगा खतरे के निशान (84.738 मीटर) से ऊपर 85.74 सेंटीमीटर रिकॉर्ड किया गया। वहीं नैनी में यमुना नदी का जलस्तर 85.31 सेंटीमीटर रिकॉर्ड किया गया। दोनों नदियों के खतरे के निशान से ऊपर बहने से करीब पांच लाख की आबादी बाढ़ से जूझ रही है।
समय के साथ बाढ़ पीड़ितों की दुश्वारियां भी बढ़ती जा रही हैं। आशियाना छूटने के बाद अब उनके सामने भोजन-पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि राहत शिविरों में लगातार बाढ़ प्रभावित लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है।
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छोटा बघाड़ा क्षेत्र में बाढ़ के पानी से घर आने जाने के लिए नाव का सहारा लेते लोग
- फोटो : अमर उजाला
बीते रोज जहां 8386 लोगों ने सरकारी राहत शिविरों में शरण ली थी, वहीं मंगलवार को यह संख्या बढ़कर 9470 हो गई। यह संख्या अभी और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
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दारागंज के निचले इलाके में बाढ़ के पानी से कुछ इस तरह आते-जाते लोग
- फोटो : अमर उजाला
पानी-परेशानी... हर घर की यही कहानी
प्रयागराज में गंगा, यमुना की बाढ़ में 290 गांव और मोहल्ले घिर गए हैं। तकरीबन 65 हजार लोग बेघर हो चुके हैं। ऐसे में आपदा कंट्रोल रूम पर फोन कर कई लोग मदद मांग रहे हैं। चार दिन से भूखे होने की बात कहकर लोग खाने की भी मांग कर रहे हैं। कंट्रोल रूम में दर्ज मामलों पर गौर करें तो मंगलवार को बेली कछार से काजल मिश्रा, करेलाबाग से निकार बानो, कोटवा से मणिशंकर यादव ने फोन कर विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग की।
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सादियाबाद इलाके में बाढ़ के पानीमें डूबा स्कूल
- फोटो : अमर उजाला
अशोक नगर से मनीषा, राजापुर से रिषभ पाल, बेली कछार से संजय गुप्ता, बेली से विपिन यादव, छोटा बघाड़ा से विभा शुक्ला, गंगानगर से इंद्रजीत सिंह ने भी कंट्रोल रूम पर फोन कर सहायता मांगी। प्रतिदिन कंट्रोल रूम पर लगभग 250 से 300 लोगों के फोन आ रहे हैं।
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सलोरी इलाके में बाढ़ के पानी में डूबी पहली मंजिल तो लोग दूसरी मंजिल पर शरण लेने को मजबूर हो गए है
- फोटो : अमर उजाला
केस एक
मंगलवार को करीब एक बजे मनसैता से पूनम ने फोन कर बताया कि उनके यहां चार बच्चे डूब गए हैं। एसडीएम सोरांव को सूचना बाद फिर महिला ने फोन कर बताया कि फोन तो दस लोगों के आ चुके हैं लेकिन मदद के लिए कोई नहीं आया। जबकि घटना हुए एक घंटे से अधिक समय बीत चुका है।
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सादियाबाद इलाके में बाढ़ के पानीमें डूबा स्कूल
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केस दो
सलोरी स्थित शुक्ला मार्केट से हाईकोर्ट की अधिवक्ता ममता तिवारी ने सोमवार की रात दस बजे कंट्रोल पर फोन किया। उन्होंने बताया कि उनके परिवार के 15 लोग चार दिन से बाढ़ में फंसे हैं। कंट्रोल रूम से एसडीएम सदर को जानकारी दी गई। ममता के अनुसार, उनके पास कई लोगों के फोन आए पर मदद नहीं मिली।
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अशोक नगर चौराहे स्थित ऋषिकुल विद्यालय राहत शिविर में आश्रय लिए लोग
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केस तीन
बेला गंगानगर से संदीप मौर्य ने फोन कर जानकारी दी कि वह कई दिनों से बाढ़ में फंसे हुए हैं और चाह रहे हैं। ड्यूटी पर तैनात ट्रेनी लेखपाल वेदप्रकाश और जयदीप ने इसकी सूचना एसडीआरएफ को दी। एक घंटे में उन्हें मदद मिल गई। इसी तरह बेली कॉलोनी से अमित कुमार ने बेटी की तबीयत खराब होने की सूचना दी तो उन्हें थोड़ी देर में नाव मुहैया करा दी गई।
मकान का पहला तल डूबने के बाद कुछ इस तरह बाहर निकलता युवक।
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केस चार
राजापुर की गली नंबर नौ से दीपक पटेल ने फोन कर बताया कि उनके मकान में करंट आ रहा है। पशुधन प्रसार अधिकारी महेन्द्र पुष्पाकर ने विद्युत निगम के अधिकारियों को सूचना दी लेकिन दो घंटे तक कनेक्शन विच्छेद नहीं किया गया। दोबारा फोन करने पर कनेक्शन कटवाया गया।