कभी ट्रक पर चढ़े तो कभी मालगाड़ी में लटके ...। जब कुछ नहीं मिला तो भूखे प्यासे पैदल ही चल पड़े। तमाम दुश्वारियां झेलते हुए दस दिन बाद कौशाम्बी के 11 कामगार बुधवार रात अपने घर पहुंचे। सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने सभी को आश्रम पद्यति विद्यालय कोइलहा में क्वारंटीन करा दिया है।
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lockdown in kaushambi
- फोटो : lockdown in kaushambi
सरायअकिल क्षेत्र के दिया उपरहार निवासी शशि प्रकाश, छोटेलाल, महेन्द्र कुमार, विनोद कुमार, मनोज कुमार, कुलदीप, संतलाल, नरेश, सज्जन, रंजीत व भूपेंद्र मुंबई में रहकर मजदूरी करते थे। लॉक डाउन के बाद इन कामगारों को पूरा भरोसा था कि गांव लौटने के लिए साधन मिल जाएगा। हालांकि ऐसा हुआ नहीं। इस बीच कामगारों के पास रहा रुपया भी खत्म होने लगा। लिहाजा दो जून की रोटी के लाले पड़ने लगे। ऐसे में सभी दस रोज पहले पैदल ही गांव के लिए निकल पड़े। कामगारों ने बताया कि रास्ते में रहम करके कुछ दूर तक कभी किसी ट्रक वाले ने लिफ्ट दे दी तो कभी टैंकर वाले ने।
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- फोटो : lockdown in kaushambi
रेलवे लाइन पर काफी देर तक खड़े रहकर धीमी गति से आने वाली मालगाड़ी का इंतजार करते थे। मालगाड़ी आने पर उसी में पीछे लटक जाते थे। जहां से रास्ता नहीं समझ आता था, वहीं उतर जाते थे। ज्यादा सफर कामगारों ने पैदल ही तय किया। इस बीच भूखे-प्यासे भी रहे। सभी के पैरों में छाले पड़ गए। कामगारों का कहना है कि तमाम तरह की दुश्वारियां झ़लने के बाद बुधवार रात करीब आठ बजे जब वे गांव पहुंचे तो हर कोई उन्हें घूरकर देख रहा था। यहां तक की परिवार वालों ने भी भीतर नहीं दाखिल होने दिया। इसी बीच पुलिस वाले पहुंच गए। पुलिस ने सभी को कोइलहा गांव स्थित आश्रम पद्यति विद्यालय में 14 दिन के लिए क्वारंटीन करा दिया है। एकांतवास की अवधि पूरी करने के बाद ही युवक घर पहुंच सकेंगे।