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प्रयागराज में बस की छत पर बैठे स्नानार्थी डॉट पुल से टकराए, एक की मौत

Thu, 23 Jan 2020 01:24 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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prayagraj news - फोटो : प्रयागराज
जार्जटाउन में मधवापुर डॉट पुल के पास बुधवार दोपहर दर्दनाक हादसा हुआ। यहां बस की छत पर सवार होकर संगम जा रहे बहराइच जिले के श्रद्धालु डॉट पुल से टकरा गए। इसमें एक की मौत हो गई, जबकि सात श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को एसआरएन में भर्ती कराया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर एक को लखनऊ रेफर कर दिया गया। 
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prayagraj news - फोटो : प्रयागराज
हादसा दोपहर तीन बजे के करीब हुआ। बहराइच जिले के रहने वाले श्रद्धालुओं से भरी बस संगम की ओर जा रही थी। इनमें अधिकांश तो बस के भीतर बैठे थे, लेकिन आठ छत पर सवार थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बस जैसे ही मधवापुर के पास स्थित डॉट पुल के नीचे पहुंची, इसकी छत पर बैठे श्रद्धालु इससे टकरा गए। जोरदार टक्कर से कुछ श्रद्धालु नीचे गिर पड़े, जबकि अन्य भी चोटिल होकर चीखने लगे। आसपास के लोगोें के शोर मचाने पर चालक ने बस रोकी, लेकिन तब तक वह डॉट पुल पार हो चुका था। बस रुकने पर उसमें सवार लोग नीचे उतरे तो साथियों को लहूलुहान देख उनके होश उड़ गए। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को एसआरएन अस्पताल पहुंचाया। लेकिन वहां बहराइच के मंगलपुरवा गांव के रहने वाले सुशील कुमार (45) की मौत हो गई।
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prayagraj news - फोटो : प्रयागराज
उधर हालत गंभीर देख एक अन्य घायल रामू शुक्ला (42) को लखनऊ रेफर कर दिया गया। अन्य घायलों जवाहर लाल (55), विनीत शुक्ला (30), आकाश शुक्ला (17), गुड्डू शुक्ला (40) सभी निवासी ग्राम मंगलपुरवा और मुकेश कुमार(35) निवासी रामपुरवा व सूरज(22) निवासी पचदेवरा थाना हरदी जनपद बहराइच का इलाज चल रहा है। उधर घटना के बाद चालक बस छोड़कर भाग निकला। पुलिस बस को थाने ले गई और सीज कर दिया। उधर एक घायल के परिजन राजकुमार मिश्रा ने तहरीर देकर बस चालक पर तेजी व लापरवाही पूर्वक वाहन चलाने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस का कहना है कि उसकी तलाश की जा रही है। 

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श्रद्धालुओं ने रोका था, फिर भी चढ़ गए छत पर

बस में सवार श्रद्धालुओं से पूछताछ में पता चला कि वे मंगलवार रात 10 बजे के करीब बहराइच से निकले थे। एक दिन पहले ही सभी ने मौनी अमावस्या पर संगम स्नान की योजना बनाई थी। बताया कि दोपहर एक बजे के करीब बस फाफामऊ में एक ढाबे पर रुकी थी, जहां सभी लोगों ने चाय-नाश्ता किया। यहां आने तक सभी लोग बस के भीतर ही सवार थे। फाफामऊ से बस चलने के पहले ही सुशील समेत आठ लोग बस की छत पर सवार हो गए। ऐसा करने पर साथ मौजूद कुछ लोगों ने उन्हें रोका भी, लेकिन वह नहीं माने। 
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ओवरलोड थी बस, कैसे नहीं पड़ी नजर

यह हादसा चुस्त दुरुस्त पुलिसिंग के दावों पर भी सवाल खड़े करता है। दरअसल यह बात भी सामने आई है कि हादसे के वक्त बस ओवरलोड थी। 60 सीटर बस में 70 से ज्यादा यात्री सवार थे। चौंकाने वाली बात यह भी है कि बस की छत पर बैठकर स्नानार्थी फाफामऊ से मधवापुर डॉट पुल तक चले आए और कहीं भी पुलिस की नजर उन पर नहीं पड़ी। जबकि स्नानपर्व के मद्देनजर शहर भर में पुलिस तैनात है। यही नहीं हर चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस के साथ ही प्रमुख स्थानों पर डायल 112 की गाड़ियां भी तैनात की गई हैं। फिर माघ मेले के मद्देनजर शहर भर की हर गतिविधि पर आईट्रिपलसी के जरिए भी नजर रखने का दावा अफसर करते रहते हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर कैसे बस की छत पर श्रद्धालुओं को बैठाकर बस शहर में घूमती रही। 
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